26 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आरटीई अधिनियम के तहत लाखों बच्चों के लिए निजी स्कूलों का नया अवसर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आरटीई अधिनियम के तहत लाखों बच्चों के लिए निजी स्कूलों का नया अवसर

सारांश

उत्तर प्रदेश में आरटीई अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को निजी विद्यालयों में नि:शुल्क शिक्षा देने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। जानें, इस योजना के अंतर्गत कितने बच्चों को मिला लाभ और कैसे हो रही है प्रक्रिया।

मुख्य बातें

आरटीई अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा मिल रही है।
1.5 लाख से अधिक छात्रों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिया गया है।
ऑनलाइन और पारदर्शी प्रक्रिया से चयन में निष्पक्षता बढ़ी है।
बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
आवेदन प्रक्रिया में तेजी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा रही है।

लखनऊ, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इस दिशा में, शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को निजी विद्यालयों में नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। ऑनलाइन पारदर्शी प्रणाली के माध्यम से आवेदन, सत्यापन और लॉटरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया जा रहा है।

राज्य में आरटीई के अंतर्गत पहले और दूसरे चरण में मिलाकर 1.5 लाख से अधिक छात्रों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिया गया है। पहले चरण में लगभग 1.09 लाख सीटों का आवंटन किया गया है, जबकि दूसरे लॉटरी में 47 हजार से अधिक बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश प्राप्त हुआ है। इस प्रकार, बड़ी संख्या में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं।

बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सभी वर्गों के बच्चों तक पहुंचनी चाहिए। इसी उद्देश्य से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे भी निजी विद्यालयों में पढ़कर अपने भविष्य को बेहतर बना सकें। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, राज्य के विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में आवेदन सत्यापित किए गए हैं। आरटीई के तहत सर्वाधिक प्रवेश लखनऊ, कानपुर नगर, आगरा, मुरादाबाद और बुलंदशहर जैसे जनपदों में हुए हैं, जहां हजारों बच्चों को निजी विद्यालयों में पढ़ने का अवसर मिला है।

इसी प्रकार अलीगढ़, गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद, फीरोजाबाद और बरेली जैसे जिलों में भी हजारों बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश का अवसर मिला है। यहां ध्यान देने योग्य है कि आरटीई अधिनियम के तहत निजी विद्यालयों में निर्धारित सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और वंचित वर्ग के बच्चों को प्रवेश दिया जाता है। इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया गया है, जिससे चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।

महानिदेशक स्कूल शिक्षा, मोनिका रानी का कहना है कि आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया के आगामी चरण भी जल्द पूरे किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक पात्र बच्चों को इस योजना का लाभ मिल सके। सर्वाधिक प्रवेश वाले जनपद लखनऊ लॉटरी-1: 12,097 लॉटरी-2: 3,489 कुल: 15,586 सीटें कानपुर नगर लॉटरी-1: 7,128 लॉटरी-2: 1,822 कुल: 8,950 सीटें वाराणसी लॉटरी-1: 7,140 लॉटरी-2: 989 कुल: 8,129 सीटें आगरा लॉटरी-1: 4,989 लॉटरी-2: 1,771 कुल: 6,760 सीटें मुरादाबाद लॉटरी-1: 4,080 लॉटरी-2: 1,890 कुल: 5,970 सीटें अलीगढ़ लॉटरी-1: 4,172 लॉटरी-2: 1,189 कुल: 5,361 सीटें बुलंदशहर लॉटरी-1: 3,761 लॉटरी-2: 1,584 कुल: 5,345 सीटें मेरठ लॉटरी-1: 3,691 लॉटरी-2: 1,235 कुल: 4,926 सीटें गाजियाबाद लॉटरी-1: 3,540 लॉटरी-2: 1,350 कुल: 4,890 सीटें हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

आर्थिक असमानता को कम करने का एक महत्वपूर्ण कदम है। यह प्रक्रिया न केवल बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाएगी, बल्कि समाज में समानता लाने में भी मदद करेगी।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरटीई के तहत कौन से बच्चों को प्राथमिकता दी जाती है?
आरटीई के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को प्राथमिकता दी जाती है।
आवेदन प्रक्रिया कैसे होती है?
आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन होती है, जिसमें आवेदन, सत्यापन और लॉटरी प्रक्रिया शामिल होती है।
कितने बच्चों को आरटीई के तहत प्रवेश मिला है?
अब तक आरटीई के तहत 1.5 लाख से अधिक बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिया गया है।
आरटीई की प्रक्रिया में पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जाती है?
आरटीई की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया गया है, जिससे आवेदन और चयन में निष्पक्षता सुनिश्चित होती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले