क्या हेमा मालिनी ने 'जब तक है जान' गाने के लिए कोई तैयारी नहीं की?

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क्या हेमा मालिनी ने 'जब तक है जान' गाने के लिए कोई तैयारी नहीं की?

सारांश

फिल्म 'शोले' की 50वीं वर्षगांठ पर हेमा मालिनी ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि 'जब तक है जान' गाने के लिए उन्होंने कोई तैयारी नहीं की थी। उन्होंने निर्देशक रमेश सिप्पी के साथ काम करने के अपने अनुभव को साझा किया, जो इस फिल्म को खास बनाते हैं।

मुख्य बातें

हेमा मालिनी ने 'जब तक है जान' गाने में रिहर्सल नहीं की थी।
गाने में अभिनय की आवश्यकता थी, न कि सिर्फ नृत्य की।
निर्देशक रमेश सिप्पी ने उन्हें इस फिल्म के लिए तैयार किया।
'शोले' फिल्म का 50 साल का सफर।
फिल्म ने भारतीय सिनेमा पर गहरा प्रभाव डाला है।

मुंबई, 14 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। फिल्म ‘शोले’ के 50 साल पूरे होने का जश्न मनाया जा रहा है। इस अवसर पर अभिनेत्री हेमा मालिनी ने बताया कि उन्होंने गाने ‘जब तक है जान’ के लिए कोई खास तैयारी नहीं की थी।

अभिनेत्री ने फिल्म के इस खास मौके पर राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि इस गाने में नृत्य से ज्यादा अभिनय की आवश्यकता थी।

उन्होंने कहा, “मैंने इस गाने के लिए किसी भी प्रकार की रिहर्सल नहीं की थी; यह गाना अभिनय और नृत्य का एक संयोजन था। हमें जो कुछ भी करना था, वह कैमरे के सामने ही करना था। सब कुछ निर्देशक के योजना और दृश्य की आवश्यकता के अनुसार होता था। ऐसा करना बहुत कठिन नहीं था, लेकिन इसे शूट करने में कम से कम 15 दिन लगे थे।”

अभिनेत्री ने यह भी साझा किया कि उन्हें फिल्म ‘शोले’ का प्रस्ताव कैसे मिला था। उन्होंने बताया, “पहले जब हम फिल्म साइन करते थे, तो निर्देशक आकर कहानी सुनाते थे। अगर कहानी पसंद आती थी, तो फिल्म करते थे। जब मुझे ‘शोले’ का प्रस्ताव आया, तो उस समय मैं निर्देशक रमेश सिप्पी की फिल्म ‘सीता और गीता’ की शूटिंग कर रही थी। उन्होंने मुझसे कहा कि इस फिल्म में कई किरदार हैं और मैं भी उनमें से एक हूँ। यह सुनकर मुझे बुरा लगा, क्योंकि मैंने सोचा, मेरे लिए इतना छोटा सा रोल क्यों?”

अभिनेत्री ने आगे कहा कि निर्देशक ने उनसे यह रोल करने के लिए प्रार्थना की थी और कहा था कि भले ही उनका रोल छोटा है, लेकिन प्रभावशाली रहेगा।

अभिनेत्री ने आगे बताया, “मुझे निर्देशन पर पूरा विश्वास था, इसलिए मैंने यह रोल करने के लिए स्वीकार कर लिया। शूटिंग के पहले दिन उन्होंने मुझे कहा कि यह किरदार मेरे पिछले किरदारों से थोड़ा अलग है। मैंने पूछा, 'क्या यह सीता और गीता की तरह ही है?' तो उन्होंने कहा, 'नहीं, यह अलग है, लेकिन कुछ मिलता-जुलता है।' फिर उन्होंने बताया कि मुझे लंबे-लंबे डायलॉग बोलने होंगे। मेरे किरदार की खूबसूरती यही थी कि वह दर्शकों को खूब हंसाकर रखेगा।”

‘शोले’ शुक्रवार को रिलीज के 50 साल पूरे करने जा रहा है। यह फिल्म भारतीय सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित फिल्मों में से एक मानी जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भारतीय सिनेमा के एक महत्वपूर्ण क्षण की भी याद दिलाता है। 'शोले' जैसे फिल्में सिनेमा के इतिहास में अमिट छाप छोड़ती हैं।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हेमा मालिनी ने 'जब तक है जान' गाने के लिए तैयारी क्यों नहीं की?
हेमा मालिनी ने बताया कि इस गाने में नृत्य से ज्यादा अभिनय की आवश्यकता थी और उन्होंने इसके लिए कोई खास रिहर्सल नहीं की।
'शोले' फिल्म का महत्व क्या है?
'शोले' भारतीय सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित फिल्मों में से एक है, जिसने कई ऐतिहासिक मोड़ दिए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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