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सोनम वांगचुक अस्पताल से डिस्चार्ज, बोले — 'काफी बेहतर हूं, राजघाट जाकर लद्दाख लौटूंगा'

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सोनम वांगचुक अस्पताल से डिस्चार्ज, बोले — 'काफी बेहतर हूं, राजघाट जाकर लद्दाख लौटूंगा'

सारांश

26 दिन के अनशन और मेदांता अस्पताल में भर्ती रहने के बाद सोनम वांगचुक 27 जुलाई को डिस्चार्ज हो गए। 65 सांसदों के आग्रह और सरकार के लिखित आश्वासन के बाद 24 जुलाई को अनशन तोड़ा था। अब राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देकर लद्दाख लौटेंगे।

मुख्य बातें

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को 27 जुलाई को मेदांता अस्पताल, गुड़गांव से छुट्टी मिली।
वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर परीक्षा प्रणाली सुधार की माँग को लेकर अनशन पर थे — 26 दिन बाद 24 जुलाई को अनशन समाप्त किया।
विभिन्न दलों के 65 सांसदों ने अनशन समाप्त करने का आग्रह किया और संसद में NEET व परीक्षा सुधार पर चर्चा का आश्वासन दिया।
केंद्रीय मंत्री जे.पी.
जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में अनशन तोड़ा; सरकार ने लिखित आश्वासन दिया।
वांगचुक राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के बाद लद्दाख लौटेंगे।

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सोमवार, 27 जुलाई को मेदांता अस्पताल, गुड़गांव से छुट्टी दे दी गई। वांगचुक 28 जून से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर परीक्षा प्रणाली में सुधार की माँग को लेकर अनशन पर बैठे थे और 26 दिन बाद 24 जुलाई को उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया था। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद उन्होंने कहा कि वे अब काफी बेहतर महसूस कर रहे हैं और लद्दाख लौटने से पहले राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

एक्स पर वांगचुक का संदेश

वांगचुक ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'आखिरकार मुझे अस्पताल से छुट्टी मिल रही है। मैं महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के लिए राजघाट जाऊंगा और फिर पहाड़ों पर वापस लौटूंगा। आप सभी का धन्यवाद। मेदांता अस्पताल, गुड़गांव के डॉक्टरों और स्टाफ की पूरी टीम का भी बहुत-बहुत आभार।' उन्होंने एक वीडियो संदेश में यह भी बताया कि धीरे-धीरे खाना शुरू कर दिया है और शरीर में ताकत लौट रही है।

अनशन समाप्ति की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि 24 जुलाई को अनशन समाप्त करने के बाद वांगचुक ने बताया था कि केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा, डॉ. जितेंद्र सिंह तथा लेह-लद्दाख की शीर्ष संस्था के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में उन्होंने यह कदम उठाया। उन्होंने बताया था कि विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों ने उनसे मिलकर या पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने का आग्रह किया और संसद में NEET तथा परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कराने का आश्वासन दिया।

लिखित आश्वासन और सरकार का रुख

वांगचुक ने बताया था कि अनशन समाप्ति के अंतिम दो दिनों में लिखित आश्वासन को लेकर बातचीत चलती रही, जिसके कारण उनका अनशन दो दिन और बढ़ गया। अंततः सरकार की ओर से उन्हें लिखित आश्वासन प्राप्त हुआ, जिसके बाद उन्होंने अनशन तोड़ा। सरकार की ओर से आए मंत्रियों ने भी उन्हें आश्वस्त किया था।

देशभर के समर्थकों का आभार

वांगचुक ने अपने वीडियो संदेश में देशभर के समर्थकों का विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'लद्दाख लौटने से पहले मैं दिल की गहराइयों से आप सभी का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं। देशभर के लोगों ने हमारी आवाज से आवाज मिलाई और इस मुहिम का साथ दिया।' उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इस अभियान की शुरुआत से पहले भी वे राजघाट गए थे और वहां श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद जंतर-मंतर पहुंचे थे।

आगे क्या

अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद वांगचुक राजघाट जाएंगे और इसके बाद लद्दाख लौटेंगे। उन्होंने संकेत दिया है कि वे आगे भी अपने समर्थकों और देशवासियों से जुड़े रहेंगे। परीक्षा प्रणाली सुधार और NEET से जुड़े मुद्दों पर संसद में चर्चा का आश्वासन मिलने के बाद अब यह देखना होगा कि सरकार इस दिशा में कब और कैसे कदम उठाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर क्रियान्वयन की समयसीमा धुंधली रहती है। NEET विवाद पहले से ही संसद में गूंज चुका है, फिर भी 65 सांसदों का दबाव बनने तक सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं आई — यह जवाबदेही की कमी को उजागर करता है। असली कसौटी यह होगी कि संसद में चर्चा का यह आश्वासन अगले सत्र में कार्रवाई में बदलता है या केवल एक और अनुत्तरित वादा बनकर रह जाता है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनम वांगचुक को अस्पताल से कब छुट्टी मिली?
सोनम वांगचुक को 27 जुलाई, सोमवार को मेदांता अस्पताल, गुड़गांव से छुट्टी दी गई। उन्होंने बताया कि वे अब काफी बेहतर महसूस कर रहे हैं और धीरे-धीरे खाना शुरू कर दिया है।
सोनम वांगचुक ने अनशन किस मुद्दे पर और कब शुरू किया था?
वांगचुक ने 28 जून से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर परीक्षा प्रणाली में सुधार — विशेषकर NEET से जुड़े मुद्दों — की माँग को लेकर अनशन शुरू किया था। 26 दिन बाद 24 जुलाई को उन्होंने अनशन समाप्त किया।
सोनम वांगचुक ने अनशन क्यों तोड़ा?
विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों ने वांगचुक से मिलकर या पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने का आग्रह किया और संसद में NEET व परीक्षा सुधार पर चर्चा कराने का आश्वासन दिया। इसके अलावा केंद्रीय मंत्रियों ने उन्हें लिखित आश्वासन दिया, जिसके बाद उन्होंने अनशन तोड़ा।
अस्पताल से छुट्टी के बाद सोनम वांगचुक कहाँ जाएंगे?
वांगचुक ने बताया कि वे पहले राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे और उसके बाद लद्दाख लौटेंगे। उन्होंने कहा कि इस अभियान की शुरुआत से पहले भी वे राजघाट गए थे।
NEET और परीक्षा सुधार पर सरकार ने क्या आश्वासन दिया?
सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में वांगचुक को लिखित आश्वासन दिया गया कि संसद में NEET और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कराई जाएगी। हालांकि इस चर्चा की कोई निश्चित समयसीमा अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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