26 जुलाई 2026
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यूपी में कैच-अप शिक्षण अभियान को नई रफ्तार, 31 जुलाई तक सभी सरकारी स्कूलों में लगेंगे निपुण लक्ष्य पोस्टर

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यूपी में कैच-अप शिक्षण अभियान को नई रफ्तार, 31 जुलाई तक सभी सरकारी स्कूलों में लगेंगे निपुण लक्ष्य पोस्टर

सारांश

पढ़ाई में पिछड़े बच्चों को मुख्यधारा में लाने के लिए योगी सरकार ने कैच-अप शिक्षण अभियान को धार दी है — 31 जुलाई की समयसीमा, 15 सूत्रीय रणनीति और निपुण लक्ष्य पोस्टरों के साथ। असली परीक्षा कक्षा के भीतर होगी।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश सरकार ने 26 जुलाई 2026 को कैच-अप शिक्षण अभियान को और प्रभावी बनाने का निर्णय लिया।
प्रदेश के सभी सरकारी विद्यालयों, बीआरसी , बीएसए कार्यालयों और डायट में 31 जुलाई तक आईईसी सामग्री प्रदर्शित की जाएगी।
अभियान के तहत 15 सूत्रीय रणनीति तैयार की गई है, जिसमें बच्चों की पहचान से लेकर अभिभावक सहभागिता तक शामिल है।
निपुण लक्ष्य पोस्टरों में बालवाटिका से कक्षा 5 तक भाषा, गणित, पर्यावरण और अंग्रेजी के स्पष्ट अधिगम लक्ष्य निर्धारित।
महानिदेशक मोनिका रानी ने जिला और खंड स्तर के अधिकारियों को समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश जारी किए।
रीडिंग कॉर्नर , पुस्तक चर्चा और कहानी वाचन के माध्यम से बच्चों में पठन की आदत विकसित करने पर विशेष जोर।

उत्तर प्रदेश सरकार ने 26 जुलाई 2026 को बुनियादी शिक्षा में व्याप्त अधिगम अंतर (लर्निंग गैप) को दूर करने के लिए कैच-अप शिक्षण अभियान को नई गति देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लिए गए इस फैसले के तहत प्रदेश के समस्त सरकारी विद्यालयों, बीआरसी, बीएसए कार्यालयों और डायट में कैच-अप शिक्षण, निपुण लक्ष्य, कक्षा शिक्षण की 10 प्रभावी प्रथाओं तथा रीडिंग कैंपेन से जुड़ी आईईसी सामग्री 31 जुलाई तक प्रदर्शित की जाएगी। यह अभियान उन बच्चों को शैक्षणिक मुख्यधारा में वापस लाने की दिशा में एक ठोस कदम है जो अपनी कक्षा के अनुरूप अधिगम स्तर से पीछे रह गए हैं।

निर्देश और क्रियान्वयन

महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने सहायक शिक्षा निदेशकों (बेसिक), डायट प्राचार्यों, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों, जिला समन्वयकों, एसआरजी तथा एआरपी को समयबद्ध क्रियान्वयन के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों में कहा गया है कि आईईसी सामग्री का मुद्रण करवाकर उसे विद्यालयों और संबंधित कार्यालयों में प्रमुख स्थानों पर लगाया जाए, ताकि शिक्षक प्रतिदिन इन शैक्षणिक संदेशों का उपयोग कक्षा शिक्षण में कर सकें।

15 सूत्रीय रणनीति का खाका

अभियान के प्रभावी संचालन के लिए 15 सूत्रीय रणनीति तैयार की गई है। इसके अंतर्गत अधिगम स्तर से पीछे रहे बच्चों की पहचान, आधारभूत दक्षताओं का आकलन, स्तरानुसार समूह बनाकर शिक्षण, दैनिक एवं साप्ताहिक शिक्षण योजना, गतिविधि आधारित शिक्षण, टीएलएम का प्रभावी उपयोग, नियमित अभ्यास, सतत मूल्यांकन, रीडिंग गतिविधियों को बढ़ावा और अभिभावकों की सहभागिता जैसे बिंदुओं पर विशेष बल दिया गया है। बच्चों की प्रगति की निरंतर निगरानी भी इस रणनीति का अभिन्न हिस्सा है।

निपुण लक्ष्य और कक्षा शिक्षण की 10 प्रभावी प्रथाएँ

विद्यालयों में प्रदर्शित किए जाने वाले 'निपुण लक्ष्य' पोस्टरों में बालवाटिका से लेकर कक्षा 5 तक भाषा, गणित, पर्यावरण अध्ययन और अंग्रेजी के स्पष्ट अधिगम लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इससे शिक्षक और विद्यार्थी दोनों के सामने प्रत्येक कक्षा की अपेक्षित दक्षताएँ स्पष्ट रहेंगी और शिक्षण को परिणाम-आधारित बनाया जा सकेगा। आईईसी सामग्री में शामिल कक्षा शिक्षण की 10 प्रभावी प्रथाओं में बच्चों की सक्रिय सहभागिता, गतिविधि आधारित शिक्षण, खुले प्रश्नों का प्रयोग, लेखन एवं पठन अभ्यास, सतत मूल्यांकन और सहयोगात्मक अधिगम जैसी पद्धतियाँ शामिल हैं।

रीडिंग कैंपेन और भाषा दक्षता पर जोर

आईईसी सामग्री में रीडिंग कैंपेन को भी प्रमुखता दी गई है। विद्यालयों में नियमित पठन गतिविधियाँ, रीडिंग कॉर्नर, पुस्तक चर्चा, कहानी वाचन और नवाचारी प्रयासों के माध्यम से बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर बुनियादी साक्षरता और संख्या-ज्ञान को लेकर चिंताएँ बनी हुई हैं। गौरतलब है कि निपुण भारत मिशन के तहत 2026-27 तक कक्षा 3 के सभी बच्चों को बुनियादी पठन-लेखन में दक्ष बनाने का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित है।

आगे की राह

योगी सरकार का मानना है कि विद्यालयों में एकसमान शैक्षणिक संदेश और स्पष्ट अधिगम लक्ष्य उपलब्ध होने से शिक्षकों के कार्य को दिशा मिलेगी और बच्चों के सीखने के परिणामों में सुधार आएगा। कैच-अप शिक्षण, निपुण लक्ष्य, प्रभावी कक्षा प्रथाओं और रीडिंग अभियान को एकीकृत रूप से लागू कर प्रदेश में दक्षता-आधारित शिक्षण की समान कार्यसंस्कृति विकसित करने का लक्ष्य है। अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जमीनी स्तर पर शिक्षक इन संदेशों को कितनी प्रभावी तरह से कक्षा शिक्षण में उतार पाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पोस्टर लगाने और सीखने के परिणामों में सुधार के बीच की खाई को पाटना अभी बाकी है। उत्तर प्रदेश में लाखों सरकारी स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात और प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी जैसी बुनियादी चुनौतियाँ बनी हुई हैं, जिनका समाधान आईईसी सामग्री अकेले नहीं कर सकती। 15 सूत्रीय रणनीति महत्वाकांक्षी है, परंतु इसकी निगरानी और जवाबदेही तंत्र स्पष्ट नहीं है — बिना मापने योग्य परिणामों के, यह अभियान भी पिछले कई शैक्षणिक अभियानों की तरह कागज़ों तक सीमित रह सकता है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी का कैच-अप शिक्षण अभियान क्या है?
कैच-अप शिक्षण अभियान उत्तर प्रदेश सरकार की वह पहल है जिसके तहत अपनी कक्षा के अनुरूप अधिगम स्तर से पीछे रहे बच्चों को चिह्नित कर उन्हें विशेष शिक्षण के माध्यम से मुख्यधारा में लाया जाता है। इसमें स्तरानुसार समूह शिक्षण, गतिविधि आधारित अध्यापन और सतत मूल्यांकन शामिल हैं।
31 जुलाई की समयसीमा का क्या महत्व है?
31 जुलाई 2026 तक प्रदेश के सभी सरकारी विद्यालयों, बीआरसी, बीएसए कार्यालयों और डायट में कैच-अप शिक्षण, निपुण लक्ष्य और रीडिंग कैंपेन से संबंधित आईईसी सामग्री प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है। यह समयसीमा नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में ही अधिगम लक्ष्यों को स्पष्ट करने के उद्देश्य से तय की गई है।
निपुण लक्ष्य पोस्टर में क्या होता है?
निपुण लक्ष्य पोस्टरों में बालवाटिका से कक्षा 5 तक भाषा, गणित, पर्यावरण अध्ययन और अंग्रेजी के स्पष्ट अधिगम लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इससे शिक्षक और विद्यार्थी दोनों को प्रत्येक कक्षा की अपेक्षित दक्षताओं की जानकारी रहती है और शिक्षण परिणाम-आधारित बनता है।
इस अभियान से किन बच्चों को फायदा होगा?
इस अभियान का सीधा लाभ उन बच्चों को मिलेगा जो अपनी कक्षा के अनुरूप अधिगम स्तर से पीछे हैं — विशेषकर सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले वे बच्चे जिनकी बुनियादी पठन-लेखन और गणितीय दक्षताएँ अपेक्षा से कम हैं। अभिभावकों की सहभागिता को भी 15 सूत्रीय रणनीति में शामिल किया गया है।
रीडिंग कैंपेन के तहत स्कूलों में क्या होगा?
रीडिंग कैंपेन के अंतर्गत विद्यालयों में रीडिंग कॉर्नर स्थापित किए जाएंगे, नियमित पठन गतिविधियाँ, पुस्तक चर्चा और कहानी वाचन जैसे नवाचारी प्रयास किए जाएंगे। इसका उद्देश्य बच्चों में पढ़ने की स्वाभाविक आदत विकसित करना और उनकी भाषा दक्षता व अभिव्यक्ति क्षमता को मजबूत बनाना है।
राष्ट्र प्रेस
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