11 जुलाई 2026
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योगी सरकार का पठन संस्कृति अभियान: UP के सरकारी स्कूलों में DEAR कैंपेन, 'चैंपियन रीडर' पुरस्कार

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योगी सरकार का पठन संस्कृति अभियान: UP के सरकारी स्कूलों में DEAR कैंपेन, 'चैंपियन रीडर' पुरस्कार

सारांश

योगी सरकार ने सत्र 2026-27 में UP के सरकारी स्कूलों में DEAR कैंपेन, सुपर-20/सुपर-30 रीडिंग चैलेंज और 'चैंपियन रीडर ऑफ द इयर' पुरस्कार लागू किए हैं। लक्ष्य है — पाठ्यक्रम से परे बच्चों में पढ़ने की आदत, तार्किक सोच और रचनात्मक लेखन क्षमता विकसित करना।

मुख्य बातें

योगी सरकार ने शैक्षिक सत्र 2026-27 में परिषदीय और माध्यमिक विद्यालयों के लिए पठन संस्कृति पर व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए।
DEAR (ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड) कैंपेन के तहत सप्ताह में एक बार छात्र, शिक्षक और प्रधानाध्यापक एक साथ पुस्तकें पढ़ेंगे।
प्राथमिक स्तर पर 'सुपर-20' और उच्च प्राथमिक स्तर पर 'सुपर-30' रीडिंग चैलेंज नियमित रूप से आयोजित होंगे।
सर्वाधिक पुस्तकें पढ़ने वाले विद्यार्थी को 'चैंपियन रीडर ऑफ द इयर' घोषित कर पुरस्कृत किया जाएगा।
अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा के निर्देशों के क्रियान्वयन हेतु डायट प्राचार्य, एडी बेसिक, बीएसए और बीईओ को विशेष रूप से निर्देशित किया गया।
स्क्रीन टाइम घटाने और समाचार-पत्र पठन को स्कूल दिनचर्या में शामिल करने पर विशेष जोर।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के शुभारंभ पर लखनऊ से परिषदीय और माध्यमिक विद्यालयों में पठन संस्कृति को व्यापक रूप से मजबूत करने के लिए नए सिरे से दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत, भाषा दक्षता और रचनात्मक सोच विकसित करना है। सरकार की मंशा है कि पठन केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रहे, बल्कि बच्चों की तार्किक और अभिव्यक्ति क्षमता भी सुदृढ़ हो।

नए दिशा-निर्देश किसने और क्यों जारी किए

अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से पहले ही विद्यालयों में पठन संस्कृति, समाचार-पत्र पठन और रीडिंग गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए व्यापक निर्देश जारी किए जा चुके थे। अब उन्हीं निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए समस्त प्राचार्य डायट, एडी बेसिक, बीएसए और बीईओ को विशेष रूप से निर्देशित किया गया है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान को प्राथमिकता देती है।

मुख्य गतिविधियाँ और कार्यक्रम

विद्यालयों में नियमित रीडिंग ऑवर, समाचार-पत्रों की उपलब्धता और सुबह की सभा में समाचार वाचन को अनिवार्य रूप से लागू कराने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही 'DEAR' (ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड) कैंपेन को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके तहत सप्ताह में एक निर्धारित समय पर छात्र-छात्राएँ, शिक्षक और प्रधानाध्यापक अपनी पसंद की पुस्तकें पढ़ेंगे।

प्राथमिक स्तर पर 'सुपर-20' और उच्च प्राथमिक स्तर पर 'सुपर-30' रीडिंग चैलेंज को नियमित रूप से संचालित किया जाएगा। निर्धारित संख्या में पुस्तकें पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा और विद्यालय स्तर पर सर्वाधिक पुस्तकें पढ़ने वाले छात्र को 'चैंपियन रीडर ऑफ द इयर' घोषित कर पुरस्कृत किया जाएगा।

स्क्रीन टाइम घटाने पर भी जोर

'समाचार-पत्र पठन', 'रीडिंग ऑवर' और 'स्क्रीन टाइम कम करने' जैसी गतिविधियों को अब और अधिक गंभीरता के साथ लागू कराने पर बल दिया जा रहा है। गौरतलब है कि डिजिटल उपकरणों के बढ़ते उपयोग के बीच बच्चों में पठन की आदत घटना एक राष्ट्रव्यापी चिंता बन चुकी है, और यह पहल उसी चुनौती का जवाब देने की कोशिश है।

लेखन और रचनात्मक अभिव्यक्ति पर विशेष ध्यान

शासन की मंशा है कि विद्यार्थी केवल पुस्तक पठन तक सीमित न रहें। पढ़ी गई पुस्तकों, कहानियों और समाचार-पत्रों के आधार पर विद्यार्थियों से लेखन कार्य एवं रचनात्मक गतिविधियाँ कराई जाएंगी। विद्यालय स्तर पर लेखन प्रतियोगिताओं के आयोजन पर भी विशेष जोर दिया गया है, जिससे संवाद क्षमता और स्वतंत्र सोच को बल मिलेगा।

आगे क्या होगा

सरकार की अपेक्षा है कि इन निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रत्येक विद्यालय में पढ़ने का सकारात्मक वातावरण तैयार होगा। अधिकारियों को व्यक्तिगत और समर्पित प्रयास सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं — अब देखना यह होगा कि ज़मीनी स्तर पर इन गतिविधियों की निगरानी और जवाबदेही का तंत्र कितना मजबूत बनता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन का है — उत्तर प्रदेश के लाखों सरकारी स्कूलों में पुस्तकों की उपलब्धता, पुस्तकालयों की स्थिति और प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी जैसी बुनियादी चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं। 'चैंपियन रीडर' जैसे प्रोत्साहन सराहनीय हैं, पर बिना मजबूत निगरानी तंत्र के ये गतिविधियाँ कागज़ों तक सिमट सकती हैं। गौरतलब है कि इससे पहले भी ऐसे कई अभियान जोश के साथ शुरू हुए और धीरे-धीरे ठंडे पड़ गए। जब तक इन गतिविधियों का नियमित मूल्यांकन और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती, तब तक पठन संस्कृति का सपना केवल घोषणाओं तक ही रह सकता है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

योगी सरकार की पठन संस्कृति पहल क्या है?
यह उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शैक्षिक सत्र 2026-27 में परिषदीय और माध्यमिक विद्यालयों में बच्चों की पढ़ने की आदत, भाषा दक्षता और रचनात्मक सोच विकसित करने के लिए शुरू किया गया व्यापक अभियान है। इसमें DEAR कैंपेन, रीडिंग ऑवर, समाचार-पत्र पठन और लेखन प्रतियोगिताएँ शामिल हैं।
DEAR कैंपेन क्या है और यह UP के स्कूलों में कैसे लागू होगा?
'DEAR' यानी 'ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड' — इसके तहत सप्ताह में एक निर्धारित समय पर छात्र-छात्राएँ, शिक्षक और प्रधानाध्यापक सभी काम छोड़कर अपनी पसंद की पुस्तकें पढ़ेंगे। यह गतिविधि सभी परिषदीय और माध्यमिक विद्यालयों में नियमित रूप से संचालित की जाएगी।
सुपर-20 और सुपर-30 रीडिंग चैलेंज क्या हैं?
प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों के लिए 'सुपर-20' और उच्च प्राथमिक स्तर के लिए 'सुपर-30' रीडिंग चैलेंज है, जिसमें निर्धारित संख्या में पुस्तकें पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा। सर्वाधिक पुस्तकें पढ़ने वाले छात्र को 'चैंपियन रीडर ऑफ द इयर' का पुरस्कार मिलेगा।
इन निर्देशों को लागू कराने की जिम्मेदारी किसकी है?
अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा के निर्देशों के क्रियान्वयन के लिए समस्त प्राचार्य डायट, एडी बेसिक, बीएसए और बीईओ को व्यक्तिगत और समर्पित प्रयास सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या इस अभियान में केवल पुस्तक पठन शामिल है?
नहीं, इस अभियान में पुस्तक पठन के साथ-साथ समाचार-पत्र पठन, सुबह की सभा में समाचार वाचन, लेखन प्रतियोगिताएँ और रचनात्मक गतिविधियाँ भी शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य है कि विद्यार्थियों की स्वतंत्र लेखन क्षमता और रचनात्मक सोच भी विकसित हो।
राष्ट्र प्रेस
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