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सोनम वांगचुक मेदांता अस्पताल शिफ्ट, 24 दिन बाद भी अनशन जारी रखने का ऐलान

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सोनम वांगचुक मेदांता अस्पताल शिफ्ट, 24 दिन बाद भी अनशन जारी रखने का ऐलान

सारांश

24 दिन के आमरण अनशन के बाद भी सोनम वांगचुक झुकने को तैयार नहीं — दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर मेदांता शिफ्ट हुए, पर अनशन जारी रखने का ऐलान कर दिया। पैनसाइटोपीनिया की गंभीर स्थिति के बावजूद वे 'संसद चलो' मार्च में छात्रों पर कथित पुलिस बर्बरता का विरोध जारी रखे हुए हैं।

मुख्य बातें

सोनम वांगचुक को 21 जुलाई की शाम 6:40 बजे सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल, गुरुग्राम स्थानांतरित किया गया।
स्थानांतरण दिल्ली उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ के आदेश पर हुआ।
वांगचुक को पैनसाइटोपीनिया है और सीरम पोटैशियम स्तर 3.4 एमईक्यूएल दर्ज किया गया; वाइटल पैरामीटर स्थिर बताए गए।
अंगमो ने पुष्टि की कि वांगचुक 24 दिन बाद भी अनशन जारी रखेंगे।
अनशन का कारण — 'संसद चलो' मार्च में प्रदर्शनकारी छात्रों पर दिल्ली पुलिस की कथित लाठीचार्ज व आंसू गैस कार्रवाई।

जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में मंगलवार, 21 जुलाई की शाम सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। वांगचुक पिछले 24 दिनों से आमरण अनशन पर हैं और उनकी पत्नी ने स्पष्ट किया है कि वे अपना अनशन जारी रखेंगे।

अस्पताल स्थानांतरण और स्वास्थ्य स्थिति

सफदरजंग अस्पताल की ओर से जारी स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार, वांगचुक को शाम 6:40 बजे अस्पताल से छुट्टी देकर मेदांता के चिकित्सकों की टीम को सौंपा गया। डिस्चार्ज के समय उनके सभी वाइटल पैरामीटर स्थिर बताए गए।

हालांकि, बुलेटिन में यह भी उल्लेख किया गया कि वांगचुक को अब भी पैनसाइटोपीनिया की गंभीर चिकित्सीय समस्या है और उनके रक्त में सीरम पोटैशियम का स्तर 3.4 एमईक्यूएल दर्ज किया गया है। उपचार की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए सभी मेडिकल रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट और उपचार-संबंधी दस्तावेज मेदांता की टीम को सौंप दिए गए।

गौरतलब है कि पैनसाइटोपीनिया एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति है जिसमें अस्थि मज्जा (बोन मैरो) पर्याप्त मात्रा में लाल रक्त कोशिकाएं, श्वेत रक्त कोशिकाएं और प्लेटलेट्स नहीं बना पाती। इससे अत्यधिक कमज़ोरी, बार-बार संक्रमण और रक्तस्राव जैसी जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं।

दिल्ली उच्च न्यायालय का आदेश

दिल्ली उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने मंगलवार को आदेश दिया कि वांगचुक को उनकी पसंद के अस्पताल — मेदांता — में स्थानांतरित किया जाए।

अदालत ने एम्स, सफदरजंग अस्पताल और वांगचुक के निजी चिकित्सकों की मेडिकल रिपोर्ट व राय पर विचार करने के बाद यह निर्णय लिया। सभी विशेषज्ञ इस बात पर सहमत पाए गए कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए लगातार चिकित्सकीय निगरानी आवश्यक है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि मेदांता के निदेशक की ओर से विशेषज्ञ डॉक्टरों का एक पैनल गठित किया जाए।

अनशन जारी रखने का ऐलान

उच्च न्यायालय के आदेश के बाद मीडिया से बातचीत में वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने बताया कि वांगचुक ने अपना अनशन जारी रखने का दृढ़ निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि 'संसद चलो' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर दिल्ली पुलिस की कथित बर्बर कार्रवाई के विरोध में यह निर्णय लिया गया है।

गीतांजलि ने कहा, 'छात्रों के साथ जिस तरह की क्रूरता और निर्दयता बरती गई, उन्हें पीटा गया, लाठीचार्ज किया गया और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया, उसके विरोध में सोनम ने अपना अनशन जारी रखने का निर्णय लिया है। वह तब तक अनशन जारी रखेंगे, जब तक संसद छात्रों की मांगों पर संज्ञान लेकर उन्हें सुनने के लिए तैयार नहीं होती।'

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति चिकित्सकीय दृष्टि से नाज़ुक बनी हुई है और अनशन के जारी रहने से जटिलताएं और बढ़ सकती हैं। मेदांता में विशेषज्ञ पैनल की निगरानी में उनका उपचार जारी रहेगा, जबकि उनकी मांगों पर संसद की प्रतिक्रिया का इंतज़ार बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नागरिक प्रतिरोध की सीमाओं और राज्य की जवाबदेही का प्रश्न बन गया है। पैनसाइटोपीनिया जैसी गंभीर स्थिति में भी अनशन जारी रखने का निर्णय यह संकेत देता है कि वांगचुक और उनके समर्थक इसे चिकित्सीय नहीं, राजनीतिक लड़ाई मान रहे हैं। जो बात मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर अनदेखी रहती है, वह यह है कि 'संसद चलो' मार्च पर छात्रों के साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच अब तक सार्वजनिक नहीं हुई — और यही जवाबदेही का असली शून्य है।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल क्यों शिफ्ट किया गया?
दिल्ली उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने आदेश दिया कि वांगचुक को उनकी पसंद के अस्पताल मेदांता में स्थानांतरित किया जाए। अदालत ने एम्स, सफदरजंग और निजी चिकित्सकों की रिपोर्ट के आधार पर पाया कि उनकी स्थिति में लगातार चिकित्सकीय निगरानी आवश्यक है।
सोनम वांगचुक की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति क्या है?
सफदरजंग अस्पताल के बुलेटिन के अनुसार, डिस्चार्ज के समय उनके वाइटल पैरामीटर स्थिर थे, लेकिन उन्हें पैनसाइटोपीनिया है और सीरम पोटैशियम स्तर 3.4 एमईक्यूएल दर्ज किया गया। पैनसाइटोपीनिया में बोन मैरो पर्याप्त रक्त कोशिकाएं नहीं बना पाती, जिससे गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं।
सोनम वांगचुक किस मांग को लेकर अनशन पर हैं?
वांगचुक 'संसद चलो' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर दिल्ली पुलिस की कथित बर्बर कार्रवाई — लाठीचार्ज और आंसू गैस — के विरोध में अनशन पर हैं। उनकी पत्नी के अनुसार, वे तब तक अनशन जारी रखेंगे जब तक संसद छात्रों की मांगों पर संज्ञान लेकर उन्हें सुनने को तैयार नहीं होती।
पैनसाइटोपीनिया क्या है और यह क्यों गंभीर है?
पैनसाइटोपीनिया एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति है जिसमें अस्थि मज्जा पर्याप्त लाल रक्त कोशिकाएं, श्वेत रक्त कोशिकाएं और प्लेटलेट्स नहीं बना पाती। इससे अत्यधिक कमज़ोरी, बार-बार संक्रमण और रक्तस्राव का खतरा बढ़ जाता है, जो लंबे उपवास की स्थिति में और जटिल हो सकता है।
मेदांता में वांगचुक का इलाज कैसे होगा?
अदालत के आदेश के अनुसार मेदांता के निदेशक की ओर से विशेषज्ञ डॉक्टरों का एक पैनल गठित किया जाएगा। सफदरजंग अस्पताल के सभी मेडिकल रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट और उपचार-संबंधी दस्तावेज मेदांता की टीम को सौंप दिए गए हैं ताकि इलाज की निरंतरता बनी रहे।
राष्ट्र प्रेस
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