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रमेश सिप्पी का खुलासा: 'शोले' और 'सीता और गीता' में हेमा मालिनी क्यों पड़ीं हीरो पर भारी

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रमेश सिप्पी का खुलासा: 'शोले' और 'सीता और गीता' में हेमा मालिनी क्यों पड़ीं हीरो पर भारी

सारांश

रमेश सिप्पी ने हेमा मालिनी के 60 साल के करियर पर बोलते हुए कहा कि 'शोले' और 'सीता और गीता' में उनकी स्क्रीन उपस्थिति और ऊर्जा ने उन्हें पुरुष किरदारों से भी बड़ा बना दिया। साथ ही हेमा ने 'शोले' की शूटिंग के दौरान गर्म रेत पर नंगे पैर चलने के कठिन अनुभव को भी याद किया।

मुख्य बातें

फिल्मकार रमेश सिप्पी ने हेमा मालिनी के 60 साल के फिल्मी करियर पर आयोजित कार्यक्रम में उनकी अभिनय प्रतिभा की सराहना की।
सिप्पी के अनुसार, 'शोले' और 'सीता और गीता' में हेमा की स्क्रीन ऊर्जा ने उन्हें पुरुष किरदारों पर भी भारी बना दिया।
हेमा मालिनी ने 'शोले' की शूटिंग के दौरान चिलचिलाती धूप में नंगे पैर गर्म रेत पर काम करने का कठिन अनुभव साझा किया था।
निर्देशक रमेश सिप्पी ने शूटिंग में पैरों की सुरक्षा के लिए पहना गया सामान हटवाया, क्योंकि वह स्क्रीन पर दिख सकता था ।
'शोले' ने पिछले साल अपने 50 साल पूरे किए और यह भारतीय सिनेमा की सबसे ऐतिहासिक फिल्मों में शामिल है।

फिल्मकार रमेश सिप्पी ने हाल ही में एक विशेष बातचीत में खुलासा किया कि बॉलीवुड की 'ड्रीम गर्ल' हेमा मालिनी अपनी फिल्मों में पुरुष किरदारों पर भी क्यों भारी पड़ जाती थीं। यह बातचीत हेमा मालिनी के फिल्मी करियर के 60 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान हुई, जिसमें फिल्म उद्योग की कई著名 हस्तियाँ शामिल रहीं।

स्क्रीन पर अनूठी उपस्थिति

रमेश सिप्पी ने कहा, 'हेमा मालिनी की असली ताकत उनका स्क्रीन पर मौजूद होना था।' उनके अनुसार, 'सीता और गीता' और 'शोले' जैसी फिल्मों में हेमा के किरदार इतने दमदार थे कि दर्शक उन्हें लंबे समय तक भूल नहीं पाए। सिप्पी ने कहा कि जब वह अभिनय करती थीं, तो अपने किरदार में एक अलग तरह की ऊर्जा लेकर आती थीं — यही वजह है कि उनकी हर भूमिका खास बन जाती थी।

पुरुष किरदारों पर भी भारी

सिप्पी ने आगे कहा, 'हेमा मालिनी की काबिलियत उनकी मेहनत का नतीजा थी।' वह इतनी सशक्त कलाकार थीं कि कई बार कहानी में मौजूद बड़े पुरुष किरदारों पर भी भारी पड़ जाती थीं। उन्होंने जोड़ा कि एक कलाकार के भीतर जो चमक होती है, वही स्क्रीन पर दिखाई देती है — और हेमा में वह चमक पूरी तरह मौजूद थी।

शूटिंग की कठिन यादें

गौरतलब है कि 'शोले' के 50 साल पूरे होने पर दिए गए एक पुराने इंटरव्यू में हेमा मालिनी ने शूटिंग के कठिन अनुभव भी साझा किए थे। उन्होंने बताया था कि चिलचिलाती धूप में गर्म रेत और पत्थरों पर नंगे पैर शूटिंग करना बेहद मुश्किल था और उनकी माँ को उनकी बहुत चिंता रहती थी।

हेमा ने बताया था कि उनकी माँ चाहती थीं कि वह पैरों में कुछ सुरक्षात्मक पहनें, लेकिन जब निर्देशक रमेश सिप्पी ने देखा कि वह स्क्रीन पर दिख सकता है, तो उन्होंने उसे हटवा दिया। इसके बाद हेमा को बिना किसी सुरक्षा के शूटिंग करनी पड़ी, जो उनके अनुसार काफी कठिन अनुभव था।

भारतीय सिनेमा में 'शोले' की विरासत

आज 'शोले' को भारतीय सिनेमा की सबसे महान और ऐतिहासिक फिल्मों में गिना जाता है। पिछले साल इस फिल्म ने अपने 50 साल पूरे किए — एक ऐसी उपलब्धि जो हिंदी सिनेमा में बहुत कम फिल्मों को नसीब होती है। हेमा मालिनी के 60 साल के करियर और इस फिल्म की स्थायी विरासत, दोनों इस बात की गवाह हैं कि उनका योगदान भारतीय पर्दे पर अमिट है।

संपादकीय दृष्टिकोण

नियम नहीं — और हेमा मालिनी ने उस अपवाद को बार-बार साबित किया। यह भी ध्यान देने योग्य है कि 'ड्रीम गर्ल' की छवि अक्सर उनकी अभिनय गहराई को ढक लेती है, जबकि 'सीता और गीता' जैसी फिल्म में उन्होंने दोहरी भूमिका में जो जटिलता दिखाई, वह उस युग की किसी भी अभिनेत्री के लिए असाधारण थी। 60 साल के करियर पर आयोजित यह उत्सव एक सही अवसर है कि हिंदी सिनेमा अपनी उन अभिनेत्रियों को पुनः रेखांकित करे जिन्होंने 'स्टार सिस्टम' की सीमाओं के बावजूद कथा को अपने नाम किया।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रमेश सिप्पी ने हेमा मालिनी के बारे में क्या कहा?
रमेश सिप्पी ने कहा कि हेमा मालिनी की असली ताकत उनकी स्क्रीन उपस्थिति और अभिनय ऊर्जा थी, जिसने उन्हें 'शोले' और 'सीता और गीता' जैसी फिल्मों में पुरुष किरदारों पर भी भारी बना दिया। उन्होंने यह भी कहा कि हेमा में वह स्वाभाविक चमक थी जो एक कलाकार को यादगार बनाती है।
'शोले' की शूटिंग के दौरान हेमा मालिनी को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा?
हेमा मालिनी ने बताया था कि 'शोले' की शूटिंग के दौरान चिलचिलाती धूप में गर्म रेत और पत्थरों पर नंगे पैर काम करना बेहद कठिन था। उनकी माँ ने पैरों की सुरक्षा के लिए कुछ पहनाने की कोशिश की, लेकिन निर्देशक रमेश सिप्पी ने उसे स्क्रीन पर दिखने की आशंका से हटवा दिया।
हेमा मालिनी के फिल्मी करियर को कितने साल हो गए हैं?
हेमा मालिनी के फिल्मी करियर के 60 साल पूरे हो गए हैं, जिसके उपलक्ष्य में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें फिल्म उद्योग की कई हस्तियाँ शामिल हुईं।
'शोले' फिल्म ने अपने कितने साल पूरे किए और इसका क्या महत्व है?
'शोले' ने पिछले साल अपने 50 साल पूरे किए। यह फिल्म भारतीय सिनेमा की सबसे महान और ऐतिहासिक फिल्मों में गिनी जाती है, और इतने दशकों बाद भी दर्शकों के दिलों में इसकी जगह बरकरार है।
हेमा मालिनी को 'ड्रीम गर्ल' क्यों कहा जाता है?
हेमा मालिनी को उनकी अद्वितीय सुंदरता, स्क्रीन उपस्थिति और अभिनय प्रतिभा के कारण 'ड्रीम गर्ल' कहा जाता है। रमेश सिप्पी के अनुसार, उनके किरदारों में एक अलग ऊर्जा होती थी जो दर्शकों को लंबे समय तक याद रहती थी।
राष्ट्र प्रेस
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