USS जेराल्ड आर फोर्ड 326 दिनों बाद स्वदेश लौटा, वियतनाम युद्ध के बाद अमेरिका की सबसे लंबी तैनाती
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विमानवाहक पोत USS जेराल्ड आर फोर्ड 326 दिनों — यानी करीब 11 महीनों — की ऐतिहासिक तैनाती के बाद शनिवार, 17 मई को वर्जीनिया के नॉरफॉक बंदरगाह पर लौट आया। पेंटागन के अनुसार, यह वियतनाम युद्ध के बाद किसी अमेरिकी विमानवाहक पोत स्ट्राइक ग्रुप की सबसे लंबी एकल तैनाती है। इस पोत पर करीब 5,000 नाविक और चालक दल के सदस्य सवार थे।
स्वागत में उपस्थित रहे रक्षा मंत्री
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ नॉरफॉक में पोत के स्वागत के लिए स्वयं मौजूद रहे। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर नाविकों की भावुक स्वदेश वापसी की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि इस पोत ने जो काम किया, वह 'अद्भुत और असाधारण' रहा। मीडिया से बातचीत में भी उन्होंने चालक दल की सराहना की।
तैनाती का मार्ग और मिशन
पेंटागन के अनुसार, पोत जून 2025 में वर्जीनिया से रवाना हुआ था। पहले यह अटलांटिक महासागर होते हुए भूमध्य सागर और नॉर्वे पहुँचा। जनवरी 2026 में इसे कैरेबियन क्षेत्र में भेजा गया, जहाँ अमेरिकी बलों ने कथित ड्रग-तस्करी नौकाओं पर कार्रवाई की, प्रतिबंधित टैंकरों को रोका और वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को पकड़ने के अभियान में हिस्सा लिया। इसके बाद इसे मध्य पूर्व में ईरान के विरुद्ध सैन्य अभियानों के लिए तैनात किया गया।
तैनाती के दौरान चुनौतियाँ
11 महीनों की इस तैनाती में पोत को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। मार्च 2026 में ईरान संघर्ष के दौरान जहाज के लॉन्ड्री क्षेत्र में आग लग गई, जिसे बुझाने में करीब 30 घंटे लगे। इसके अलावा टॉयलेट प्रणाली में खराबी और अन्य तकनीकी समस्याएँ भी सामने आई थीं। इन परिस्थितियों के बावजूद चालक दल ने मिशन जारी रखा।
ऐतिहासिक संदर्भ
आमतौर पर अमेरिकी विमानवाहक पोतों की तैनाती 6 से 9 महीने के बीच होती है। इस बार 326 दिनों की तैनाती ने वियतनाम युद्ध के बाद का रिकॉर्ड तोड़ दिया। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है और अमेरिका ने अपनी नौसैनिक उपस्थिति को कई मोर्चों पर एक साथ बनाए रखा। गौरतलब है कि USS जेराल्ड आर फोर्ड दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत है।
आगे की स्थिति
नॉरफॉक लौटने के बाद पोत और उसके चालक दल को रखरखाव और विश्राम की अवधि से गुज़रना होगा। इतनी लंबी तैनाती के बाद तकनीकी मरम्मत और दल के पुनर्गठन पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है।