मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय: ग्रामीण शिक्षा में बदलाव का नया अध्याय
सारांश
Key Takeaways
- मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालयों की स्थापना का उद्देश्य आधुनिक शिक्षा प्रणाली को लागू करना है।
- इन विद्यालयों में स्मार्ट कक्षाएं और विज्ञान प्रयोगशालाएं होंगी।
- ग्रामीण छात्रों के लिए बेहतर शैक्षिक अवसर प्रदान किए जाएंगे।
- प्रत्येक विद्यालय के निर्माण पर 23 से 28 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
- निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समय-सीमा का ध्यान रखा जाएगा।
लखनऊ, ११ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राज्य में ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के छात्रों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, कई जिलों में मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालयों के निर्माण की प्रक्रिया आरंभ की गई है।
इन विद्यालयों में प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा १२ तक की शिक्षा एक ही परिसर में प्रदान की जाएगी, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक माहौल और आधुनिक संसाधनों का लाभ मिलेगा।
इन विद्यालयों की स्थापना से प्रदेश में समग्र, आधुनिक और समावेशी शिक्षा व्यवस्था को एक नई दिशा मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर भविष्य की मजबूत नींव प्राप्त होगी। बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने बताया कि लखनऊ के मलिहाबाद, बहराइच, चंदौली, मिर्जापुर, लखीमपुर खीरी, फतेहपुर, गाजियाबाद, कानपुर देहात, वाराणसी, कौशांबी, फर्रुखाबाद, अमेठी और उन्नाव सहित कई जिलों में इन विद्यालयों के निर्माण के लिए शासनादेश जारी कर दिए गए हैं।
इन परियोजनाओं के लिए प्रत्येक विद्यालय पर लगभग २३ से २८ करोड़ रुपये तक की लागत स्वीकृत की गई है और प्रारंभिक किस्त के रूप में कार्यदायी संस्थाओं को धनराशि भी प्रदान कर दी गई है। मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि इन विद्यालयों का उद्देश्य विद्यार्थियों को एकीकृत और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराना है।
इन विद्यालयों में स्मार्ट कक्षाएं, विज्ञान प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, खेल सुविधाएं और अन्य आवश्यक शैक्षिक संसाधन विकसित किए जाएंगे। इससे विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के छात्रों को शहरों जैसी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों के निर्माण से न केवल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि छात्रों को अपने क्षेत्र में बेहतर शैक्षिक अवसर मिलेंगे, जिससे उन्हें आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए मजबूत आधार प्राप्त होगा।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए, ताकि छात्रों को जल्द से जल्द इन आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिल सके। मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालयों का निर्माण उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड, उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग, कंसल्टेंसी एंड डिजाइन सर्विसेज (उ.प्र. जल निगम), उत्तर प्रदेश समाज कल्याण निर्माण निगम और आवास एवं विकास परिषद जैसी नामित कार्यदायी संस्थाओं के माध्यम से किया जाएगा।
निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता मानकों और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखा जाएगा।