आंध्र प्रदेश में भीषण गर्मी: CM चंद्रबाबू नायडू ने प्रभावित क्षेत्रों में छुट्टियों का आदेश दिया, तापमान 48°C पार
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने शुक्रवार, 22 मई को स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया कि भीषण गर्मी की चपेट में आए क्षेत्रों में मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर तत्काल अवकाश घोषित किया जाए। राज्य में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच चुका है, जो पिछले तीन दिनों में 45°C से बढ़कर इस स्तर पर आया है।
गर्मी की स्थिति और अल नीनो का असर
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि गंभीर अल नीनो परिस्थितियों के कारण इस वर्ष लू की तीव्रता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। तुलना के लिए अधिकारियों ने बताया कि 2015 के भीषण अल नीनो वर्ष में राज्य में अधिकतम तापमान 50.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। इस वर्ष समान परिस्थितियों में तापमान 48°C तक पहुँच गया है, जो स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करता है।
यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्सों में मानसून-पूर्व गर्मी का प्रकोप असामान्य रूप से तीखा बना हुआ है। गौरतलब है कि अन्नामय्या जिले में अन्य जिलों की तुलना में अपेक्षाकृत कम तापमान दर्ज किया गया है, जिसे मुख्यमंत्री ने हरित आवरण और बेहतर भूजल स्तर से जोड़ा।
मुख्यमंत्री के निर्देश और राहत उपाय
मुख्यमंत्री नायडू ने जिला कलेक्टरों को सर्वाधिक तापमान वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहाँ के निवासियों को लगातार चेतावनी और सलाह जारी करने का निर्देश दिया। उन्होंने भीड़भाड़ वाले स्थानों और सार्वजनिक सभा स्थलों पर पीने का पानी, छाछ और ओआरएस के पैकेट उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
अधिकारियों ने बताया कि शहरी क्षेत्रों में 1,349 ताप आश्रय और शीतलन केंद्र स्थापित किए गए हैं, जबकि 446 यातायात चौराहों पर वाहन चालकों और पुलिस कर्मियों को छाया उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
संवेदनशील वर्गों के लिए विशेष सलाह
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, बच्चों और स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त लोगों को सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच घर से बाहर न निकलने की सलाह दी जाती है। उन्होंने कहा कि लोगों की जान बचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने गर्मी से पीड़ित जानवरों और पक्षियों के लिए पानी के कुंड और मिट्टी के बर्तन उपलब्ध कराने का भी सुझाव दिया — एक कदम जो पर्यावरणीय संवेदनशीलता को दर्शाता है।
पेयजल आपूर्ति और दीर्घकालिक उपाय
मुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टरों और मंडल स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिया कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पीने के पानी की कमी न होने दी जाए और जहाँ आवश्यक हो, टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए। दीर्घकालिक दृष्टिकोण से उन्होंने राज्य में हरित आवरण बढ़ाने और भूजल स्तर सुधारने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि भविष्य में अत्यधिक तापमान के प्रभाव को कम किया जा सके।
मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से लू से बचाव के उपायों की जानकारी लगातार प्रसारित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। आने वाले दिनों में तापमान में और बदलाव की संभावना को देखते हुए प्रशासन को आपातकालीन स्थितियों के लिए पूरी तरह तैयार रहने को कहा गया है।