झारखंड में सूखे की आशंका: 20 और 22 मई को जिला-प्रखंड स्तर पर खरीफ मेला, कृषि मंत्री ने दिए कंटीजेंसी प्लान के निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड सरकार ने इस वर्ष कमज़ोर मानसून और संभावित सूखे की आशंका के मद्देनज़र 17 मई 2025 को अलर्ट मोड अपना लिया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार राज्य में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है, जिसके बाद कृषि विभाग ने जिलावार आकस्मिक कार्ययोजना तैयार करने की प्रक्रिया तेज़ कर दी है। किसानों को समय पर बीज, सिंचाई सुविधा और वैकल्पिक खेती का मार्गदर्शन देने के लिए 20 मई को सभी जिलों में और 22 मई को प्रखंड स्तर पर खरीफ मेले का आयोजन किया जाएगा।
मंत्री का निर्देश और रणनीति
कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए सरकार पहले से तैयारी कर रही है ताकि किसानों को नुकसान कम से कम हो। उन्होंने सभी जिला कृषि पदाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में कंटीजेंसी प्लान तैयार करने का निर्देश दिया। मंत्री ने अधिकारियों से 'सेना की तरह' काम करने को कहा और जिला कृषि पदाधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाकर सभी कृषि इकाइयों को समन्वय के साथ काम करने का आदेश दिया।
कम पानी वाली फसलों पर ज़ोर
सरकार ने ऊंची जमीन वाले इलाकों में मक्का, रागी, उड़द, मूंग, अरहर और सोयाबीन जैसी कम जल-खपत वाली फसलों की खेती को बढ़ावा देने की रणनीति तैयार की है। साथ ही कम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्मों के बीज उपलब्ध कराने की भी तैयारी की जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड के कई जिले पहले से ही अनियमित वर्षा की समस्या से जूझते रहे हैं।
खरीफ मेले का स्वरूप
20 मई को जिला स्तर पर आयोजित होने वाले खरीफ मेले में 500 प्रगतिशील किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा गया है। वहीं 22 मई को प्रखंड स्तर पर होने वाले मेले में हर पंचायत से 50 किसानों की भागीदारी होगी। इन मेलों में मृदा जांच, बीज वितरण, सिंचाई तकनीक और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।
सिंचाई और बुनियादी ढाँचे की तैयारी
कृषि मंत्री ने निर्देश दिया है कि मई के अंत तक राज्य के तालाबों के जीर्णोद्धार का कार्य हर हाल में पूरा हो जाना चाहिए। इसके अलावा सोलर पंप, ड्रिप इरीगेशन और पशुओं की दवाओं के समय पर वितरण के लिए निविदा प्रक्रिया जल्द पूरी करने का भी आदेश दिया गया है।
फसल राहत योजना की तैयारी
सरकार झारखंड राज्य फसल राहत योजना के माध्यम से रैयत और भूमिहीन — दोनों तरह के किसानों को फसल नुकसान की भरपाई के लिए तैयार है। गौरतलब है कि यह योजना उन किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच है जिनके पास सिंचाई के पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। आने वाले हफ्तों में मानसून की दिशा और वास्तविक वर्षा के आंकड़े यह तय करेंगे कि राज्य सरकार की यह अग्रिम तैयारी कितनी कारगर साबित होती है।