11 जुलाई 2026
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हेमा मालिनी के 60 साल: अनूप जलोटा बोले — शास्त्रीय नृत्य और धर्मेंद्र ने जीवन को बनाया अनमोल

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हेमा मालिनी के 60 साल: अनूप जलोटा बोले — शास्त्रीय नृत्य और धर्मेंद्र ने जीवन को बनाया अनमोल

सारांश

बॉलीवुड की 'ड्रीम गर्ल' हेमा मालिनी के 60 साल के सिनेमाई सफर का जश्न मुंबई में मना। अनूप जलोटा ने कहा — शास्त्रीय नृत्य की अंतरराष्ट्रीय पहचान और धर्मेंद्र के साथ जीवन ने उन्हें बॉलीवुड की सबसे अनूठी शख्सियत बनाया।

मुख्य बातें

हेमा मालिनी के हिंदी सिनेमा में 60 वर्षों के सफर का जश्न 10 जुलाई को मुंबई में मनाया गया।
भजन गायक अनूप जलोटा ने हेमा मालिनी को उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में बताया जिन्होंने शास्त्रीय नृत्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाया।
जलोटा ने कहा कि धर्मेंद्र के जीवन में आने से हेमा मालिनी की कहानी और भी दिलचस्प बन जाती है।
हेमा मालिनी ने 1968 में 'सपनों का सौदागर' से करियर शुरू किया और 'शोले' , 'ड्रीम गर्ल' , 'बागबान' समेत दर्जनों हिट फिल्में दीं।
उन्होंने भरतनाट्यम नृत्य नाटिकाओं 'मीरा' और 'गंगा' का निर्देशन व मंचन भी किया है।

बॉलीवुड की 'ड्रीम गर्ल' हेमा मालिनी के हिंदी सिनेमा में 60 वर्षों के सफर का जश्न 10 जुलाई को मुंबई में मनाया गया, जिसमें मशहूर भजन गायक अनूप जलोटा ने उनकी बहुआयामी प्रतिभा को अद्वितीय बताया। जलोटा ने कहा कि हेमा मालिनी का जीवन और करियर इतना विस्तृत और विविधताओं से भरा है कि इसे महज तीन-चार घंटे के कार्यक्रम में पूरी तरह समेट पाना संभव नहीं।

शास्त्रीय नृत्य में अंतरराष्ट्रीय पहचान

कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में अनूप जलोटा ने कहा, 'उनके जीवन में बहुत सारे गीत और फिल्में हैं। उनका काम बिल्कुल अलग रहा है। इसके साथ ही उनका शास्त्रीय नृत्य भी अद्भुत है। बहुत कम अभिनेत्रियाँ ऐसी हैं, जिन्होंने शास्त्रीय नृत्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाया है। नृत्य के क्षेत्र में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है।' जलोटा के अनुसार, भरतनाट्यम में हेमा मालिनी की निपुणता उन्हें बॉलीवुड की अधिकांश समकालीन अभिनेत्रियों से अलग करती है।

धर्मेंद्र की भूमिका और जीवन की दिलचस्प कहानी

जलोटा ने दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र के हेमा मालिनी के जीवन में महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 'इसके साथ ही धरमजी भी उनके जीवन का हिस्सा बने। इन सबको मिलाकर हेमा की जिंदगी बेहद दिलचस्प बन जाती है।' गौरतलब है कि दोनों की मुलाकात 1960 के दशक के अंत में फिल्मों की शूटिंग के दौरान हुई थी और आगे चलकर उनकी प्रेम कहानी बॉलीवुड की सबसे चर्चित दास्तानों में शामिल हो गई। दोनों ने 'शोले', 'ड्रीम गर्ल', 'चरस', 'राजा जानी', 'जुगनू', 'आजाद' और 'द बर्निंग ट्रेन' जैसी कई फिल्मों में साथ काम किया।

60 साल का स्वर्णिम सिनेमाई सफर

हेमा मालिनी ने वर्ष 1968 में फिल्म 'सपनों का सौदागर' से हिंदी सिनेमा में प्रवेश किया था। इसके बाद 'सीता और गीता', 'शोले', 'ड्रीम गर्ल', 'सत्ते पे सत्ता', 'द बर्निंग ट्रेन', 'क्रांति', 'त्रिशूल' और 'बागबान' जैसी दर्जनों यादगार फिल्मों में अपनी अभिनय प्रतिभा का लोहा मनवाया। यह ऐसे समय में आया है जब हिंदी सिनेमा में छह दशकों तक सक्रिय रहने वाली अभिनेत्रियाँ विरले ही होती हैं।

नृत्य नाटिकाओं से भारतीय संस्कृति की सेवा

अभिनय से परे, हेमा मालिनी ने भरतनाट्यम नृत्यांगना के रूप में देश-विदेश में ख्याति अर्जित की है। उन्होंने भारतीय पौराणिक और आध्यात्मिक विषयों पर आधारित कई नृत्य नाटिकाओं का निर्देशन और मंचन किया, जिनमें 'मीरा' और 'गंगा' विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

जश्न में बोले अनूप जलोटा — गीतों से सजाएँगे यात्रा

अनूप जलोटा ने बताया कि वह इस समारोह में हेमा मालिनी के जीवन और करियर के अलग-अलग पड़ावों को दर्शाने वाले कुछ विशेष गीतों की प्रस्तुति देंगे। उन्होंने कहा कि इन गीतों के माध्यम से दर्शकों को उनकी लंबी और प्रेरणादायक यात्रा की झलक दिखाने की कोशिश की जाएगी। 10 जुलाई को मुंबई में आयोजित इस जश्न में मनोरंजन जगत की अनेक हस्तियाँ शामिल हुईं और उन्होंने हेमा मालिनी के सिनेमा, नृत्य और भारतीय संस्कृति में योगदान को याद किया।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस दुर्लभ संयोजन का उत्सव है जहाँ व्यावसायिक सिनेमा और शास्त्रीय कला एक साथ फली-फूलीं। यह ऐसे दौर में उल्लेखनीय है जब बॉलीवुड में शास्त्रीय नृत्य की जड़ें कमज़ोर पड़ती जा रही हैं। अनूप जलोटा की टिप्पणी इस बात को रेखांकित करती है कि हेमा मालिनी की विरासत सिर्फ बॉक्स ऑफिस तक सीमित नहीं — भरतनाट्यम के ज़रिए उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति में भी अपना योगदान दिया। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर उनकी फिल्मों पर केंद्रित रहती है, जबकि उनकी नृत्य नाटिकाओं का सांस्कृतिक प्रभाव उतना ही महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हेमा मालिनी के 60 साल के फिल्मी सफर का जश्न कब और कहाँ मनाया गया?
यह जश्न 10 जुलाई को मुंबई में मनाया गया, जिसमें मनोरंजन जगत की कई हस्तियाँ शामिल हुईं। इस अवसर पर हेमा मालिनी के सिनेमा, नृत्य और भारतीय संस्कृति में योगदान को याद किया गया।
अनूप जलोटा ने हेमा मालिनी के बारे में क्या कहा?
अनूप जलोटा ने कहा कि हेमा मालिनी उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में हैं जिन्होंने शास्त्रीय नृत्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाया। उन्होंने यह भी कहा कि धर्मेंद्र के जीवन में आने से हेमा की जिंदगी और भी दिलचस्प बन जाती है।
हेमा मालिनी ने बॉलीवुड में कब कदम रखा और उनकी प्रमुख फिल्में कौन-सी हैं?
हेमा मालिनी ने 1968 में फिल्म 'सपनों का सौदागर' से हिंदी सिनेमा में प्रवेश किया। उनकी प्रमुख फिल्मों में 'शोले', 'ड्रीम गर्ल', 'सीता और गीता', 'सत्ते पे सत्ता', 'त्रिशूल', 'क्रांति' और 'बागबान' शामिल हैं।
हेमा मालिनी का शास्त्रीय नृत्य में क्या योगदान है?
हेमा मालिनी एक प्रशिक्षित भरतनाट्यम नृत्यांगना हैं जिन्होंने देश-विदेश में अनेक प्रस्तुतियाँ दी हैं। उन्होंने 'मीरा' और 'गंगा' जैसी भारतीय पौराणिक व आध्यात्मिक विषयों पर आधारित नृत्य नाटिकाओं का निर्देशन और मंचन भी किया है।
धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की जोड़ी की शुरुआत कैसे हुई?
धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की मुलाकात 1960 के दशक के अंत में फिल्मों की शूटिंग के दौरान हुई थी। इसके बाद दोनों ने 'शोले', 'ड्रीम गर्ल', 'चरस', 'राजा जानी', 'जुगनू', 'आजाद' और 'द बर्निंग ट्रेन' जैसी कई फिल्मों में साथ काम किया।
राष्ट्र प्रेस
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