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देवरिया के सहवा का पीएमश्री कंपोजिट विद्यालय बना यूपी का मॉडल स्कूल, 16 छात्र इंस्पायर अवॉर्ड में चयनित

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देवरिया के सहवा का पीएमश्री कंपोजिट विद्यालय बना यूपी का मॉडल स्कूल, 16 छात्र इंस्पायर अवॉर्ड में चयनित

सारांश

देवरिया के सहवा का पीएमश्री कंपोजिट विद्यालय — जहाँ कभी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं थीं — आज एस्ट्रोनॉमी लैब, आईसीटी लैब और स्मार्ट क्लास के साथ 22 गांवों का भरोसेमंद स्कूल बन चुका है। 16 इंस्पायर अवॉर्ड चयन और 64 एनएमएमएस छात्रवृत्तियाँ इसकी असली कहानी कहती हैं।

मुख्य बातें

देवरिया के सहवा स्थित पीएमश्री कंपोजिट विद्यालय को उत्तर प्रदेश का मॉडल स्कूल घोषित किया गया है।
विद्यालय में साइंस लैब , आईसीटी लैब , एस्ट्रोनॉमी लैब और लर्निंग बाय डूइंग लैब की सुविधाएं उपलब्ध हैं।
अब तक 16 विद्यार्थियों का राष्ट्रीय स्तर के इंस्पायर अवॉर्ड के लिए चयन हो चुका है।
एनएमएमएस परीक्षा में 64 छात्रों को छात्रवृत्ति मिली है।
स्कूल आसपास के 22 गांवों के बच्चों के लिए शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
मिड-डे मील में पौष्टिक आहार और अनुशासित माहौल से अभिभावकों का सरकारी शिक्षा में भरोसा बढ़ा है।

देवरिया जिले के सहवा स्थित पीएमश्री कंपोजिट विद्यालय उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा व्यवस्था में बदलाव का जीवंत प्रतीक बन चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों के आधुनिकीकरण की जो मुहिम चलाई गई, उसके परिणामस्वरूप यह विद्यालय आसपास के 22 गांवों के बच्चों और अभिभावकों की पहली पसंद बन गया है। यहाँ अब तक 16 विद्यार्थियों का राष्ट्रीय स्तर के इंस्पायर अवॉर्ड के लिए चयन हो चुका है और 64 छात्रों को एनएमएमएस परीक्षा में छात्रवृत्ति मिली है।

मुख्य घटनाक्रम

एक समय जब उत्तर प्रदेश के सरकारी प्राथमिक विद्यालय बुनियादी सुविधाओं के लिए भी तरसते थे, वहीं आज सहवा का पीएमश्री विद्यालय स्मार्ट क्लास, साइंस लैब, आईसीटी लैब, एस्ट्रोनॉमी लैब और लर्निंग बाय डूइंग लैब जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। योगी सरकार ने बीते वर्षों में इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधार, डिजिटल संसाधनों की आपूर्ति और शिक्षण पद्धति के आधुनिकीकरण पर विशेष ज़ोर दिया है।

गौरतलब है कि पीएमश्री (पीएम स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया) योजना केंद्र सरकार की एक पहल है, जिसके तहत चयनित स्कूलों को अपग्रेड किया जाता है। देवरिया जिले में ऐसे कई पीएमश्री विद्यालय हैं, लेकिन सहवा का स्कूल उपलब्धियों के मामले में अग्रणी बताया जा रहा है।

छात्रों और अभिभावकों की प्रतिक्रिया

छात्रा अनामिका सिंह ने कहा, 'पहले हमारे स्कूल में इतनी सुविधाएं नहीं थीं। अब स्मार्ट क्लास और लैब में पढ़ाई होती है, तो समझने में आसानी होती है। शिक्षक भी नए तरीके से पढ़ाते हैं।' एक अन्य छात्रा जौली सिंह ने बताया, 'यहां खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विज्ञान की प्रैक्टिकल क्लास सब होती है। हमें लगता है हम किसी प्राइवेट स्कूल से कम नहीं हैं।'

अभिभावक रानू सिंह ने कहा, 'पहले हम प्राइवेट स्कूल में भेजने के बारे में सोचते थे, लेकिन अब सरकारी स्कूल में ही हर सुविधा मिल रही है। शिक्षक मेहनत करते हैं और बच्चे भी आगे बढ़ रहे हैं।' वहीं अभिभावक उमापति सिंह ने कहा, 'स्कूल का माहौल बदल गया है। साफ-सफाई, पढ़ाई और अनुशासन सब बेहतर है। हमें गर्व है कि हमारे गांव का स्कूल जिले में मिसाल बना है।'

प्रधानाध्यापक का नज़रिया

विद्यालय के प्रधानाध्यापक मुहम्मद गजनफर ने बताया, 'हमारा उद्देश्य है कि बच्चे रटें नहीं, समझें। एस्ट्रोनॉमी लैब में बच्चे तारों और ग्रहों के बारे में सीखते हैं, आईसीटी लैब में कंप्यूटर और डिजिटल टूल चलाना सीखते हैं। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है।' यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी अनुभव-आधारित और प्रयोगात्मक शिक्षण पर बल देती है।

अधिकारियों का आकलन

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. राम जियावन मौर्य ने कहा, 'देवरिया में कई पीएमश्री स्कूल हैं जो अपनी अत्याधुनिक शिक्षा सुविधाओं की वजह से पूरे जिले में आदर्श विद्यालय बन चुके हैं। सहवा का स्कूल उनमें सबसे आगे है। यहां के परिणाम और बच्चों की उपलब्धियां दूसरे स्कूलों के लिए प्रेरणा हैं।'

आम जनता पर असर

विद्यालय में मिड-डे मील के तहत नियमित पौष्टिक आहार दिया जाता है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य और उपस्थिति दर दोनों में सुधार आया है। यह मॉडल अब अन्य जिलों के सरकारी स्कूलों के लिए भी संदर्भ बिंदु बन रहा है। यदि इस पैटर्न को व्यापक पैमाने पर दोहराया जा सका, तो उत्तर प्रदेश में सरकारी और निजी स्कूलों के बीच की खाई पाटने की दिशा में यह एक ठोस कदम साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक अपवाद है या नई आदर्श स्थिति — यह प्रश्न अनुत्तरित है। उत्तर प्रदेश में लाखों सरकारी प्राथमिक विद्यालय हैं और चुनिंदा पीएमश्री स्कूलों में संसाधनों की एकाग्रता एक नीतिगत विरोधाभास को उजागर करती है। असली परीक्षा यह है कि क्या यह मॉडल केवल चुने हुए 'शोकेस स्कूलों' तक सीमित रहेगा या इसे व्यापक रूप से दोहराया जाएगा। जब तक शिक्षक-छात्र अनुपात, बुनियादी ढाँचे और जवाबदेही का यही स्तर हर ब्लॉक के स्कूल तक नहीं पहुँचता, तब तक यह सफलता एक प्रेरक कहानी तो है — पर बेसिक शिक्षा की बदली तस्वीर का पूरा सच नहीं।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देवरिया का पीएमश्री कंपोजिट विद्यालय क्या है और यह खास क्यों है?
देवरिया जिले के सहवा में स्थित यह पीएमश्री कंपोजिट विद्यालय केंद्र सरकार की 'पीएम स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया' योजना के तहत अपग्रेड किया गया सरकारी स्कूल है। यह विद्यालय एस्ट्रोनॉमी लैब, आईसीटी लैब, स्मार्ट क्लास और लर्निंग बाय डूइंग लैब जैसी सुविधाओं के कारण उत्तर प्रदेश के मॉडल स्कूलों में शुमार हो गया है।
इस स्कूल की अब तक की प्रमुख उपलब्धियाँ क्या हैं?
विद्यालय के 16 छात्रों का राष्ट्रीय स्तर के इंस्पायर अवॉर्ड के लिए चयन हो चुका है और 64 विद्यार्थियों को एनएमएमएस परीक्षा में छात्रवृत्ति मिली है। ये उपलब्धियाँ इसे जिले के अन्य सरकारी स्कूलों के लिए प्रेरणास्रोत बनाती हैं।
इस स्कूल में पढ़ाई का तरीका अन्य सरकारी स्कूलों से कैसे अलग है?
यहाँ रटने की बजाय समझ पर आधारित शिक्षण पद्धति अपनाई गई है। एस्ट्रोनॉमी लैब में तारों-ग्रहों का व्यावहारिक अध्ययन, आईसीटी लैब में डिजिटल कौशल और साइंस लैब में प्रयोगात्मक सीख पर जोर दिया जाता है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है।
यह स्कूल कितने गांवों के बच्चों की ज़रूरत पूरी करता है?
सहवा का पीएमश्री कंपोजिट विद्यालय आसपास के 22 गांवों के बच्चों के लिए शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन चुका है। अभिभावकों का कहना है कि अब वे निजी स्कूलों की बजाय इसी सरकारी स्कूल को प्राथमिकता दे रहे हैं।
योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा सुधार के लिए क्या कदम उठाए हैं?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल संसाधन और आधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की हैं। इसके साथ ही मिड-डे मील में पौष्टिक आहार और इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधार पर भी ध्यान दिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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