आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री और कापू नेता मुद्रगडा पद्मनाभम का 73 वर्ष की आयु में निधन
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के पूर्व मंत्री, पूर्व सांसद और कापू समुदाय के प्रमुख नेता मुद्रगडा पद्मनाभम का मंगलवार, 14 जुलाई 2026 की शाम हैदराबाद के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे 73 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से आंध्र प्रदेश और तेलंगाना दोनों राज्यों में राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
राजनीतिक जीवन और विरासत
22 जनवरी 1953 को अविभाजित पूर्वी गोदावरी जिले के किर्लामपुडी में जन्मे मुद्रगडा पद्मनाभम ने 1977 में सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। 1978 में उन्होंने जनता पार्टी के टिकट पर प्रथिपाडु विधानसभा सीट से जीत दर्ज की और पहली बार विधायक बने।
जब अभिनेता से नेता बने एनटी रामा राव (NTR) ने 1982 में तेलुगु देशम पार्टी (TDP) की स्थापना की, तो मुद्रगडा उनके साथ जुड़ गए। उन्होंने 1983, 1985 और 1989 में विधायक के रूप में जनता का प्रतिनिधित्व किया और 1985 से 1988 के बीच NTR की कैबिनेट में मंत्री पद संभाला।
पार्टी परिवर्तन और सामाजिक आंदोलन
मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने TDP भी छोड़ दी और प्रजा रक्षा समिति का गठन किया। इसके अलावा उन्होंने तेलुगु नाडु पार्टी की भी स्थापना की। बाद में TDP में वापसी करते हुए वे 1999 में काकीनाडा लोकसभा सीट से सांसद चुने गए।
मुद्रगडा पद्मनाभम कापू समुदाय के लिए पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण की माँग को लेकर चलाए गए आंदोलन के प्रमुख चेहरा रहे। उन्होंने इस माँग के समर्थन में भूख हड़ताल भी की, जिससे उनकी छवि एक समर्पित सामाजिक योद्धा के रूप में स्थापित हुई। 2024 के विधानसभा चुनावों से पहले वे वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) में शामिल हो गए थे।
नेताओं की श्रद्धांजलि
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने दिवंगत नेता के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। पवन कल्याण ने उनके पाँच दशकों के राजनीतिक सफर को याद करते हुए कहा कि उन्होंने चार बार विधानसभा और एक बार लोकसभा में जनता का प्रतिनिधित्व किया।
पूर्व मुख्यमंत्री और YSRCP अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने मुद्रगडा के अचानक निधन पर गहरा दुख और सदमा व्यक्त किया। उन्होंने दिवंगत नेता के पुत्र गिरिबाबू से फोन पर बात कर शोक-संतप्त परिवार को इस कठिन घड़ी में धैर्य बनाए रखने का आग्रह किया। जगन ने कहा कि मुद्रगडा पद्मनाभम की लोक-सेवा के प्रति समर्पित भावना और उनका योगदान एक अमिट विरासत के रूप में सदैव याद रखा जाएगा।
आगे क्या
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में सर्वदलीय नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। कापू समुदाय ने अपना एक प्रमुख आवाज़ खो दी है, और उनके बाद समुदाय के आरक्षण आंदोलन की अगुआई का प्रश्न अब सामने आएगा।