हीट वेव एक्शन प्लान 2026: CM रेखा गुप्ता ने की विस्तृत समीक्षा, स्कूलों को 2 मई तक रिपोर्ट देने के निर्देश
सारांश
Key Takeaways
- CM रेखा गुप्ता ने 25 अप्रैल 2025 को हीट वेव एक्शन प्लान 2026 की विस्तृत समीक्षा बैठक की।
- दिल्ली के सभी स्कूलों में हर 45-60 मिनट पर वॉटर बेल बजाना अनिवार्य किया गया।
- सभी स्कूलों को 2 मई 2025 तक शिक्षा निदेशालय को अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी।
- प्रत्येक स्कूल में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा जो दिशानिर्देशों के पालन की निगरानी करेगा।
- अस्पताल, एम्बुलेंस, अटल कैंटीन, पुलिस थाने, डीटीसी बस स्टैंड पर स्वच्छ पेयजल और ORS की व्यवस्था अनिवार्य।
- बच्चों को खुले मैदान में रखने और स्पोर्ट्स एक्टिविटी कराने पर रोक लगाई गई।
नई दिल्ली, 25 अप्रैल 2025। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को 'हीट वेव एक्शन प्लान 2026' की तैयारियों की व्यापक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में सभी संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि गर्मी से बचाव के इंतजाम केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीनी स्तर पर दिखाई दें। दिल्ली में इस वर्ष भीषण गर्मी की आशंका को देखते हुए यह समीक्षा बेहद अहम मानी जा रही है।
अस्पताल और स्वास्थ्य सेवाएं: पूरी तैयारी का आदेश
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया कि सभी सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त बेड सुनिश्चित किए जाएं ताकि हीटस्ट्रोक के मरीजों को तत्काल उपचार मिल सके। उन्होंने कहा कि एम्बुलेंस सेवाओं में हीटवेव उपचार की पूरी सुविधा होनी चाहिए और ओआरएस (ORS) की व्यवस्था अस्पतालों से लेकर सार्वजनिक स्थलों तक सुनिश्चित की जाए।
इसके अलावा जन-जागरूकता अभियान तत्काल प्रभाव से शुरू करने के निर्देश दिए गए। आम नागरिकों को हीटवेव के लक्षणों और बचाव के उपायों के बारे में जागरूक करना इस अभियान का मुख्य उद्देश्य होगा।
स्कूलों के लिए विशेष दिशानिर्देश — वॉटर बेल प्रणाली अनिवार्य
सीएम ने शुक्रवार को एक वीडियो संदेश जारी कर घोषणा की थी कि दिल्ली के सभी स्कूलों को 2 मई 2025 तक शिक्षा निदेशालय को आईएमडी (IMD) द्वारा जारी हीट वेव एक्शन प्लान के तहत अपनी अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
हर स्कूल में प्रत्येक 45 से 60 मिनट के अंतराल पर वॉटर बेल बजाना अनिवार्य किया गया है, जिससे बच्चों को नियमित रूप से पानी पीने की याद दिलाई जा सके। इसके साथ ही स्कूलों में साफ और ठंडे पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रत्येक स्कूल के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा जो यह सुनिश्चित करेगा कि सभी दिशानिर्देशों का पालन सही तरीके से हो। स्कूलों को यह भी निर्देश दिया गया है कि बच्चों को खुले मैदान में न रखा जाए और इस दौरान कोई भी स्पोर्ट्स एक्टिविटी आयोजित न की जाए।
सार्वजनिक स्थलों पर पेयजल और राहत की व्यवस्था
अटल कैंटीन, पुलिस थाने, पोस्ट ऑफिस, डीटीसी बस स्टैंड, कंस्ट्रक्शन साइट और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए। टैंकर, वॉटर कूलर और वॉटर एटीएम बिना किसी बाधा के संचालित रहें, इसके लिए संबंधित विभागों को जिम्मेदार ठहराया गया है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पशु-पक्षियों के लिए भी पर्याप्त छाया और पानी की व्यवस्था होनी चाहिए, जो इस योजना का एक संवेदनशील और सराहनीय पहलू है।
अभिभावकों से अपील और जवाबदेही तंत्र
सीएम रेखा गुप्ता ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे स्वयं यह जांचें कि उनके बच्चों के स्कूलों में सरकारी दिशानिर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं। यह कदम सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
गौरतलब है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस वर्ष अप्रैल-जून के दौरान उत्तर भारत में सामान्य से अधिक तापमान और लंबे हीटवेव पीरियड की चेतावनी जारी की है। ऐसे में दिल्ली सरकार की यह सक्रियता समय पर और जरूरी मानी जा रही है।
गहरा संदर्भ: दिल्ली में हीटवेव और पिछले वर्षों का रिकॉर्ड
पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली में हीटवेव से होने वाली मौतों और अस्पताल में भर्ती मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। 2024 में दिल्ली का तापमान कई बार 47-48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था, जिसने स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव डाला। इस पृष्ठभूमि में हीट वेव एक्शन प्लान 2026 की तैयारी पहले से करना नीतिगत परिपक्वता का संकेत है।
तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने भी हीटवेव प्रबंधन योजनाएं लागू की हैं, लेकिन स्कूलों में वॉटर बेल प्रणाली और नोडल अधिकारी की नियुक्ति जैसे विशिष्ट कदम दिल्ली की इस योजना को अलग बनाते हैं।
आने वाले दिनों में 2 मई 2025 की अनुपालन रिपोर्ट की समीक्षा यह तय करेगी कि यह योजना केवल घोषणाओं तक सीमित रहती है या वास्तव में जमीन पर उतरती है। दिल्ली सरकार की इस पहल पर पूरे देश की नजर है।