30 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

स्कूल चलो अभियान चरण-2: यूपी सरकार ने जारी किए ₹163.60 लाख, 1 जुलाई से शुरू होगा अभियान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
स्कूल चलो अभियान चरण-2: यूपी सरकार ने जारी किए ₹163.60 लाख, 1 जुलाई से शुरू होगा अभियान

सारांश

उत्तर प्रदेश सरकार ने स्कूल चलो अभियान के दूसरे चरण के लिए ₹163.60 लाख जारी किए हैं। 1 से 15 जुलाई तक चलने वाले इस अभियान में घर-घर संपर्क, प्रभात फेरियाँ और विशेष नामांकन शिविरों के ज़रिए सत्र 2026-27 में शत-प्रतिशत नामांकन का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश सरकार ने स्कूल चलो अभियान के दूसरे चरण के लिए ₹163.60 लाख की वित्तीय सीमा जारी की।
अभियान 1 जुलाई से 15 जुलाई 2026 तक प्रदेश के सभी विकास खंडों में संचालित होगा।
लक्ष्य: शैक्षिक सत्र 2026-27 में शत-प्रतिशत नामांकन और ड्रॉपआउट बच्चों की वापसी।
महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने दिशा-निर्देश जारी किए; जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ता शामिल।
प्रभात फेरियाँ, नामांकन रैलियाँ, विद्यालय प्रवेशोत्सव और घर-घर संपर्क अभियान की प्रमुख गतिविधियाँ।
धनराशि का उपयोग पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ करने के शासन के स्पष्ट निर्देश।

उत्तर प्रदेश सरकार ने स्कूल चलो अभियान के दूसरे चरण के लिए ₹163.60 लाख की वित्तीय सीमा जारी कर दी है, जिसका उद्देश्य शैक्षिक सत्र 2026-27 में प्रदेश के हर बच्चे का विद्यालय में नामांकन सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चलाया जा रहा यह राज्यव्यापी अभियान 1 जुलाई से 15 जुलाई तक प्रदेश के सभी विकास खंडों में संचालित होगा।

अभियान का उद्देश्य और दायरा

महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, इस अभियान का मुख्य लक्ष्य विद्यालय से बाहर रह गए बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना, ड्रॉपआउट बच्चों का पुनः नामांकन कराना और नामांकन प्रक्रिया को व्यापक जनभागीदारी का रूप देना है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार निपुण भारत मिशन, विद्यालय कायाकल्प और अधिगम गुणवत्ता सुधार जैसे शिक्षा सुधार कार्यक्रम पहले से चला रही है।

प्रशासनिक तंत्र और जन-भागीदारी

सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों, जिला समन्वयकों (समेकित शिक्षा) और खंड शिक्षा अधिकारियों को अभियान के प्रभावी संचालन के निर्देश दिए गए हैं। अभियान में ग्राम पंचायतों, नगर निकायों, विद्यालय प्रबंधन समितियों, स्वयं सहायता समूहों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवी संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्य गतिविधियाँ

अभियान के तहत प्रभात फेरियाँ, नामांकन रैलियाँ, घर-घर संपर्क, अभिभावक बैठकें, ग्राम सभाएँ, विद्यालय प्रवेशोत्सव, विशेष नामांकन शिविर और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। ग्राम एवं वार्ड स्तर पर सर्वेक्षण और स्थानीय अभिलेखों के माध्यम से विद्यालय से बाहर बच्चों की पहचान की जाएगी। विशेष रूप से कक्षा छोड़ चुके बच्चों को दोबारा विद्यालय से जोड़ने के लिए समन्वित प्रयास किए जाएंगे।

वित्तीय उपयोग के निर्देश

जारी ₹163.60 लाख की धनराशि का उपयोग रैलियों, प्रचार-प्रसार सामग्री, बैनर, पोस्टर, फ्लेक्स, सामुदायिक बैठकों और प्रवेशोत्सव जैसी गतिविधियों के लिए जनपदों को उपलब्ध कराई जाएगी। शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि धनराशि का उपयोग निर्धारित मानकों के अनुरूप पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ किया जाए।

व्यापक शिक्षा सुधारों से जुड़ाव

गौरतलब है कि यह अभियान निपुण भारत मिशन, बालवाटिका, शिक्षक क्षमता संवर्धन और विद्यालय कायाकल्प जैसी योजनाओं के बाद आया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकार शिक्षा के सार्वभौमिक लक्ष्य को चरणबद्ध तरीके से साकार करने की कोशिश कर रही है। अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जमीनी स्तर पर ग्राम पंचायतें और स्थानीय निकाय इसे कितनी प्रभावी तरह से लागू करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन नामांकन के बाद बच्चों की नियमित उपस्थिति और ठहराव दर की निगरानी प्रायः कमज़ोर रही है। निपुण भारत और विद्यालय कायाकल्प जैसे कार्यक्रमों के साथ इस अभियान का तालमेल सकारात्मक संकेत है, पर स्वतंत्र सत्यापन तंत्र के बिना नामांकन के आँकड़े कागज़ी उपलब्धि बनकर रह सकते हैं।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्कूल चलो अभियान का दूसरा चरण क्या है?
यह उत्तर प्रदेश सरकार का एक राज्यव्यापी शिक्षा नामांकन अभियान है जो 1 से 15 जुलाई 2026 तक सभी विकास खंडों में चलेगा। इसका उद्देश्य सत्र 2026-27 में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करना और स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ना है।
इस अभियान के लिए कितनी धनराशि जारी की गई है?
उत्तर प्रदेश सरकार ने स्कूल चलो अभियान के दूसरे चरण के लिए ₹163.60 लाख की वित्तीय सीमा जारी की है। यह धनराशि जनपदों को रैलियों, प्रचार सामग्री, सामुदायिक बैठकों और प्रवेशोत्सव जैसी गतिविधियों के लिए उपलब्ध कराई जाएगी।
अभियान में कौन-कौन सी संस्थाएँ और कार्यकर्ता शामिल होंगे?
अभियान में ग्राम पंचायतें, नगर निकाय, विद्यालय प्रबंधन समितियाँ, स्वयं सहायता समूह, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, स्वयंसेवी संस्थाएँ और जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारी अभियान का समन्वय करेंगे।
स्कूल से बाहर बच्चों की पहचान कैसे होगी?
घर-घर संपर्क, ग्राम एवं वार्ड स्तर पर सर्वेक्षण और स्थानीय अभिलेखों के माध्यम से विद्यालय से बाहर बच्चों की पहचान की जाएगी। पहचान के बाद उनका प्राथमिकता के आधार पर नामांकन कराया जाएगा और नियमित उपस्थिति के लिए अभिभावकों से सतत संवाद रखा जाएगा।
यह अभियान पहले से चल रहे शिक्षा कार्यक्रमों से कैसे जुड़ा है?
स्कूल चलो अभियान का दूसरा चरण निपुण भारत मिशन, विद्यालय कायाकल्प, बालवाटिका और शिक्षक क्षमता संवर्धन जैसे चल रहे कार्यक्रमों को नई मजबूती देने के लिए आया है। इन सभी पहलों का संयुक्त लक्ष्य शिक्षा के सार्वभौमिक लक्ष्य को साकार करना है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 5 दिन पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले