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बलिया के सरकारी स्कूल में स्मार्ट क्लास और आधुनिक लैब, 1,128 बच्चों को मिल रही कॉन्वेंट जैसी शिक्षा

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बलिया के सरकारी स्कूल में स्मार्ट क्लास और आधुनिक लैब, 1,128 बच्चों को मिल रही कॉन्वेंट जैसी शिक्षा

सारांश

बलिया का एक सदी पुराना सरकारी स्कूल अब स्मार्ट क्लास और आधुनिक लैब से लैस है — 1,128 बच्चे, 38 शिक्षक, दो राज्य पुरस्कार और NMMS में 20 चयन। योगी सरकार के बेसिक शिक्षा सुधारों की यह तस्वीर बताती है कि ग्रामीण UP में सरकारी स्कूल निजी स्कूलों को टक्कर देने लगे हैं।

मुख्य बातें

कंपोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय, सिकंदरपुर (बलिया) में 1,128 विद्यार्थी और 38 शिक्षक हैं।
विद्यालय में 4 स्मार्ट क्लास , ICT लैब , एस्ट्रो लैब और LBD लैब उपलब्ध हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार ने विद्यालय को 'निपुण विद्यालय पुरस्कार' और 'उत्कृष्ट विद्यालय पुरस्कार' से सम्मानित किया।
NMMS परीक्षा में 20 विद्यार्थियों का चयन; मंडल स्तरीय प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान ।
विद्यालय 1927 में स्थापित हुआ था और अब मिड-डे मील, स्वच्छ पेयजल व खेल सुविधाओं से भी सुसज्जित है।

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के विकास खंड नवानगर स्थित कंपोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय, सिकंदरपुर — जो 1927 में स्थापित हुआ था — आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बेसिक शिक्षा सुधारों का जीवंत उदाहरण बन चुका है। 1,128 विद्यार्थियों और 38 शिक्षकों के साथ यह विद्यालय स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब और एस्ट्रो लैब जैसी सुविधाओं से लैस होकर अभिभावकों की पहली पसंद बन गया है।

मुख्य सुविधाएँ और शैक्षिक संसाधन

विद्यालय में चार स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, एस्ट्रो लैब और लर्निंग बाय डूइंग (LBD) लैब के ज़रिये बच्चों को आधुनिक तरीके से पढ़ाया जा रहा है। इन संसाधनों की बदौलत विद्यालय ने राष्ट्रीय मेधा एवं साधन छात्रवृत्ति (NMMS) परीक्षा में 20 विद्यार्थियों का चयन कराया है। मंडल स्तरीय सांस्कृतिक और खेल प्रतियोगिताओं में भी विद्यालय ने प्रथम स्थान हासिल किया है।

पुरस्कार और उपलब्धियाँ

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस विद्यालय को 'निपुण विद्यालय पुरस्कार' और 'उत्कृष्ट विद्यालय पुरस्कार' — दोनों से सम्मानित किया है। पढ़ाई के साथ-साथ विद्यालय में स्वच्छ परिसर, मिड-डे मील, साफ पेयजल, शौचालय और खेल सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी विद्यालयों से निजी स्कूलों की ओर पलायन एक बड़ी चुनौती रही है।

बच्चों और अभिभावकों की प्रतिक्रिया

छात्रा रेश्मा चौहान ने कहा कि यहाँ शिक्षा में सकारात्मक बदलाव हुए हैं — 'शिक्षक छात्रों को बेहतर तरीके से पढ़ाते हैं। हमारे स्कूल में कंप्यूटर लैब, लर्निंग बाय डूइंग लैब और स्मार्ट क्लास हैं।' एक अन्य छात्रा इकरा नाज ने बताया, 'स्मार्ट क्लास होने की वजह से चीजें जल्दी और लंबे समय तक याद रहती हैं। मैं बड़े होकर डॉक्टर बनूँगी।'

अभिभावक वीरेंद्र कुमार ने कहा कि 'वर्तमान सरकार में बहुत सुंदर व्यवस्था है। इंग्लिश स्कूल और कॉन्वेंट जैसी सुविधाएँ अब सरकारी स्कूलों में मिल रही हैं।'

प्रशासन का नज़रिया

विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक अभिलाष चंद्र मिश्र ने बताया कि योगी सरकार में पहला बड़ा बदलाव यह आया कि बच्चों को सत्र की शुरुआत में ही किताबें मिलने लगीं। उन्होंने कहा, 'पहले के शासनकाल में किताबें आधा सत्र बीतने के बाद मिलती थीं। अब आधुनिक प्रयोगशालाएँ स्थापित की गई हैं।' गौरतलब है कि 1927 में स्थापित यह विद्यालय लगभग एक सदी पुराना है, लेकिन आज इसकी पहचान तकनीक-सक्षम शिक्षा के केंद्र के रूप में बन रही है।

आगे की राह

बलिया का यह विद्यालय उत्तर प्रदेश के उन सैकड़ों सरकारी स्कूलों की कतार में शामिल हो रहा है जिन्हें बेसिक शिक्षा विभाग के तहत आधुनिक बनाया जा रहा है। यदि इस मॉडल को व्यापक स्तर पर लागू किया जाता है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी शिक्षा की गुणवत्ता और नामांकन दोनों में सुधार की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एक विद्यालय की सफलता को नीतिगत उपलब्धि मानने से पहले यह देखना ज़रूरी है कि बलिया जिले के बाकी सैकड़ों विद्यालयों की स्थिति क्या है। आलोचकों का कहना है कि चुनिंदा 'मॉडल स्कूल' बनाना और समग्र बेसिक शिक्षा व्यवस्था को सुधारना — दोनों अलग-अलग काम हैं। राज्य में शिक्षक-रिक्तियों और बुनियादी ढाँचे की असमानता अभी भी एक बड़ी चुनौती है। जब तक यह मॉडल ग्रामीण UP के हर ब्लॉक तक नहीं पहुँचता, तब तक यह प्रगति की दिशा तो दिखाता है — पर मंज़िल नहीं।
RashtraPress
5 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बलिया का कंपोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय, सिकंदरपुर क्यों चर्चा में है?
यह विद्यालय स्मार्ट क्लास, ICT लैब, एस्ट्रो लैब और LBD लैब जैसी आधुनिक सुविधाओं के कारण चर्चा में है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे 'निपुण विद्यालय पुरस्कार' और 'उत्कृष्ट विद्यालय पुरस्कार' से सम्मानित किया है।
इस सरकारी स्कूल में कितने बच्चे पढ़ते हैं और कितने शिक्षक हैं?
विद्यालय में वर्तमान में 1,128 विद्यार्थी नामांकित हैं और उन्हें पढ़ाने के लिए 38 शिक्षक नियुक्त हैं। यह संख्या ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी विद्यालयों में उल्लेखनीय मानी जाती है।
NMMS परीक्षा में इस विद्यालय का प्रदर्शन कैसा रहा?
राष्ट्रीय मेधा एवं साधन छात्रवृत्ति (NMMS) परीक्षा में इस विद्यालय के 20 विद्यार्थियों का चयन हुआ है। इसके अलावा मंडल स्तरीय सांस्कृतिक और खेल प्रतियोगिताओं में भी विद्यालय ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
योगी सरकार में इस विद्यालय में क्या बदलाव आए?
प्रभारी प्रधानाध्यापक अभिलाष चंद्र मिश्र के अनुसार, अब बच्चों को सत्र की शुरुआत में ही किताबें मिलती हैं, जबकि पहले आधा सत्र बीतने के बाद किताबें मिलती थीं। इसके साथ ही आधुनिक प्रयोगशालाएँ स्थापित की गई हैं और स्वच्छता, मिड-डे मील व खेल सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
यह विद्यालय कब स्थापित हुआ था?
कंपोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय, सिकंदरपुर की स्थापना 1927 में हुई थी। लगभग एक सदी पुराना यह विद्यालय अब आधुनिक तकनीक-सक्षम शिक्षा केंद्र के रूप में पहचाना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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