18 जुलाई 2026
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सोनम वांगचुक को अस्पताल भेजने पर भड़के हर्षवर्धन सपकाल, बोले — 'यह डेमोक्रेसी नहीं, डिक्टेटरशिप है'

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सोनम वांगचुक को अस्पताल भेजने पर भड़के हर्षवर्धन सपकाल, बोले — 'यह डेमोक्रेसी नहीं, डिक्टेटरशिप है'

सारांश

नीट पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर अनशनरत सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने सफदरजंग अस्पताल भेजा। इस कार्रवाई पर महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल और शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने सरकार को तानाशाही करार दिया और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग की।

मुख्य बातें

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल भेजा।
वांगचुक नीट पेपर लीक मामले में न्याय की माँग को लेकर कई दिनों से अनशन पर थे।
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने इस कार्रवाई को 'डिक्टेटरशिप' बताया और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग की।
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि ऐसी कार्रवाई ब्रिटिश शासन में भी नहीं हुई थी।
विपक्ष ने बेरोज़गारी, पेपर लीक और महिलाओं के विरुद्ध अत्याचार जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा।

महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान सपकाल ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र के विरुद्ध बताते हुए इसकी कड़े शब्दों में निंदा की।

अनशन की पृष्ठभूमि

सोनम वांगचुक नीट पेपर लीक मामले में न्याय की माँग को लेकर जंतर-मंतर पर कई दिनों से अनशन पर बैठे थे। विपक्षी नेताओं ने उनके बिगड़ते स्वास्थ्य को देखते हुए अनशन समाप्त करने की अपील की थी, किंतु वांगचुक इसके पक्ष में नहीं थे। इसी बीच दिल्ली पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाकर अस्पताल भेज दिया।

सपकाल की तीखी प्रतिक्रिया

हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि लोकतंत्र में सत्याग्रह करने का अधिकार हर नागरिक को है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पेपर लीक होते हैं तो संबंधित मंत्रालय के मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए — नीट पेपर लीक के बाद शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा क्यों नहीं दिया?

उन्होंने कहा, 'जंतर-मंतर पर लोकतांत्रिक तरीके से जो प्रदर्शन चल रहा था, उस पर जबरन कार्रवाई हुई है। जो कुछ भी आज हुआ, यह भारत को तानाशाही की ओर ले जाने का एक और कदम है।' सपकाल ने आगे कहा, 'अगर लोकतांत्रिक तरीकों से शुरू हुए आंदोलन भी सरकार को मंजूर नहीं हैं, तो यह साफ है कि इस देश में जो शुरू हुआ है वह डेमोक्रेसी नहीं, बल्कि डिक्टेटरशिप है।'

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग

सपकाल ने कहा कि विफल शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेने के बजाय, सोनम वांगचुक को प्रोटेस्ट साइट से जबरदस्ती हटाकर अस्पताल में भर्ती कराना और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस बल का इस्तेमाल करना लोकतंत्र के सर्वथा विरुद्ध है। उन्होंने बेरोज़गारी, बार-बार होने वाले पेपर लीक, राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंताओं, महिलाओं के विरुद्ध अत्याचार और किसानों को उचित मूल्य न मिलने जैसे गंभीर मुद्दों की ओर भी ध्यान दिलाया।

आदित्य ठाकरे का बयान

शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने भी इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि जिस तरह से सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाया गया, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। उन्होंने दावा किया कि ब्रिटिश शासन के दौरान भी इस प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई थी और भाजपा देश में सबसे खराब किस्म की तानाशाही लेकर आई है।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब नीट पेपर लीक विवाद पहले से ही देशभर में छात्रों और अभिभावकों में गहरे आक्रोश का कारण बना हुआ है। विपक्ष की माँग है कि सरकार जवाबदेही तय करे और शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें। गौरतलब है कि इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय भी सुनवाई कर रहा है और सरकार पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक राजनीतिक संकेत है — और विपक्ष इसे भुनाने में देर नहीं लगाया। नीट पेपर लीक पर सरकार की चुप्पी और शिक्षा मंत्री का पद पर बने रहना पहले से ही जनता में गुस्से का कारण है; ऐसे में अनशनरत कार्यकर्ता को जबरन हटाना उस आग में घी डालने जैसा है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार नीट विवाद पर जवाबदेही तय करने के बजाय केवल विरोध की आवाज़ों को दबाने पर केंद्रित है — और यह रणनीति लोकतांत्रिक मूल्यों की कसौटी पर कितनी टिकती है, यह आने वाले दिन तय करेंगे।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से क्यों हटाया गया?
सोनम वांगचुक नीट पेपर लीक मामले में न्याय की माँग को लेकर जंतर-मंतर पर कई दिनों से अनशन पर थे। 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने उनके स्वास्थ्य का हवाला देते हुए उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाकर सफदरजंग अस्पताल भेज दिया।
हर्षवर्धन सपकाल ने इस कार्रवाई पर क्या कहा?
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने इसे लोकतंत्र के विरुद्ध बताया और कहा कि अगर लोकतांत्रिक तरीके से शुरू हुए आंदोलन भी सरकार को मंजूर नहीं हैं, तो यह 'डेमोक्रेसी नहीं, डिक्टेटरशिप है'। उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की भी माँग की।
नीट पेपर लीक विवाद क्या है?
नीट पेपर लीक एक बड़ा शिक्षा घोटाला है जिसमें राष्ट्रीय स्तर की मेडिकल प्रवेश परीक्षा के प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले लीक होने के आरोप लगे हैं। इस मामले ने देशभर में छात्रों और अभिभावकों में गहरे आक्रोश को जन्म दिया है और सर्वोच्च न्यायालय भी इस पर सुनवाई कर रहा है।
आदित्य ठाकरे ने इस घटना पर क्या प्रतिक्रिया दी?
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि जिस तरह सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाया गया, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ — यहाँ तक कि ब्रिटिश शासन के दौरान भी नहीं। उन्होंने भाजपा पर देश में सबसे खराब तानाशाही लाने का आरोप लगाया।
विपक्ष शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग क्यों कर रहा है?
विपक्ष का तर्क है कि नीट पेपर लीक जैसी गंभीर परीक्षा प्रणाली की विफलता की नैतिक जवाबदेही शिक्षा मंत्री पर बनती है। सपकाल ने कहा कि जब पेपर लीक होते हैं तो संबंधित मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए, लेकिन सरकार ने अब तक कोई जवाबदेही नहीं ली है।
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