झारखंड में सूखे की आशंका: 20 और 22 मई को जिला-प्रखंड स्तर पर खरीफ मेला, कृषि मंत्री ने दिए कंटीजेंसी प्लान के निर्देश

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झारखंड में सूखे की आशंका: 20 और 22 मई को जिला-प्रखंड स्तर पर खरीफ मेला, कृषि मंत्री ने दिए कंटीजेंसी प्लान के निर्देश

सारांश

कमज़ोर मानसून की चेतावनी मिलते ही झारखंड सरकार ने किसानों के लिए दो-स्तरीय खरीफ मेले, कम जल-खपत वाली फसलों की रणनीति और फसल राहत योजना की तैयारी एक साथ शुरू कर दी है — यह राज्य की अब तक की सबसे अग्रिम कृषि आपदा तैयारी मानी जा रही है।

मुख्य बातें

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार झारखंड में इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा और सूखे जैसी स्थिति की आशंका।
20 मई को जिला स्तर पर ( 500 प्रगतिशील किसान ) और 22 मई को प्रखंड स्तर पर (हर पंचायत से 50 किसान ) खरीफ मेला।
कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने सभी जिला कृषि पदाधिकारियों को कंटीजेंसी प्लान तैयार करने का निर्देश दिया।
ऊंची जमीन पर मक्का, रागी, उड़द, मूंग, अरहर और सोयाबीन जैसी कम जल-खपत वाली फसलों को बढ़ावा।
तालाबों का जीर्णोद्धार मई के अंत तक पूरा करने और सोलर पंप व ड्रिप इरीगेशन की निविदा प्रक्रिया जल्द पूरी करने का आदेश।
झारखंड राज्य फसल राहत योजना के तहत रैयत और भूमिहीन किसानों को फसल नुकसान की भरपाई की तैयारी।

झारखंड सरकार ने इस वर्ष कमज़ोर मानसून और संभावित सूखे की आशंका के मद्देनज़र 17 मई 2025 को अलर्ट मोड अपना लिया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार राज्य में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है, जिसके बाद कृषि विभाग ने जिलावार आकस्मिक कार्ययोजना तैयार करने की प्रक्रिया तेज़ कर दी है। किसानों को समय पर बीज, सिंचाई सुविधा और वैकल्पिक खेती का मार्गदर्शन देने के लिए 20 मई को सभी जिलों में और 22 मई को प्रखंड स्तर पर खरीफ मेले का आयोजन किया जाएगा।

मंत्री का निर्देश और रणनीति

कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए सरकार पहले से तैयारी कर रही है ताकि किसानों को नुकसान कम से कम हो। उन्होंने सभी जिला कृषि पदाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में कंटीजेंसी प्लान तैयार करने का निर्देश दिया। मंत्री ने अधिकारियों से 'सेना की तरह' काम करने को कहा और जिला कृषि पदाधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाकर सभी कृषि इकाइयों को समन्वय के साथ काम करने का आदेश दिया।

कम पानी वाली फसलों पर ज़ोर

सरकार ने ऊंची जमीन वाले इलाकों में मक्का, रागी, उड़द, मूंग, अरहर और सोयाबीन जैसी कम जल-खपत वाली फसलों की खेती को बढ़ावा देने की रणनीति तैयार की है। साथ ही कम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्मों के बीज उपलब्ध कराने की भी तैयारी की जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड के कई जिले पहले से ही अनियमित वर्षा की समस्या से जूझते रहे हैं।

खरीफ मेले का स्वरूप

20 मई को जिला स्तर पर आयोजित होने वाले खरीफ मेले में 500 प्रगतिशील किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा गया है। वहीं 22 मई को प्रखंड स्तर पर होने वाले मेले में हर पंचायत से 50 किसानों की भागीदारी होगी। इन मेलों में मृदा जांच, बीज वितरण, सिंचाई तकनीक और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।

सिंचाई और बुनियादी ढाँचे की तैयारी

कृषि मंत्री ने निर्देश दिया है कि मई के अंत तक राज्य के तालाबों के जीर्णोद्धार का कार्य हर हाल में पूरा हो जाना चाहिए। इसके अलावा सोलर पंप, ड्रिप इरीगेशन और पशुओं की दवाओं के समय पर वितरण के लिए निविदा प्रक्रिया जल्द पूरी करने का भी आदेश दिया गया है।

फसल राहत योजना की तैयारी

सरकार झारखंड राज्य फसल राहत योजना के माध्यम से रैयत और भूमिहीन — दोनों तरह के किसानों को फसल नुकसान की भरपाई के लिए तैयार है। गौरतलब है कि यह योजना उन किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच है जिनके पास सिंचाई के पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। आने वाले हफ्तों में मानसून की दिशा और वास्तविक वर्षा के आंकड़े यह तय करेंगे कि राज्य सरकार की यह अग्रिम तैयारी कितनी कारगर साबित होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — राज्य में पिछले कई वर्षों में सूखा-राहत की घोषणाएं और ज़मीनी वितरण के बीच की खाई चिंताजनक रही है। खरीफ मेले में बीज और सिंचाई तकनीक की जानकारी देना एक सकारात्मक कदम है, पर यह तभी प्रभावी होगा जब आपूर्ति श्रृंखला समय पर काम करे। झारखंड राज्य फसल राहत योजना का दायरा भूमिहीन किसानों तक बढ़ाना नीतिगत रूप से सही दिशा है, लेकिन पंजीकरण और दावा-निपटान की प्रक्रिया में पारदर्शिता के बिना यह लाभ वंचित तबके तक पहुंचना मुश्किल होगा।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में खरीफ मेला कब और कहाँ आयोजित होगा?
20 मई को सभी जिलों में और 22 मई को प्रखंड स्तर पर खरीफ मेला आयोजित किया जाएगा। जिला स्तर के मेले में 500 प्रगतिशील किसान और प्रखंड स्तर के मेले में हर पंचायत से 50 किसान भाग लेंगे।
झारखंड सरकार सूखे की आशंका से निपटने के लिए क्या कर रही है?
सरकार ने जिलावार कंटीजेंसी प्लान तैयार करने, कम जल-खपत वाली फसलों को बढ़ावा देने, तालाबों के जीर्णोद्धार और सोलर पंप व ड्रिप इरीगेशन की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। झारखंड राज्य फसल राहत योजना के तहत किसानों को नुकसान की भरपाई की भी तैयारी है।
कम बारिश की स्थिति में झारखंड के किसान कौन-सी फसलें उगाएं?
कृषि विभाग ने ऊंची जमीन वाले इलाकों में मक्का, रागी, उड़द, मूंग, अरहर और सोयाबीन उगाने की सलाह दी है। कम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्मों के बीज भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
झारखंड राज्य फसल राहत योजना क्या है और इससे कौन लाभान्वित होगा?
यह राज्य सरकार की एक फसल बीमा-सह-राहत योजना है जिसके तहत फसल नुकसान होने पर किसानों को मुआवज़ा दिया जाता है। इस योजना का लाभ रैयत (भूमि-स्वामी) और भूमिहीन — दोनों तरह के किसानों को मिलेगा।
खरीफ मेले में किसानों को क्या जानकारी और सुविधाएं मिलेंगी?
खरीफ मेले में मृदा जांच, बीज वितरण, सिंचाई तकनीक और विभिन्न सरकारी कृषि योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य किसानों को सूखे की स्थिति में वैकल्पिक खेती के लिए तैयार करना है।
राष्ट्र प्रेस
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