सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य: सफदरजंग अस्पताल का तीसरा बुलेटिन — ब्लड पैरामीटर्स पर निरंतर निगरानी जारी
सारांश
मुख्य बातें
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज एवं सफदरजंग अस्पताल ने 20 जुलाई 2026 (सोमवार) को लगातार तीसरे दिन हेल्थ बुलेटिन जारी किया। बुलेटिन में स्पष्ट किया गया कि वांगचुक के आवश्यक स्वास्थ्य पैरामीटर फिलहाल स्थिर हैं, किंतु ब्लड पैरामीटर्स पर निरंतर और सूक्ष्म चिकित्सा निगरानी की आवश्यकता बनी हुई है।
मुख्य चिकित्सा स्थिति
अस्पताल ने बताया कि सफदरजंग अस्पताल और एम्स नई दिल्ली की संयुक्त उपचार टीमों के नैदानिक आकलन के आधार पर, किसी भी संभावित जटिलता का समय रहते पता लगाने और तत्काल उपचार सुनिश्चित करने के लिए अबाध क्लिनिकल निगरानी अनिवार्य है। विशेषज्ञों की एक मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम उनकी नैदानिक स्थिति पर लगातार नज़र रख रही है और सभी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।
अस्पताल स्थानांतरण विवाद और दिल्ली हाईकोर्ट का निर्णय
वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने उन्हें किसी निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की माँग को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया था। हालाँकि, अदालत ने सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल स्थानांतरण की यह माँग अस्वीकार कर दी। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वांगचुक को अस्पताल में भर्ती करने का निर्णय उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए विधिक प्रक्रिया के अंतर्गत लिया गया था।
भर्ती का पृष्ठभूमि
जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश और चिकित्सकों की सलाह पर उन्हें शनिवार तड़के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वांगचुक ने 28 जून से औपचारिक रूप से आमरण अनशन आरंभ किया था।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
सोनम वांगचुक कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के उस आंदोलन में शामिल हुए थे, जो 6 जून से कथित नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब नीट विवाद को लेकर देशभर में विद्यार्थियों और अभिभावकों में व्यापक असंतोष देखा जा रहा है।
आगे क्या
चिकित्सकों की टीम वांगचुक की स्थिति की नियमित समीक्षा कर रही है। अस्पताल प्रशासन ने संकेत दिया है कि ब्लड पैरामीटर्स में सुधार की गति के आधार पर आगे के उपचार का निर्णय लिया जाएगा। दिल्ली उच्च न्यायालय का निर्देश अभी भी प्रभावी है, जिसके तहत उनकी चिकित्सा निगरानी जारी रहेगी।