27 जुलाई 2026
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सोनम वांगचुक ने राजघाट पर बापू को दी श्रद्धांजलि, 26 दिन के अनशन के बाद मेदांता से मिली छुट्टी

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सोनम वांगचुक ने राजघाट पर बापू को दी श्रद्धांजलि, 26 दिन के अनशन के बाद मेदांता से मिली छुट्टी

सारांश

26 दिनों के नीट-विरोधी अनशन के बाद मेदांता से छुट्टी पाते ही सोनम वांगचुक सीधे राजघाट पहुँचे — गांधी के रास्ते पर चलने की कृतज्ञता जताने। उनका संदेश स्पष्ट था: यह जीत लाठी से नहीं, शांति और आत्म-कष्ट से मिली।

मुख्य बातें

सोनम वांगचुक को 27 जुलाई को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से छुट्टी दी गई।
अस्पताल से निकलते ही वे पत्नी गीतांजली अंगमो के साथ राजघाट पहुँचे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
नीट पेपर लीक के विरोध में वांगचुक ने 26 दिनों तक अनशन किया था, जो 24 जुलाई को समाप्त हुआ।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ.
जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में अनशन तोड़ा गया।
विभिन्न दलों के 65 सांसदों ने संसद में नीट मुद्दे पर चर्चा कराने का आश्वासन दिया।

पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को 27 जुलाई को गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। नीट पेपर लीक के विरोध में 26 दिनों तक चले अनशन के बाद अस्पताल से निकलते ही वांगचुक सीधे नई दिल्ली के राजघाट पहुँचे, जहाँ उन्होंने अपनी पत्नी गीतांजली अंगमो के साथ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को नमन किया।

राजघाट पर भावुक पल

वांगचुक ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर राजघाट दौरे की तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए लिखा — 'धन्यवाद बापू, आपने जो रास्ता दिखाया उसके लिए… हमें अभी पता चला कि यह आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना 100 साल पहले था।' उनका यह संदेश तब आया जब वे लद्दाख लौटने से ठीक पहले गांधी समाधि पर रुके।

अनशन समापन पर वांगचुक का संबोधन

राजघाट पर उन्होंने कहा कि इस 26 दिवसीय अनशन और आंदोलन के समापन पर सबसे पहले बापू को याद करना ज़रूरी था — उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए और यह बताने के लिए कि गांधी का मार्ग आज भी उतना ही उपयुक्त है। उन्होंने कहा, 'यदि कुछ हासिल किया गया है, तो यह शस्त्रों, लाठियों या पत्थरों के बल पर नहीं हुआ; यह शांति की अपील और स्वयं कष्ट सहने के कारण संभव हुआ।' वांगचुक ने देश की युवा पीढ़ी, आम जनता और उन युवा आयोजकों को विशेष बधाई दी जिन्होंने इस आंदोलन को अत्यंत शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया।

अस्पताल से विदाई का संदेश

मेदांता से छुट्टी मिलने के कुछ समय पहले ही वांगचुक ने एक वीडियो साझा करते हुए कहा था — 'और आखिरकार… मुझे अस्पताल से छुट्टी मिल रही है। मैं महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए राजघाट जाऊंगा और फिर पहाड़ों पर लौट जाऊंगा।' उन्होंने मेदांता के सभी डॉक्टरों और कर्मचारियों का विशेष धन्यवाद किया।

अनशन समाप्ति की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि 24 जुलाई को वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त किया था। उस अवसर पर जारी वीडियो संदेश में उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, डॉ. जितेंद्र सिंह तथा लेह-लद्दाख की शीर्ष संस्था के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में उन्होंने अनशन तोड़ा। उन्होंने यह भी बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों ने उनसे मिलकर या पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने का आग्रह किया और संसद में नीट तथा परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कराने का आश्वासन दिया।

आगे क्या

अनशन समाप्ति के बाद वांगचुक लद्दाख लौट रहे हैं, लेकिन उनके आंदोलन ने नीट सुधार की माँग को संसद के गलियारों तक पहुँचाने में सफलता पाई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सांसदों द्वारा दिए गए आश्वासन संसदीय चर्चा में कब और किस रूप में साकार होते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनम वांगचुक ने राजघाट का दौरा क्यों किया?
सोनम वांगचुक ने नीट पेपर लीक के विरोध में 26 दिवसीय अनशन समाप्त होने और मेदांता अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने गांधीवादी अहिंसक मार्ग को अपने आंदोलन की प्रेरणा बताया।
सोनम वांगचुक का अनशन कब और क्यों समाप्त हुआ?
वांगचुक ने 24 जुलाई को अपना 26 दिवसीय अनशन समाप्त किया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में अनशन तोड़ा गया, जब 65 सांसदों ने संसद में नीट और परीक्षा प्रणाली पर चर्चा कराने का आश्वासन दिया।
नीट पेपर लीक पर वांगचुक के आंदोलन में किसने समर्थन दिया?
विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों ने वांगचुक से मिलकर या पत्र लिखकर समर्थन जताया। उन्होंने संसद में नीट और परीक्षा प्रणाली सुधार पर चर्चा कराने का आश्वासन दिया।
सोनम वांगचुक अब कहाँ जाएंगे?
राजघाट पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद वांगचुक लद्दाख (पहाड़ों) लौट रहे हैं। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उन्होंने खुद एक्स पर यह जानकारी साझा की।
सोनम वांगचुक का आंदोलन गांधीवाद से कैसे जुड़ा है?
वांगचुक ने अपने पूरे आंदोलन को अहिंसा और आत्म-कष्ट के गांधीवादी सिद्धांत पर आधारित रखा। राजघाट पर उन्होंने कहा कि जो कुछ हासिल हुआ वह शांति की अपील और स्वयं कष्ट सहने के कारण संभव हुआ, न कि किसी बल-प्रयोग से।
राष्ट्र प्रेस
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