स्कूल चलो अभियान चरण-2: यूपी सरकार ने जारी किए ₹163.60 लाख, 1 जुलाई से शुरू होगा अभियान
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार ने स्कूल चलो अभियान के दूसरे चरण के लिए ₹163.60 लाख की वित्तीय सीमा जारी कर दी है, जिसका उद्देश्य शैक्षिक सत्र 2026-27 में प्रदेश के हर बच्चे का विद्यालय में नामांकन सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चलाया जा रहा यह राज्यव्यापी अभियान 1 जुलाई से 15 जुलाई तक प्रदेश के सभी विकास खंडों में संचालित होगा।
अभियान का उद्देश्य और दायरा
महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, इस अभियान का मुख्य लक्ष्य विद्यालय से बाहर रह गए बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना, ड्रॉपआउट बच्चों का पुनः नामांकन कराना और नामांकन प्रक्रिया को व्यापक जनभागीदारी का रूप देना है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार निपुण भारत मिशन, विद्यालय कायाकल्प और अधिगम गुणवत्ता सुधार जैसे शिक्षा सुधार कार्यक्रम पहले से चला रही है।
प्रशासनिक तंत्र और जन-भागीदारी
सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों, जिला समन्वयकों (समेकित शिक्षा) और खंड शिक्षा अधिकारियों को अभियान के प्रभावी संचालन के निर्देश दिए गए हैं। अभियान में ग्राम पंचायतों, नगर निकायों, विद्यालय प्रबंधन समितियों, स्वयं सहायता समूहों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवी संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
मुख्य गतिविधियाँ
अभियान के तहत प्रभात फेरियाँ, नामांकन रैलियाँ, घर-घर संपर्क, अभिभावक बैठकें, ग्राम सभाएँ, विद्यालय प्रवेशोत्सव, विशेष नामांकन शिविर और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। ग्राम एवं वार्ड स्तर पर सर्वेक्षण और स्थानीय अभिलेखों के माध्यम से विद्यालय से बाहर बच्चों की पहचान की जाएगी। विशेष रूप से कक्षा छोड़ चुके बच्चों को दोबारा विद्यालय से जोड़ने के लिए समन्वित प्रयास किए जाएंगे।
वित्तीय उपयोग के निर्देश
जारी ₹163.60 लाख की धनराशि का उपयोग रैलियों, प्रचार-प्रसार सामग्री, बैनर, पोस्टर, फ्लेक्स, सामुदायिक बैठकों और प्रवेशोत्सव जैसी गतिविधियों के लिए जनपदों को उपलब्ध कराई जाएगी। शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि धनराशि का उपयोग निर्धारित मानकों के अनुरूप पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ किया जाए।
व्यापक शिक्षा सुधारों से जुड़ाव
गौरतलब है कि यह अभियान निपुण भारत मिशन, बालवाटिका, शिक्षक क्षमता संवर्धन और विद्यालय कायाकल्प जैसी योजनाओं के बाद आया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकार शिक्षा के सार्वभौमिक लक्ष्य को चरणबद्ध तरीके से साकार करने की कोशिश कर रही है। अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जमीनी स्तर पर ग्राम पंचायतें और स्थानीय निकाय इसे कितनी प्रभावी तरह से लागू करते हैं।