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पंजाब में हीट स्ट्रोक से बचाव को स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह ने किए पुख्ता इंतज़ाम, जिला अस्पतालों में बनी समर्पित यूनिटें

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पंजाब में हीट स्ट्रोक से बचाव को स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह ने किए पुख्ता इंतज़ाम, जिला अस्पतालों में बनी समर्पित यूनिटें

सारांश

पंजाब में भीषण गर्मी के बीच स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बड़ी तैयारी का खुलासा किया — जिला अस्पतालों में समर्पित हीट स्ट्रोक यूनिटें, आइस पैक से लैस एंबुलेंस और IHIP पोर्टल से रियल-टाइम निगरानी। बुजुर्गों, बच्चों और बाहर काम करने वाले मजदूरों को विशेष सावधानी बरतने की अपील।

मुख्य बातें

पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ.
बलबीर सिंह ने 23 मई 2026 को भीषण गर्मी से निपटने की तैयारियों की जानकारी दी।
सभी जिला अस्पतालों, उप-डिवीजन अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में समर्पित हीट स्ट्रोक प्रबंधन यूनिटें सक्रिय की गई हैं।
वार्डों में आइस पैक, ठंडे आईवी फ्लूइड, ओआरएस और आपातकालीन दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित।
गर्मी से जुड़ी बीमारियों की निगरानी के लिए आईएचआईपी पोर्टल से रियल-टाइम ट्रैकिंग जारी।
दोपहर 12 से 3 बजे बाहर न निकलने और हर 20-30 मिनट पर पानी पीने की सलाह।
शरीर का तापमान 40°C या उससे अधिक होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेने की अपील।

पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने 23 मई 2026 को चंडीगढ़ में बताया कि भीषण गर्मी के बीच राज्य का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क और तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हीट स्ट्रेस, हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक के बढ़ते खतरे को देखते हुए सभी जिला अस्पतालों में समर्पित प्रबंधन यूनिटें सक्रिय कर दी गई हैं।

जिला अस्पतालों में समर्पित हीट स्ट्रोक यूनिटें

मंत्री ने बताया कि सभी सिविल सर्जनों को निर्देश दिए गए हैं कि जिला अस्पतालों, उप-डिवीजन अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में हीट स्ट्रोक प्रबंधन वार्ड तत्काल प्रभाव से चालू किए जाएँ। ये वार्ड आइस पैक और ठंडे आईवी फ्लूइड जैसे सक्रिय कूलिंग उपायों से सुसज्जित हैं। प्रत्येक सुविधा में ओआरएस और आपातकालीन दवाइयों का पर्याप्त भंडार सुनिश्चित किया गया है।

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर भारत के कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार जा रहा है और गर्मी से जुड़ी बीमारियों के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। गौरतलब है कि पंजाब सरकार ने इस वर्ष पहले से ही हीट एक्शन प्लान तैयार किया था, जो पिछले वर्षों की प्रतिक्रियाशील नीति से अलग एक सक्रिय दृष्टिकोण को दर्शाता है।

एंबुलेंस और रियल-टाइम निगरानी

डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि मरीजों को अस्पताल पहुँचाने के दौरान भी राहत मिले, इसके लिए एंबुलेंसों में आवश्यक कूलिंग सुविधाएँ जोड़ी गई हैं। गर्मी से जुड़ी बीमारियों (HRI) के मामलों की रियल-टाइम निगरानी के लिए आईएचआईपी पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है। जिला टास्क फोर्स ने शिक्षा, श्रम और परिवहन विभागों के साथ समन्वय बैठकें भी की हैं, ताकि हीट एक्शन प्लान को जमीनी स्तर पर लागू किया जा सके।

नागरिकों के लिए स्वास्थ्य दिशानिर्देश

मंत्री ने आम नागरिकों — विशेषकर बुजुर्गों और बच्चों — से अपील की कि वे निम्नलिखित सावधानियाँ अपनाएँ:

हर 20-30 मिनट पर पानी पिएँ, चाहे प्यास न भी लगे। ओआरएस, लस्सी और नींबू पानी का सेवन करें। हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहनें और सिर ढकने के लिए छाता या टोपी का उपयोग करें। दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें। तरबूज, संतरा और खीरे जैसे पानी से भरपूर फल खाएँ।

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि चाय, कॉफी, शराब और कार्बोनेटेड पेय शरीर को डिहाइड्रेट करते हैं, इसलिए इनसे बचें। भारी, तला-भुना या मसालेदार भोजन पाचन को धीमा कर सकता है, अतः इससे परहेज़ करें।

मजदूरों की सुरक्षा पर विशेष जोर

डॉ. बलबीर सिंह ने नियोक्ताओं को निर्देश दिया कि बाहर काम करने वाले मजदूरों के लिए छायादार आराम स्थल और सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था अनिवार्य रूप से की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि दिन के सबसे गर्म घंटों में भारी श्रम से बचा जाए।

इन लक्षणों पर तुरंत लें चिकित्सा सहायता

मंत्री ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति के शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो जाए, मानसिक स्थिति में बदलाव आए, बेचैनी या दौरे पड़ें, त्वचा गर्म-लाल और सूखी हो जाए, तेज़ सिरदर्द, मतली या दिल की धड़कन असामान्य रूप से तेज़ हो जाए — तो तुरंत नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें। उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि बच्चों या पालतू जानवरों को कभी भी बंद वाहन में अकेला न छोड़ें। राज्य सरकार की तैयारियाँ जारी रहेंगी और आने वाले हफ्तों में स्थिति की समीक्षा की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में इन यूनिटों की वास्तविक कार्यक्षमता होगी, जहाँ बिजली कटौती और कर्मचारियों की कमी पुरानी समस्याएँ हैं। IHIP पोर्टल से रियल-टाइम निगरानी का दावा उत्साहजनक है, परंतु पिछले वर्षों में भी ऐसे डिजिटल स्वास्थ्य तंत्र ज़मीनी स्तर पर अधूरे रहे हैं। मजदूरों के लिए छायादार स्थल और पेयजल की अनिवार्यता का निर्देश तब तक अधूरा है जब तक इसके उल्लंघन पर कोई प्रवर्तन तंत्र न हो। भगवंत मान सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि यह घोषणा महज़ प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित न रहे।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब में हीट स्ट्रोक से बचाव के लिए सरकार ने क्या इंतज़ाम किए हैं?
पंजाब सरकार ने सभी जिला अस्पतालों, उप-डिवीजन अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में समर्पित हीट स्ट्रोक प्रबंधन यूनिटें सक्रिय की हैं। इन वार्डों में आइस पैक, ठंडे आईवी फ्लूइड और ओआरएस का पर्याप्त स्टॉक रखा गया है।
हीट स्ट्रोक के कौन से लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए?
यदि शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो, मानसिक स्थिति में बदलाव आए, बेचैनी या दौरे पड़ें, त्वचा गर्म-लाल और सूखी हो जाए, या दिल की धड़कन असामान्य रूप से तेज़ हो जाए — तो तुरंत नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें। ये हीट स्ट्रोक के गंभीर संकेत हैं।
भीषण गर्मी में खुद को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें और क्या न करें?
हर 20-30 मिनट पर पानी पिएँ, ओआरएस और नींबू पानी लें, दोपहर 12 से 3 बजे बाहर निकलने से बचें और हल्के सूती कपड़े पहनें। चाय, कॉफी, शराब और भारी-मसालेदार भोजन से परहेज़ करें क्योंकि ये शरीर को डिहाइड्रेट कर सकते हैं।
पंजाब सरकार गर्मी से जुड़ी बीमारियों की निगरानी कैसे कर रही है?
राज्य सरकार गर्मी से जुड़ी बीमारियों (HRI) के मामलों की रियल-टाइम ट्रैकिंग के लिए आईएचआईपी पोर्टल का उपयोग कर रही है। इसके अलावा जिला टास्क फोर्स ने शिक्षा, श्रम और परिवहन विभागों के साथ समन्वय बैठकें की हैं।
बाहर काम करने वाले मजदूरों के लिए नियोक्ताओं की क्या ज़िम्मेदारी है?
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने नियोक्ताओं को निर्देश दिया है कि वे बाहर काम करने वाले मजदूरों के लिए छायादार आराम स्थल और सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था अनिवार्य रूप से करें। दिन के सबसे गर्म घंटों में भारी श्रम से बचाना भी नियोक्ता की ज़िम्मेदारी बताई गई है।
राष्ट्र प्रेस
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