उत्तर प्रदेश: आरटीई नामांकन में एक लाख का आंकड़ा पार, गरीब बच्चों को मिले नए अवसर
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ, 18 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अंतर्गत योगी सरकार ने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि नीतियां केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह वास्तविकता में परिवर्तन का साधन बन रही हैं। वर्ष 2026-27 के लिए प्रदेश में अब तक 1,03,439 बच्चों का नामांकन किया गया है, जिससे कई गरीब और वंचित परिवारों के सपनों को नई दिशा मिली है।
आंकड़ों का यह प्रारंभिक ट्रेंड यह दर्शाता है कि आने वाले चरणों में यह संख्या और तेजी से बढ़ेगी, क्योंकि नामांकन प्रक्रिया अभी भी जारी है। राज्य के लखनऊ, वाराणसी, बुलंदशहर और बदायूं जनपद नामांकन में आगे हैं।
आंकड़ों के अनुसार, लखनऊ में 7,952, वाराणसी में 4,957, बुलंदशहर में 4,154 और बदायूं में 3,599 बच्चों का नामांकन हुआ है। अभिभावकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है और वे अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए आगे बढ़ रहे हैं।
एक अधिकारी ने बताया कि सरकार की इस पहल का सबसे बड़ा प्रभाव समाज के अंतिम पायदान पर खड़े परिवारों पर पड़ा है। अब आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को भी निजी विद्यालयों में पढ़ाई के अवसर मिलने लगे हैं, जिससे शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर की मजबूत नींव रखी जा रही है। यह कदम शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में भी एक परिवर्तनकारी पहल साबित हो रहा है।
अपने अधिकारों, सुविधाओं या अवसरों से वंचित बच्चों की शिक्षा को लेकर गंभीर योगी सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाया है। ऑनलाइन आवेदन और चयन प्रणाली के माध्यम से पात्र बच्चों को बिना किसी भेदभाव के लाभ मिल रहा है। यही कारण है कि योजना के प्रति आमजन में विश्वास और सहभागिता लगातार बढ़ रही है।
बेसिक शिक्षा विभाग का मानना है कि जुलाई तक चलने वाली नामांकन प्रक्रिया के दौरान और अधिक पात्र बच्चों को इस योजना से जोड़ा जा सकेगा। आरटीई नामांकन में शीर्ष 10 जनपद में लखनऊ (7952), वाराणसी (4957), बुलंदशहर (4154), बदायूं (3599), मुरादाबाद (3246), आगरा (3086), कानपुर नगर (2476), गोरखपुर (2352), अलीगढ़ (2320) और गाजियाबाद (2209) शामिल हैं।