झारखंड में सड़क हादसे पर मुआवजा ₹4 लाख: हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आपदा प्रबंधन के बड़े फैसले
सारांश
Key Takeaways
- सड़क दुर्घटना मुआवजा ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹4 लाख किया गया — चार गुना वृद्धि।
- जिला आपदा प्रबंधन पदाधिकारियों की सेवा अवधि वित्तीय वर्ष 2026-27 तक बढ़ाई गई।
- अनुग्रह अनुदान के लिए अब गृह जिले के उपायुक्त द्वारा सत्यापन अनिवार्य; दोहरा भुगतान बंद।
- युवा आपदा मित्र स्कीम को इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम से जोड़ा जाएगा; SOP और भत्ते का प्रस्ताव आएगा।
- संप्रति-48 के तहत गोताखोर प्रशिक्षण को मंजूरी; पुलिस जवानों, गृहरक्षकों और महिलाओं को शामिल करने के निर्देश।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में 28 अप्रैल 2026 को झारखंड मंत्रालय, रांची में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार की समीक्षा बैठक संपन्न हुई, जिसमें आपदा प्रबंधन से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। सबसे बड़ा निर्णय यह रहा कि सड़क दुर्घटनाओं में मृतकों के आश्रितों को मिलने वाली सहायता राशि को ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹4 लाख कर दिया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
बैठक में 'अदर डिजास्टर मैनेजमेंट प्रोग्राम' के तहत जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकार में कार्यरत क्षमता संवर्धन पदाधिकारियों और जिला आपदा प्रबंधन पदाधिकारियों की सेवा अवधि वित्तीय वर्ष 2026-27 तक बढ़ाने को मंजूरी दी गई। यह निर्णय राज्य की आपदा प्रबंधन क्षमता को निरंतर बनाए रखने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकार ने विभिन्न स्थानीय आपदाओं में मृत व्यक्तियों के आश्रितों को मिलने वाले अनुग्रह अनुदान की प्रक्रिया को सरल बनाने का भी निर्णय लिया। अब संबंधित गृह जिले के उपायुक्त द्वारा घटना का सत्यापन कर अनुग्रह राशि प्रदान की जाएगी। दोहरे भुगतान को रोकने के लिए यह भी तय किया गया कि बीमित व्यक्ति या तो आपदा प्रबंधन के तहत अनुग्रह राशि लेगा या राज्य/केंद्र सरकार की बीमा योजना का लाभ उठाएगा — दोनों एक साथ नहीं।
युवा आपदा मित्र स्कीम को मजबूत करने का निर्देश
बैठक में 'युवा आपदा मित्र स्कीम' को और प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया गया। यह योजना फिलहाल दुमका, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज जिलों में संचालित है। स्वयंसेवकों का डेटाबेस तैयार कर उसे इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम से जोड़ने का फैसला किया गया। मुख्यमंत्री ने इसके लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने और स्वयंसेवकों को भत्ता देने का प्रस्ताव लाने के निर्देश दिए।
गोताखोरों की संख्या बढ़ाने पर बल
राज्य में पानी में डूबने से होने वाली मृत्यु की संख्या को ध्यान में रखते हुए संप्रति-48 के तहत गोताखोरों को चिन्हित कर प्रशिक्षण दिलाने के प्रस्ताव पर घटनोत्तर स्वीकृति दी गई। मुख्यमंत्री सोरेन ने गोताखोरों की संख्या बढ़ाने पर बल देते हुए पुलिस जवानों, गृहरक्षकों और महिलाओं को भी इस कार्यक्रम में शामिल किए जाने की कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए। गौरतलब है कि झारखंड में नदियों, तालाबों और जलाशयों की अधिकता के कारण डूबने की घटनाएँ एक बड़ी चुनौती रही हैं।
बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद
इस महत्वपूर्ण बैठक में आपदा प्रबंधन मंत्री इरफान अंसारी, मुख्य सचिव अविनाश कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में मानसून पूर्व तैयारियों को लेकर प्रशासनिक सक्रियता बढ़ी है।
आगे क्या होगा
सरकार के इन फैसलों का असर झारखंड के उन लाखों परिवारों पर पड़ेगा जो आपदाओं की स्थिति में सरकारी सहायता पर निर्भर रहते हैं। सड़क दुर्घटना मुआवजे में चार गुना वृद्धि पीड़ित परिवारों को तत्काल राहत देने की दिशा में एक ठोस कदम है। आने वाले हफ्तों में युवा आपदा मित्र स्कीम की SOP और गोताखोर प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा सामने आने की उम्मीद है।