28 जून 2026
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हीट वेव से बच्चों की सुरक्षा: योगी सरकार ने जारी की शिक्षकों के लिए दिग्दर्शिका-2026

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हीट वेव से बच्चों की सुरक्षा: योगी सरकार ने जारी की शिक्षकों के लिए दिग्दर्शिका-2026

सारांश

भीषण गर्मी के बीच योगी सरकार ने स्कूलों के लिए ठोस कदम उठाया है — शिक्षकों को हीट स्ट्रोक पहचान, प्राथमिक उपचार और बचाव का प्रशिक्षण देने वाली दिग्दर्शिका-2026 जारी हुई। हर स्कूल में नोडल शिक्षक, फर्स्ट एड किट और हीट एक्शन प्लान अनिवार्य किया गया है।

मुख्य बातें

बेसिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश ने 28 जून 2026 को 'शिक्षकों के लिए दिग्दर्शिका-2026' जारी की।
दिग्दर्शिका अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा के निर्देश पर तैयार की गई है।
प्रत्येक विद्यालय में स्वास्थ्य नोडल शिक्षक नामित होगा और स्कूल हीट एक्शन प्लान अनिवार्य होगा।
बाहरी गतिविधियाँ सुबह 10 बजे से पहले ; ऑरेंज/रेड अलर्ट पर सभी कठिन बाहरी गतिविधियाँ स्थगित।
हर स्कूल में फर्स्ट एड किट, ओआरएस, डिजिटल थर्मामीटर और 108 एम्बुलेंस संपर्क अनिवार्य।
विद्यार्थियों को हर 20-30 मिनट पर पानी पीने और पानी की बोतल साथ लाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग ने 28 जून 2026 को लखनऊ से 'हीट-संबंधी बीमारियों के प्रति विद्यार्थियों के संवेदनशीलकरण हेतु शिक्षकों के लिए दिग्दर्शिका-2026' जारी की, जो प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों को भीषण गर्मी से बचाने की दिशा में एक ठोस नीतिगत कदम है। अपर मुख्य सचिव (बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा के निर्देश पर तैयार यह दिग्दर्शिका नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ लागू की गई है।

दिग्दर्शिका का उद्देश्य और दायरा

इस दिग्दर्शिका का मुख्य लक्ष्य शिक्षकों को हीट वेव, हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक के लक्षणों की पहचान, प्राथमिक उपचार तथा बचाव के व्यावहारिक उपायों से सुसज्जित करना है। दिग्दर्शिका में स्पष्ट किया गया है कि हीट वेव से विद्यार्थियों की सुरक्षा में शिक्षक सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होंगे। शिक्षक प्रार्थना सभा, कक्षा शिक्षण और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को जागरूक करेंगे। विद्यालयों में 'क्या करें-क्या न करें' संबंधी पोस्टर लगाकर बच्चों, अभिभावकों और विद्यालय समुदाय को भी सचेत किया जाएगा।

स्कूल हीट एक्शन प्लान और आवश्यक व्यवस्थाएँ

योगी सरकार ने प्रत्येक विद्यालय में स्कूल हीट एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक विद्यालय में एक स्वास्थ्य नोडल शिक्षक नामित किया जाएगा, जो हीट वेव से जुड़ी गतिविधियों का समन्वय करेगा। विद्यालय परिसर में आपातकालीन संपर्क नंबर और बचाव संदेश प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित किए जाएंगे। हर स्कूल में फर्स्ट एड किट, ओआरएस, डिजिटल थर्मामीटर तथा 108 एम्बुलेंस सहित चिकित्सा संपर्क व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

समय-सारणी और गतिविधियों पर दिशानिर्देश

गाइडलाइन के अनुसार प्रार्थना सभा, खेलकूद, शारीरिक शिक्षा और अन्य बाहरी गतिविधियाँ सुबह 10 बजे से पहले आयोजित की जाएंगी। ऑरेंज अथवा रेड हीट वेव अलर्ट के दौरान सभी कठिन शारीरिक और बाहरी गतिविधियाँ स्थगित रहेंगी। विद्यार्थियों को प्रत्येक 20 से 30 मिनट के अंतराल पर पानी पीने के लिए प्रेरित किया जाएगा और हर बच्चे को पानी की बोतल साथ लाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अलावा कार्यशील पंखे, पर्याप्त वेंटिलेशन, छायादार स्थान, वृक्षारोपण तथा जहाँ संभव हो कूल रूफ और रिफ्लेक्टिव पेंट जैसी व्यवस्थाओं को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

हीट स्ट्रोक के लक्षण और प्राथमिक उपचार

दिग्दर्शिका में शिक्षकों को निर्देशित किया गया है कि यदि किसी विद्यार्थी में अत्यधिक पसीना, तेज प्यास, सिरदर्द, चक्कर, कमजोरी, मांसपेशियों में ऐंठन, उल्टी, भ्रम या बेहोशी जैसे लक्षण दिखें, तो उसे तत्काल छायादार स्थान पर ले जाकर ठंडी पट्टी रखें और आवश्यकता पड़ने पर 108 एम्बुलेंस या निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। अस्थमा, हृदय रोग, मधुमेह, मोटापा, दिव्यांगता अथवा हाल ही में बुखार या दस्त से पीड़ित विद्यार्थियों की विशेष निगरानी रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। बच्चों को यह भी सिखाया जाएगा कि किसी सहपाठी की तबियत बिगड़ने पर तत्काल शिक्षक को सूचित करें।

अभिभावकों और विद्यालयों से अपील

अभिभावकों से अनुरोध किया गया है कि बच्चों को विद्यालय भेजने से पहले पर्याप्त पानी पिलाएँ, अस्वस्थ बच्चों को घर पर ही रखें और घर पर भी हीट वेव से बचाव संबंधी आदतें अपनाएँ। दिग्दर्शिका में हल्के रंग के सूती वस्त्र, टोपी या छाते के उपयोग और तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी जैसे जलयुक्त फलों के सेवन को प्रोत्साहित किया गया है, जबकि कैफीनयुक्त, कार्बोनेटेड और अत्यधिक मीठे पेयों से बचने की सलाह दी गई है। विद्यालयों को भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अलर्ट पर निरंतर नज़र रखने, हीट वेव संबंधी घटनाओं का अभिलेखीकरण करने और समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — विशेषकर उन ग्रामीण और अर्ध-शहरी स्कूलों में जहाँ पंखे, पेयजल और छायादार स्थान की बुनियादी सुविधाएँ भी अक्सर अनुपस्थित रहती हैं। नोडल शिक्षक की नियुक्ति और मॉक ड्रिल जैसे प्रावधान सराहनीय हैं, परंतु इनकी निगरानी और जवाबदेही का कोई स्वतंत्र तंत्र दिग्दर्शिका में स्पष्ट नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब जलवायु परिवर्तन के कारण उत्तर भारत में हीट वेव की तीव्रता और अवधि दोनों बढ़ रही हैं, और बच्चों पर इसका असर अनदेखा नहीं किया जा सकता।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

योगी सरकार की हीट वेव दिग्दर्शिका-2026 क्या है?
यह उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा 28 जून 2026 को जारी एक विशेष मार्गदर्शिका है, जो शिक्षकों को हीट वेव, हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक की पहचान, प्राथमिक उपचार और बचाव के व्यावहारिक उपाय सिखाती है। इसका उद्देश्य स्कूलों में बच्चों को भीषण गर्मी से सुरक्षित रखना है।
स्कूल हीट एक्शन प्लान में क्या-क्या शामिल है?
प्रत्येक विद्यालय को एक स्वास्थ्य नोडल शिक्षक नामित करना होगा, फर्स्ट एड किट, ओआरएस, डिजिटल थर्मामीटर और 108 एम्बुलेंस संपर्क सुनिश्चित करना होगा। इसके अलावा IMD अलर्ट की निगरानी, हीट वेव घटनाओं का अभिलेखीकरण और मॉक ड्रिल भी अनिवार्य हैं।
ऑरेंज या रेड हीट वेव अलर्ट के दौरान स्कूलों में क्या बदलता है?
ऑरेंज अथवा रेड हीट वेव अलर्ट के दौरान सभी कठिन शारीरिक और बाहरी गतिविधियाँ स्थगित रहेंगी। सामान्य दिनों में भी प्रार्थना सभा, खेलकूद और शारीरिक शिक्षा की गतिविधियाँ सुबह 10 बजे से पहले ही आयोजित की जाएंगी।
हीट स्ट्रोक के कौन-से लक्षण दिखने पर तत्काल कदम उठाने चाहिए?
अत्यधिक पसीना, तेज प्यास, सिरदर्द, चक्कर, कमजोरी, मांसपेशियों में ऐंठन, उल्टी, भ्रम या बेहोशी हीट स्ट्रोक के प्रमुख लक्षण हैं। ऐसे में बच्चे को तत्काल छायादार स्थान पर ले जाएँ, ठंडी पट्टी रखें और ज़रूरत पड़ने पर 108 एम्बुलेंस बुलाएँ।
अभिभावकों के लिए इस दिग्दर्शिका में क्या निर्देश हैं?
अभिभावकों से अपील की गई है कि बच्चों को स्कूल भेजने से पहले पर्याप्त पानी पिलाएँ और अस्वस्थ बच्चों को घर पर ही रखें। साथ ही घर पर भी हल्के सूती वस्त्र, जलयुक्त फलों का सेवन और कैफीनयुक्त पेयों से परहेज जैसी आदतें अपनाने की सलाह दी गई है।
राष्ट्र प्रेस
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