योगी सरकार का बड़ा कदम: 'अपार प्लस' से 4.24 करोड़ छात्रों को मिलेगी यूनिक डिजिटल ID

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योगी सरकार का बड़ा कदम: 'अपार प्लस' से 4.24 करोड़ छात्रों को मिलेगी यूनिक डिजिटल ID

सारांश

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के अपार प्लस मिशन के तहत 4.24 करोड़ छात्रों को यूनिक डिजिटल ID दी जा रही है। अब तक 2.68 करोड़ बच्चे जुड़ चुके हैं। सरकारी स्कूलों में 82%25 लक्ष्य पूरा। आधार-लिंक्ड यह ID ड्रॉपआउट रोकेगी और फर्जी नामांकन पर लगाम लगाएगी।

Key Takeaways

  • अपार प्लस मिशन के तहत उत्तर प्रदेश के 4.24 करोड़ छात्रों को यूनिक डिजिटल ID देने का लक्ष्य है।
  • 11 अप्रैल 2025 से शुरू अभियान में अब तक 2.68 करोड़ से अधिक बच्चे जुड़े — 63%25 लक्ष्य पूरा।
  • सरकारी विद्यालयों में 82%25, सहायता प्राप्त में 74.84%25, निजी स्कूलों में 50.54%25 प्रगति दर्ज।
  • यह ID आधार से लिंक होगी — स्कूल बदलने पर रिकॉर्ड स्वतः ट्रांसफर, ड्रॉपआउट और फर्जी नामांकन पर लगाम।
  • हर शनिवार सेचुरेशन कैंप और जिला-ब्लॉक स्तर पर समीक्षा से मिशन मोड में कार्य जारी।
  • मिशन की अंतिम समयसीमा 30 जून 2026 — पूर्ण होने पर UP देश का अग्रणी डिजिटल शिक्षा राज्य बनेगा।

लखनऊ, 23 अप्रैल 2025उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के अपार प्लस मिशन के तहत राज्य के 4.24 करोड़ छात्रों को एक यूनिक डिजिटल शैक्षणिक पहचान पत्र (APAR ID) दिया जा रहा है। 11 अप्रैल 2025 से शुरू हुए इस अभियान में अब तक 2.68 करोड़ से अधिक बच्चों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा चुका है, जो कुल लक्ष्य का 63 प्रतिशत से अधिक है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शिक्षा को डेटा-आधारित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक प्रयास है।

अपार प्लस मिशन: क्या है यह व्यवस्था?

ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (APAR Plus) के अंतर्गत प्रत्येक छात्र को एक स्थायी यूनिक डिजिटल ID प्रदान की जा रही है। इस ID में छात्र का नामांकन, उपस्थिति, कक्षा प्रगति, परीक्षा परिणाम और अन्य शैक्षणिक उपलब्धियां एकीकृत रूप से दर्ज होती हैं।

यह ID आधार कार्ड से लिंक होती है, जिससे छात्र की पहचान प्रमाणित होती है। स्कूल बदलने की स्थिति में छात्र का पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड स्वतः स्थानांतरित हो जाता है — यानी डेटा की निरंतरता बनी रहती है और कोई भी जानकारी खोती नहीं।

यह व्यवस्था सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी मान्यता प्राप्त — तीनों प्रकार के विद्यालयों में एक साथ लागू की जा रही है, जो इसे उत्तर प्रदेश के शिक्षा इतिहास में अब तक की सबसे व्यापक डिजिटल पहल बनाती है।

श्रेणीवार प्रगति: सरकारी स्कूल सबसे आगे

मिशन की प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी विद्यालयों में 82 प्रतिशत से अधिक छात्रों को अपार प्लस से जोड़ा जा चुका है — जो सभी श्रेणियों में सर्वाधिक है। सहायता प्राप्त विद्यालयों में 74.84 प्रतिशत, निजी विद्यालयों में 50.54 प्रतिशत और अन्य श्रेणियों में 46.97 प्रतिशत प्रगति दर्ज की गई है।

यह आंकड़े बताते हैं कि निजी स्कूलों में अभी भी लगभग आधे छात्र इस प्रणाली से बाहर हैं। 30 जून 2026 तक शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने के लिए प्रशासन को निजी और अन्य श्रेणी के स्कूलों पर विशेष ध्यान देना होगा।

ड्रॉपआउट रोकने और फर्जीवाड़े पर लगाम

अपार प्लस की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इससे ड्रॉपआउट छात्रों और फर्जी नामांकन की पहचान आसानी से हो सकेगी। अब तक उत्तर प्रदेश में हजारों ऐसे मामले सामने आते रहे हैं जहां कागजों पर नामांकन दिखाया जाता था लेकिन छात्र कक्षा में उपस्थित नहीं होते थे।

रियल-टाइम डेटा के माध्यम से सरकार को प्रभावी मॉनिटरिंग और नीति निर्माण में सीधी सहायता मिलेगी। इससे छात्रवृत्ति वितरण, उच्च शिक्षा प्रवेश और करियर ट्रैकिंग भी अधिक पारदर्शी और सुगम हो जाएगी।

मिशन मोड में संचालन: साप्ताहिक कैंप और जिला समीक्षा

योगी सरकार ने इस मिशन को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए डेटा शुद्धिकरण, आधार सीडिंग, बायोमेट्रिक अपडेट और अभिभावक सहमति जैसी प्रक्रियाओं को एकीकृत किया है। हर शनिवार टारगेटेड सेचुरेशन कैंप आयोजित किए जा रहे हैं।

जिला और ब्लॉक स्तर पर सतत समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं, जिससे प्रगति की निरंतर निगरानी हो रही है। यह अभियान प्रशासनिक कार्य-संस्कृति में गति और जवाबदेही का नया अध्याय लिख रहा है।

व्यापक संदर्भ: देश में डिजिटल शिक्षा की दिशा

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में हर छात्र को डिजिटल पहचान देने की परिकल्पना की थी। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में — जहां 4.24 करोड़ से अधिक स्कूली छात्र हैं — इस नीति को जमीन पर उतारना एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती थी।

तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्य भी अपार ID लागू करने की प्रक्रिया में हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश की रफ्तार और पैमाना उसे इस दिशा में अग्रणी राज्य बनाता है। 30 जून 2026 तक शत-प्रतिशत नामांकन के साथ उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा बड़ा राज्य बन सकता है जहां हर स्कूली बच्चे की डिजिटल शैक्षणिक पहचान सुनिश्चित हो।

आने वाले महीनों में निजी विद्यालयों की भागीदारी बढ़ाना और अभिभावकों में जागरूकता फैलाना सरकार की प्रमुख प्राथमिकता होगी। यदि मिशन समय पर पूरा होता है तो यह 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले योगी सरकार की शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत होगा।

Point of View

बल्कि उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में दशकों से चले आ रहे फर्जी नामांकन और ड्रॉपआउट के 'अदृश्य संकट' पर सीधा प्रहार है। सवाल यह है कि निजी स्कूलों में अभी भी 50%25 से कम भागीदारी क्यों है — क्या ये संस्थान डेटा पारदर्शिता से बचना चाहते हैं? जिस राज्य में शिक्षा माफिया और भूत-शिक्षकों का इतिहास रहा हो, वहां रियल-टाइम ट्रैकिंग एक जवाबदेही क्रांति है। 2027 के चुनाव से पहले यह मिशन योगी सरकार का 'शिक्षा कार्ड' बन सकता है — लेकिन असली परीक्षा 30 जून 2026 को होगी।
NationPress
23/04/2026

Frequently Asked Questions

अपार प्लस मिशन क्या है और यह कैसे काम करता है?
अपार प्लस (Automated Permanent Academic Account Registry Plus) उत्तर प्रदेश सरकार की एक डिजिटल शिक्षा पहल है जिसके तहत हर छात्र को एक यूनिक आधार-लिंक्ड ID दी जाती है। इस ID में नामांकन, उपस्थिति, परीक्षा परिणाम और शैक्षणिक प्रगति एक ही प्लेटफॉर्म पर दर्ज होती है।
UP में अपार प्लस मिशन में अब तक कितने छात्र जुड़े हैं?
11 अप्रैल 2025 से शुरू हुए इस मिशन में अब तक 2.68 करोड़ से अधिक छात्रों को जोड़ा जा चुका है, जो 4.24 करोड़ के कुल लक्ष्य का 63 प्रतिशत से अधिक है। सरकारी स्कूलों में यह आंकड़ा 82 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
अपार ID से छात्रों को क्या फायदा होगा?
अपार ID से छात्र का पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड एक जगह सुरक्षित रहेगा और स्कूल बदलने पर डेटा स्वतः ट्रांसफर होगा। इससे छात्रवृत्ति, उच्च शिक्षा प्रवेश और करियर ट्रैकिंग भी आसान होगी।
क्या निजी स्कूलों में भी अपार प्लस लागू होगा?
हां, यह व्यवस्था सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी मान्यता प्राप्त सभी स्कूलों में लागू की जा रही है। हालांकि अभी निजी स्कूलों में केवल 50.54 प्रतिशत प्रगति दर्ज हुई है।
अपार प्लस मिशन की अंतिम समयसीमा क्या है?
योगी सरकार ने 30 जून 2026 तक उत्तर प्रदेश के सभी 4.24 करोड़ छात्रों को अपार प्लस से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। हर शनिवार सेचुरेशन कैंप और जिला-ब्लॉक स्तर पर समीक्षा के जरिए इस लक्ष्य को प्राप्त किया जा रहा है।
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