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स्कूल चलो अभियान 2026: सहारनपुर से सीएम योगी ने किया द्वितीय चरण का शुभारंभ, 15 दिनों में हर बच्चे के नामांकन का लक्ष्य

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स्कूल चलो अभियान 2026: सहारनपुर से सीएम योगी ने किया द्वितीय चरण का शुभारंभ, 15 दिनों में हर बच्चे के नामांकन का लक्ष्य

सारांश

सहारनपुर से सीएम योगी ने 'स्कूल चलो अभियान-2026' का दूसरा चरण लॉन्च किया — अगले 15 दिनों में हर बच्चे का नामांकन लक्ष्य, शिक्षामित्रों का मानदेय ₹18,000 और 23 हज़ार दिव्यांग बालिकाओं को छात्रवृत्ति। 2017 से शुरू यह अभियान अब जनआंदोलन का रूप लेने की ओर बढ़ रहा है।

मुख्य बातें

सीएम योगी आदित्यनाथ ने 1 जुलाई 2026 को सहारनपुर से 'स्कूल चलो अभियान-2026' के द्वितीय चरण का शुभारंभ किया।
अगले 15 दिनों में प्रदेश के प्रत्येक बच्चे का विद्यालय में नामांकन सुनिश्चित करने का लक्ष्य।
2017 में बेसिक शिक्षा परिषद के केवल 36% विद्यालय ही बुनियादी सुविधाओं से लैस थे; ऑपरेशन कायाकल्प के तहत व्यापक सुधार किए गए।
शिक्षामित्रों का मानदेय ₹10,000 से बढ़ाकर ₹18,000 और अनुदेशकों का ₹9,000 से बढ़ाकर ₹17,000 किया गया।
1 लाख से अधिक दिव्यांग बच्चों को सहायक उपकरण; 2025-26 में 23 हज़ार दिव्यांग बालिकाओं को छात्रवृत्ति।
शिक्षा कर्मियों के लिए ₹5 लाख तक की स्वास्थ्य बीमा सुविधा लागू।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1 जुलाई 2026 को सहारनपुर से राज्यव्यापी 'स्कूल चलो अभियान-2026' के द्वितीय चरण का शुभारंभ किया और शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की सबसे मज़बूत आधारशिला करार दिया। उन्होंने अगले 15 दिनों के भीतर प्रदेश के प्रत्येक बच्चे का विद्यालय में नामांकन सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

अभियान की पृष्ठभूमि और उद्देश्य

मुख्यमंत्री ने बताया कि यह अभियान वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में आरंभ किया गया था, जिसका मूल उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की प्रगति का आधार शिक्षा है — गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बच्चों को संस्कारित और आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ देश के विकास में प्रभावी भूमिका निभाने के लिए भी तैयार करती है।

योगी ने कहा कि इस अभियान की सफलता के पीछे सरकार की स्पष्ट नीति, पारदर्शी नीयत और शिक्षा सुधार के प्रति दृढ़ संकल्प है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षा से वंचित रहने वाला बच्चा केवल अपने परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र की क्षति है।

ऑपरेशन कायाकल्प: बुनियादी ढाँचे में बदलाव

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2017 में बेसिक शिक्षा परिषद के केवल 36 प्रतिशत विद्यालय ही बुनियादी सुविधाओं से पूरी तरह लैस थे। अधिकांश सरकारी स्कूलों में शौचालय, स्वच्छ पेयजल, फर्नीचर, पुस्तकालय, रसोईघर और चारदीवारी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव था।

इन कमियों को दूर करने के लिए प्रदेश सरकार ने 'ऑपरेशन कायाकल्प' शुरू किया, जिसके तहत जनप्रतिनिधियों, प्रशासन और समाज के सहयोग से सरकारी विद्यालयों का व्यापक कायाकल्प किया गया। अब विद्यालयों में बालक और बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय, स्वच्छ पेयजल, फर्नीचर, पुस्तकालय और मिड-डे मील की समुचित व्यवस्था विकसित की जा रही है।

दिव्यांग बच्चों और शिक्षकों के लिए विशेष प्रावधान

मुख्यमंत्री ने बताया कि 1 लाख से अधिक दिव्यांग बच्चों को सहायक उपकरण देकर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया है। 2025-26 में करीब 23 हज़ार दिव्यांग बालिकाओं को छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा शिक्षकों को टैबलेट दिए जा रहे हैं और सरकारी विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब तथा डिजिटल लाइब्रेरी का तेज़ी से विस्तार किया जा रहा है।

शिक्षकों के मानदेय में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है — शिक्षामित्रों का मानदेय ₹10,000 से बढ़ाकर ₹18,000 और अनुदेशकों का मानदेय ₹9,000 से बढ़ाकर ₹17,000 प्रति माह किया गया है। शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों और अन्य कर्मचारियों के लिए ₹5 लाख तक की स्वास्थ्य बीमा सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।

जनआंदोलन बनाने का आह्वान

सीएम योगी ने सांसदों, विधायकों, ग्राम प्रधानों, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों से 'स्कूल चलो अभियान' को जनभागीदारी का अभियान बनाने का आह्वान किया। उन्होंने शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए कि प्रवेश लेने वाले प्रत्येक छात्र को समय पर यूनिफॉर्म, बैग, पाठ्यपुस्तक, जूते-मोज़े और अन्य सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ।

उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजें। नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप 'लर्निंग बाय डूइंग' और कौशल आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि बच्चे व्यावहारिक ज्ञान के साथ आत्मविश्वास भी विकसित कर सकें। यह अभियान आने वाले हफ्तों में उत्तर प्रदेश के हर ज़िले में जनसहभागिता की नई मिसाल स्थापित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी ज़मीनी क्रियान्वयन है — विशेषकर उन ज़िलों में जहाँ ड्रॉपआउट दर अभी भी राष्ट्रीय औसत से ऊपर है। शिक्षामित्रों के मानदेय में वृद्धि स्वागतयोग्य है, परंतु नियमितीकरण की दीर्घकालिक माँग अभी भी अनुत्तरित है। 15 दिनों में 'हर बच्चे का नामांकन' एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य है — इसकी सफलता तभी मापी जा सकेगी जब नामांकन के साथ-साथ उपस्थिति और सीखने के परिणाम भी सार्वजनिक किए जाएँ।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्कूल चलो अभियान-2026 का द्वितीय चरण क्या है?
यह उत्तर प्रदेश सरकार का राज्यव्यापी शिक्षा नामांकन अभियान है, जिसे सीएम योगी आदित्यनाथ ने 1 जुलाई 2026 को सहारनपुर से शुरू किया। इसका लक्ष्य अगले 15 दिनों में प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को सरकारी विद्यालय में नामांकित करना है।
स्कूल चलो अभियान की शुरुआत कब और किसने की थी?
यह अभियान वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य प्रदेश के हर बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना था।
ऑपरेशन कायाकल्प क्या है और इससे क्या बदला?
ऑपरेशन कायाकल्प उत्तर प्रदेश सरकार की पहल है, जिसके तहत सरकारी विद्यालयों में शौचालय, स्वच्छ पेयजल, फर्नीचर, पुस्तकालय और रसोईघर जैसी बुनियादी सुविधाएँ विकसित की गईं। 2017 में केवल 36% विद्यालय इन सुविधाओं से लैस थे, जिसे इस अभियान के ज़रिए सुधारा गया।
शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में कितनी वृद्धि हुई है?
शिक्षामित्रों का मानदेय ₹10,000 से बढ़ाकर ₹18,000 प्रति माह और अनुदेशकों का मानदेय ₹9,000 से बढ़ाकर ₹17,000 प्रति माह किया गया है। इसके अलावा शिक्षा कर्मियों के लिए ₹5 लाख तक की स्वास्थ्य बीमा सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
दिव्यांग बच्चों के लिए इस अभियान में क्या प्रावधान हैं?
1 लाख से अधिक दिव्यांग बच्चों को सहायक उपकरण देकर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया है। वर्ष 2025-26 में करीब 23 हज़ार दिव्यांग बालिकाओं को छात्रवृत्ति भी प्रदान की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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