चित्याला में सीजन का सर्वोच्च तापमान 48.3°C, आंध्र प्रदेश के 13 जिलों में 45°C से ऊपर पारा
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के चित्याला में 24 मई 2026 (रविवार) को इस सीजन का सर्वाधिक तापमान 48.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। झुलसाती धूप और तेज़ लू ने राज्य के व्यापक हिस्सों में जनजीवन को बुरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) के आँकड़ों के अनुसार, 13 जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया।
मुख्य घटनाक्रम
पश्चिम गोदावरी जिले के तनुकु और पलनाडु जिले के पिडुगुरल्ला में भी तापमान 48.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया। एसडीएमए के आँकड़ों के अनुसार, 17 जिलों के 174 मंडलों में पारा 44 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा।
सर्वाधिक प्रभावित एलुरु जिले के 23 मंडल रहे। इसके बाद पूर्वी गोदावरी के 21, पश्चिम गोदावरी के 17, कृष्णा के 16, बापटला के 15, एनटीआर जिले के 14, पलनाडु के 13, कोनसीमा के 12 और काकीनाडा के 11 मंडल भीषण गर्मी की चपेट में रहे।
सरकार की प्रतिक्रिया और एसडीएमए की सलाह
एसडीएमए के प्रबंध निदेशक प्रखर जैन ने नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि अगले तीन दिनों तक इसी तरह की भीषण गर्मी बने रहने की आशंका है। जैन ने लोगों को सलाह दी कि सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच यात्रा से बचें और बाहर निकलने पर पर्याप्त पेयजल साथ रखें।
आगामी दिनों का हीटवेव पूर्वानुमान
मौसम विभाग के अनुसार, 25 मई (सोमवार) को राज्य के 29 मंडलों में गंभीर हीटवेव और 166 मंडलों में सामान्य हीटवेव की स्थिति रहने की संभावना है। मंगलवार को यह स्थिति और विकट हो सकती है — 50 मंडलों में गंभीर तथा 205 मंडलों में सामान्य हीटवेव का असर रहने का अनुमान है।
कोनसीमा, पूर्वी गोदावरी, पश्चिम गोदावरी, पोलावरम, एलुरु, एनटीआर, कृष्णा, गुंटूर, बापटला, पलनाडु और प्रकाशम जिलों में तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान जताया गया है।
तेलंगाना में भी भीषण गर्मी का कहर
पड़ोसी राज्य तेलंगाना भी इस हीटवेव की चपेट में है। राज्य के 33 में से 16 जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक दर्ज किया गया। भद्राद्री कोठागुडेम जिले के दुम्मुगुडेम और जगतियाल जिले के धर्मपुरी में सर्वाधिक 46.3 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड हुआ। हैदराबाद में अधिकतम तापमान 42.1 डिग्री सेल्सियस रहा।
यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारत में मानसून-पूर्व की गर्मी हर साल अधिक तीव्र होती जा रही है। विशेषज्ञ इसे जलवायु परिवर्तन के व्यापक पैटर्न से जोड़ते हैं। आने वाले दिनों में राहत की उम्मीद मौसम विभाग के पूर्वानुमानों पर टिकी है।