21 जुलाई 2026
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दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश: सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति, TLC 2.9 पर गंभीर चिंता

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दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश: सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति, TLC 2.9 पर गंभीर चिंता

सारांश

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल में शिफ्ट करने का आदेश दिया — एकल न्यायाधीश के इनकार के बाद यह बड़ी राहत है। TLC 2.9 की गंभीर स्थिति और मल्टीपल ऑर्गन फेलियर की आशंका के बीच यह फैसला उनके परिजनों की लंबी कानूनी लड़ाई का नतीजा है।

मुख्य बातें

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 21 जुलाई को सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित करने का आदेश दिया।
यह आदेश पत्नी गीतांजलि अंगमो की अपील याचिका पर आया, जिसमें एकल न्यायाधीश के इनकार को चुनौती दी गई थी।
वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट में TLC 2.9 दर्ज है, जिससे शॉक, संक्रमण और मल्टीपल ऑर्गन फेलियर का खतरा बताया गया।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने स्थानांतरण पर कोई आपत्ति नहीं जताई, लेकिन मेदांता की अनुमति के बिना डिस्चार्ज न करने का अनुरोध किया।
अदालत ने मेदांता को सभी पूर्व मेडिकल रिपोर्ट उपलब्ध कराने और विशेषज्ञ डॉक्टरों का पैनल गठित करने का निर्देश दिया।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार, 21 जुलाई को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया। यह आदेश वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो की उस अपील याचिका पर सुनवाई के बाद आया, जिसमें एकल न्यायाधीश के उस फैसले को चुनौती दी गई थी जिसने उन्हें निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने साथ ही मेदांता को विशेषज्ञ डॉक्टरों का पैनल गठित करने का निर्देश भी दिया।

मुख्य घटनाक्रम

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने अदालत को बताया कि न्यायालय के पूर्व निर्देशों के तहत अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के चिकित्सक लगातार वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। गीतांजलि अंगमो की ओर से अदालत में एक हलफनामा दाखिल किया गया, जिसमें वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट और उनके चिकित्सकों की सलाह को रिकॉर्ड पर रखा गया।

गीतांजलि अंगमो के वकील ने उन डॉक्टरों के पत्र भी अदालत में प्रस्तुत किए जो लंबे समय से वांगचुक का उपचार करते आए हैं, साथ ही उस चिकित्सक का पत्र भी जो उनके विरोध प्रदर्शन के दौरान उनकी देखभाल कर रहे थे। वकील ने स्पष्ट किया कि इन डॉक्टरों ने वांगचुक की प्रत्यक्ष क्लिनिकल जांच नहीं की, बल्कि उपलब्ध मेडिकल रिपोर्ट और उनके पूर्ण चिकित्सा इतिहास के आधार पर अपनी पेशेवर राय दी है।

TLC 2.9 — स्वास्थ्य की गंभीर स्थिति

सुनवाई में ASG ने अदालत का ध्यान इस ओर दिलाया कि वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट में TLC (टोटल ल्यूकोसाइट काउंट) 2.9 दर्ज है, जो अत्यंत चिंताजनक है। TLC शरीर में श्वेत रक्त कोशिकाओं (WBC) की कुल संख्या मापता है, जो संक्रमण और बीमारियों से लड़ने में सहायक होती हैं। ASG के अनुसार इस स्तर पर शॉक, गंभीर संक्रमण और मल्टीपल ऑर्गन फेलियर का खतरा उत्पन्न हो सकता है।

सरकार की प्रतिक्रिया

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार को वांगचुक को मेदांता अस्पताल भेजे जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, उन्होंने अनुरोध किया कि न्यायालय अपने आदेश में यह भी स्पष्ट करे कि मेदांता के चिकित्सकों की अनुमति के बिना वांगचुक को अस्पताल से डिस्चार्ज नहीं किया जाएगा। मेहता ने यह भी कहा कि वांगचुक के निकट कुछ ऐसे लोग हैं जो उनकी स्वास्थ्य स्थिति की परवाह किए बिना उन्हें अस्पताल से बाहर ले जाना चाहते हैं।

अदालत का आदेश

दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निर्देश दिया कि सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया जाए। न्यायालय ने आदेश दिया कि अब तक की सभी मेडिकल जांच रिपोर्ट मेदांता के डॉक्टरों के पैनल को उपलब्ध कराई जाएं और अस्पताल वांगचुक के उपचार के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों का एक पैनल गठित करे। यह मामला अब मेदांता में उनके उपचार की निगरानी और स्वास्थ्य में सुधार के साथ आगे बढ़ेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक असाधारण आरोप है जिसे अदालत ने रिकॉर्ड पर लिया — परंतु इसकी जांच नहीं हुई। TLC 2.9 की गंभीरता को देखते हुए यह सवाल उठता है कि यदि एकल न्यायाधीश का आदेश बरकरार रहता, तो जवाबदेही किसकी होती। मुख्य न्यायाधीश का हस्तक्षेप समय पर था, लेकिन यह प्रक्रिया की उस धीमी गति को भी उजागर करता है जो गंभीर चिकित्सा मामलों में कभी-कभी जीवन और मृत्यु के बीच का फर्क बन जाती है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोनम वांगचुक के बारे में क्या आदेश दिया?
दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने 21 जुलाई को आदेश दिया कि सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया जाए और उनकी सभी पूर्व मेडिकल रिपोर्ट वहाँ के विशेषज्ञ डॉक्टरों के पैनल को उपलब्ध कराई जाएं। यह आदेश एकल न्यायाधीश के उस फैसले को पलटते हुए आया जिसमें निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की अंतरिम राहत नकार दी गई थी।
सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति कितनी गंभीर है?
वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट में TLC (टोटल ल्यूकोसाइट काउंट) 2.9 दर्ज है, जो शरीर में श्वेत रक्त कोशिकाओं की गंभीर रूप से कम संख्या दर्शाता है। केंद्र सरकार के वकील के अनुसार इस स्तर पर शॉक, गंभीर संक्रमण और मल्टीपल ऑर्गन फेलियर का खतरा हो सकता है।
गीतांजलि अंगमो ने हाईकोर्ट में याचिका क्यों दायर की?
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने एकल न्यायाधीश के उस आदेश के विरुद्ध अपील दायर की जिसमें वांगचुक को उनकी पसंद के निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अंतरिम राहत देने से इनकार किया गया था। उन्होंने अदालत में वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट और उनके चिकित्सकों की पेशेवर राय भी हलफनामे के रूप में प्रस्तुत की।
सरकार ने मेदांता स्थानांतरण पर क्या रुख अपनाया?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने स्पष्ट किया कि सरकार को वांगचुक को मेदांता भेजे जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि उन्होंने अनुरोध किया कि अदालत आदेश में यह भी स्पष्ट करे कि मेदांता के डॉक्टरों की अनुमति के बिना वांगचुक को डिस्चार्ज नहीं किया जाएगा।
मेदांता अस्पताल को क्या निर्देश दिए गए हैं?
दिल्ली उच्च न्यायालय ने मेदांता अस्पताल को निर्देश दिया है कि वह वांगचुक के उपचार के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों का एक पैनल गठित करे और अब तक की सभी मेडिकल जांच रिपोर्ट उस पैनल को उपलब्ध कराई जाएं ताकि समुचित इलाज सुनिश्चित हो सके।
राष्ट्र प्रेस
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