गर्मी में डिहाइड्रेशन से हीट स्ट्रोक का खतरा, एम्स दिल्ली के डॉ. नीरज निश्चल ने बताए बचाव के उपाय
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. नीरज निश्चल ने 21 मई को चेतावनी दी कि देशभर में बढ़ती गर्मी और लू के बीच डिहाइड्रेशन सबसे पहली और सबसे सामान्य स्वास्थ्य समस्या है, जो समय पर ध्यान न देने पर जानलेवा हीट स्ट्रोक में बदल सकती है। उनके अनुसार, बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएँ और पहले से बीमार लोग सबसे अधिक जोखिम में हैं।
डिहाइड्रेशन से हीट स्ट्रोक तक का सफर
डॉ. निश्चल के अनुसार, गर्मी बढ़ने पर शरीर में पानी और नमक की कमी — यानी डिहाइड्रेशन — सबसे पहले सामने आती है। यह अपेक्षाकृत हल्की स्थिति है, लेकिन यदि इसे नजरअंदाज किया जाए तो यह हीट स्ट्रोक में तब्दील हो सकती है। हीट स्ट्रोक में शरीर का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है, तेज बुखार, बेहोशी, भ्रम और कभी-कभी दौरे तक पड़ सकते हैं।
वर्तमान में अस्पतालों में आने वाले मरीजों में डिहाइड्रेशन, कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द, अत्यधिक पसीना, उल्टी और रक्तचाप गिरने की शिकायतें आम हो गई हैं।
धूप से बचाव के व्यावहारिक उपाय
डॉ. निश्चल ने सलाह दी कि दोपहर 11 बजे से शाम 4-5 बजे तक, जब तापमान सर्वाधिक रहता है, बाहर निकलने से पूरी तरह बचा जाए। यदि बाहर जाना अनिवार्य हो तो पूरी आस्तीन के ढीले कपड़े और फुल पैंट पहनें, तथा सिर को टोपी, गमछे या पगड़ी से ढककर रखें। छाता लेकर चलना या घर के भीतर रहना सर्वोत्तम विकल्प है।
हाइड्रेशन: सिर्फ पानी काफी नहीं
डॉ. निश्चल ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि घर से निकलने से पहले 1-2 लीटर पानी अवश्य पीएँ और दिनभर ओआरएस (ORS) या इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक्स का सेवन करते रहें। उनके अनुसार, केवल सादा पानी पर्याप्त नहीं है, क्योंकि पसीने के साथ शरीर से नमक भी बाहर निकलता है — इसलिए नमक-शर्करा का संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
उन्होंने सांस्कृतिक रूप से प्रचलित पेय पदार्थों — जैसे बेल का शरबत, शिकंजी और दाल का पानी — को भी प्रभावी विकल्प बताया। ये पेय न केवल हाइड्रेशन बनाए रखते हैं, बल्कि पेट को ठंडक भी देते हैं।
सबसे अधिक जोखिम किसे
डॉ. निश्चल ने स्पष्ट किया कि बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएँ तथा डायबिटीज, हृदय रोग या अन्य पुरानी बीमारियों से ग्रस्त व्यक्तियों को गर्मी से सबसे अधिक खतरा है। इन वर्गों में शरीर की तापमान नियंत्रण क्षमता कमजोर होती है, जिससे स्थिति तेजी से गंभीर हो सकती है।
क्या करें, क्या न करें
विशेषज्ञ की सलाह है कि गर्मी के मौसम में हल्का और पौष्टिक भोजन लें, अधिकतम समय छाया में बिताएँ और शरीर के किसी भी असामान्य संकेत — जैसे चक्कर, अत्यधिक पसीना या कमजोरी — पर तुरंत ध्यान दें। समय पर सावधानी बरतने से गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं से बचा जा सकता है।