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पद्म श्री मलयालम कवि पी. नारायण कुरुप का 91 वर्ष की आयु में निधन, साहित्य जगत में शोक

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पद्म श्री मलयालम कवि पी. नारायण कुरुप का 91 वर्ष की आयु में निधन, साहित्य जगत में शोक

सारांश

मलयालम साहित्य के बहुआयामी स्तंभ पी. नारायण कुरुप नहीं रहे। 91 वर्ष की आयु में उनके निधन से एक ऐसी आवाज़ खामोश हो गई जो शास्त्रीय परंपरा और समकालीन व्यंग्य को एक साथ साधती थी। पद्म श्री से सम्मानित कुरुप कवि, आलोचक और कला-प्रवर्तक — तीनों एक साथ थे।

मुख्य बातें

नारायण कुरुप का शनिवार रात तिरुवनंतपुरम में 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
वे मलयालम के प्रतिष्ठित कवि, आलोचक, व्यंग्यकार और कथकली व कुडियाट्टम के विद्वान थे।
जनवरी 2022 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया था; इससे पहले केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार और ओडाक्कुझल पुरस्कार भी मिले।
हरिपद में जन्मे कुरुप ने 1956 में केंद्रीय सचिवालय सेवा जॉइन की और बाद में केरल भाषा संस्थान में कार्य किया।
कला संस्थाओं 'तपस्या' और 'मार्गी' के अध्यक्ष रहे; परिवार में पत्नी विजयालक्ष्मी और तीन बच्चे हैं।

मलयालम साहित्य के प्रतिष्ठित स्तंभ, पद्म श्री पी. नारायण कुरुप का शनिवार रात तिरुवनंतपुरम में निधन हो गया। वे 91 वर्ष के थे। कवि, आलोचक, व्यंग्यकार और विद्वान के रूप में उन्होंने मलयालम साहित्य में शास्त्रीय परंपराओं और समकालीन विचारों का अनूठा संगम रचा। उनके जाने से केरल का सांस्कृतिक और साहित्यिक जगत एक अपूरणीय क्षति से दो-चार हुआ है।

साहित्यिक यात्रा और विरासत

हरिपद में जन्मे और पले-बढ़े कुरुप का बचपन संगीत और मंदिर की शास्त्रीय कलाओं से समृद्ध वातावरण में बीता, जिसने उनकी रचनाशीलता की नींव रखी। उन्होंने अपनी पैनी दृष्टि, हाजिरजवाबी और परिष्कृत शैली से मलयालम कविता में एक विशिष्ट स्थान अर्जित किया। उनकी रचनाओं में हास्य और सामाजिक आलोचना का बेजोड़ मिश्रण उन्हें अपने समकालीनों से अलग करता था।

कुरुप ने सामाजिक बुराइयों, अन्याय और पाखंड के विरुद्ध शब्दों को एक सशक्त माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया। उनकी कविताएँ परंपरा और आधुनिकता के बीच एक सेतु का काम करती थीं, और उनमें समाज व संस्कृति के साथ उनका गहरा जुड़ाव स्पष्ट रूप से झलकता था।

शैक्षणिक और व्यावसायिक पृष्ठभूमि

कुरुप ने अपना करियर एक शिक्षक के रूप में शुरू किया और 1956 में केंद्रीय सचिवालय सेवा में शामिल हुए। बाद में उन्होंने केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय तथा केरल भाषा संस्थान में संपादक और शोध अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएँ दीं। दिल्ली में कार्यरत रहते हुए उन्होंने यूनिवर्सिटी कॉलेज, तिरुवनंतपुरम से विज्ञान और शिक्षा में डिग्री प्राप्त करने के बाद अंग्रेज़ी में विशेष योग्यता के साथ स्नातकोत्तर उपाधि हासिल की।

कला और संस्कृति में योगदान

कविता के अतिरिक्त, कुरुप ने व्यंग्य, साहित्यिक आलोचना और यात्रा-वृत्तांत के क्षेत्र में भी महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। वे शास्त्रीय कला रूपों — विशेषकर कथकली और कुडियाट्टम — के गहरे जानकार और विद्वान आलोचक थे। उन्होंने कला और साहित्य को बढ़ावा देने वाली संस्थाओं 'तपस्या' और 'मार्गी' के अध्यक्ष के रूप में इन आंदोलनों का नेतृत्व किया।

पुरस्कार और सम्मान

कुरुप को उनके जीवनकाल में अनेक प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए, जिनमें केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार और ओडाक्कुझल पुरस्कार प्रमुख हैं। जनवरी 2022 में उन्हें भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री से अलंकृत किया गया।

राजनीतिक और सामाजिक श्रद्धांजलि

केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन ने कुरुप को एक ऐसी साहित्यिक विभूति बताया जिन्होंने कविता और आलोचना के माध्यम से मलयालम में अभिव्यक्ति का एक नया आयाम स्थापित किया। विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने कविता, साहित्य, रंगमंच, संगीत और दर्शन में उनके बहुआयामी योगदान को याद किया। कुरुप के परिवार में उनकी पत्नी विजयालक्ष्मी और तीन बच्चे — डॉ. वृंदा जयकुमार, विजू नारायण और विवेक नारायण — हैं। मलयालम साहित्य में उनके द्वारा छोड़ी गई विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

कुरुप जैसे बहुआयामी विद्वान की अनुपस्थिति और गहरी महसूस होगी। उनकी विरासत का असली सम्मान यह होगा कि 'तपस्या' और 'मार्गी' जैसी संस्थाएँ उनके बिना भी उतनी ही सक्रिय रहें।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पी. नारायण कुरुप कौन थे?
पी. नारायण कुरुप मलयालम के प्रतिष्ठित कवि, आलोचक, व्यंग्यकार और विद्वान थे, जिन्हें जनवरी 2022 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। उन्होंने शास्त्रीय परंपराओं और समकालीन विचारों को अपनी रचनाओं में एकसाथ पिरोया।
पी. नारायण कुरुप का निधन कब और कहाँ हुआ?
उनका निधन शनिवार रात तिरुवनंतपुरम में हुआ। वे 91 वर्ष के थे।
पी. नारायण कुरुप को कौन-कौन से पुरस्कार मिले थे?
उन्हें केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार, ओडाक्कुझल पुरस्कार और जनवरी 2022 में भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री से नवाज़ा गया था।
पी. नारायण कुरुप का मलयालम साहित्य में क्या योगदान था?
उन्होंने कविता, व्यंग्य, साहित्यिक आलोचना और यात्रा-वृत्तांत के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। वे कथकली और कुडियाट्टम के विद्वान आलोचक भी थे और 'तपस्या' तथा 'मार्गी' जैसी कला-साहित्य संस्थाओं के अध्यक्ष रहे।
पी. नारायण कुरुप के परिवार में कौन हैं?
उनके परिवार में पत्नी विजयालक्ष्मी और तीन बच्चे — डॉ. वृंदा जयकुमार, विजू नारायण और विवेक नारायण — हैं।
राष्ट्र प्रेस
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