11 अगस्त 2026
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अल नीनो से महंगाई न बढ़े: CM चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश, कमिटी गठन का सुझाव

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अल नीनो से महंगाई न बढ़े: CM चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश, कमिटी गठन का सुझाव

सारांश

अल नीनो के कारण वर्षा की कमी और जलाशयों के अधूरे भराव के बीच CM नायडू ने महंगाई रोकने के लिए कमिटी गठन का सुझाव दिया। इसके बावजूद आंध्र प्रदेश ने 2025-26 की दूसरी तिमाही में 10.7% विकास दर दर्ज की — राष्ट्रीय औसत से ऊपर।

मुख्य बातें

चंद्रबाबू नायडू ने 11 अगस्त 2026 को अधिकारियों को निर्देश दिया कि अल नीनो संकट से आम जनता पर कीमतों का अतिरिक्त बोझ न पड़े।
मुद्दे की जाँच के लिए एक विशेष कमिटी गठित करने का सुझाव दिया गया; आकस्मिक योजना बनाने के निर्देश भी दिए गए।
कृष्णा नदी में पानी की कमी से श्रीशैलम और नागार्जुन सागर जलाशय अब तक नहीं भरे; गोदावरी का बाढ़ जल डाइवर्ट किया गया।
आंध्र प्रदेश ने 2025-26 की दूसरी तिमाही में 10.7% विकास दर दर्ज की; GSDP वृद्धि 2023-24 के 6.5% से बढ़कर 9.9% हुई।
जीएसटी संग्रह 21% बढ़कर ₹13,282 करोड़ ; निर्यात 10.5% बढ़कर ₹16,322 करोड़ पहुँचा।
₹2.88 लाख करोड़ की मेगा परियोजनाओं में 75.4% और ₹60,000 करोड़ के MSME निवेश में 73.6% की वृद्धि।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को अमरावती स्थित कैंप ऑफिस में स्पष्ट निर्देश दिए कि अल नीनो संकट के कारण आम जनता पर कीमतों का कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे की गहन जाँच के लिए एक विशेष कमिटी गठित करने का सुझाव भी दिया।

बैठक का संदर्भ और पृष्ठभूमि

यह निर्देश तब सामने आए जब प्लानिंग डिपार्टमेंट के वरिष्ठ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को जुलाई 2026 की मासिक आर्थिक रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में अल नीनो के प्रभाव से राज्य में वर्षा की कमी और जलाशयों के अपर्याप्त भराव की चिंताजनक स्थिति का उल्लेख किया गया था।

नायडू ने कहा कि कृष्णा नदी में पानी की आवक घटने के कारण श्रीशैलम और नागार्जुन सागर जैसी प्रमुख परियोजनाओं के जलाशय अब तक पूरे नहीं भर पाए हैं। राज्य ने कृष्णा डेल्टा को पानी की आपूर्ति बनाए रखने के लिए गोदावरी के बाढ़ के पानी को डाइवर्ट करने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री के प्रमुख निर्देश

नायडू ने प्लानिंग डिपार्टमेंट को पानी की उपलब्धता, कृषि एवं अन्य उत्पादों में वैल्यू एडिशन को ध्यान में रखते हुए एक व्यापक आकस्मिक योजना (कंटिंजेंसी प्लान) तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने जोर दिया कि भूजल स्तर में गिरावट को देखते हुए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय अनिवार्य है ताकि आर्थिक उत्पादन पर विपरीत असर न पड़े।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से राज्य के 15 प्रतिशत वार्षिक विकास दर के लक्ष्य को बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में निर्यात को प्रभावित न होने देने की हिदायत दी। उन्होंने जिला, निर्वाचन क्षेत्र और मंडल स्तर पर रिपोर्टिंग की व्यवस्था करने को कहा ताकि प्रगति की निगरानी अधिक प्रभावी हो सके।

आर्थिक रिपोर्ट: प्रमुख आँकड़े

मासिक आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार, अल नीनो के प्रतिकूल प्रभाव के बावजूद आंध्र प्रदेश ने 2025-26 की दूसरी तिमाही में 10.7 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की। राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) विकास दर 2023-24 के 6.5 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 9.9 प्रतिशत हो गई है, और पिछले दो वर्षों से यह राष्ट्रीय औसत से अधिक बनी हुई है।

क्षेत्रवार आँकड़ों की बात करें तो कृषि क्षेत्र में 13.5 प्रतिशत, औद्योगिक क्षेत्र में 10.6 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र में 9.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। पशुपालन में मांस उत्पादन 9.6 प्रतिशत और अंडा उत्पादन 5.1 प्रतिशत बढ़ा।

निर्यात के मोर्चे पर, सामान्य निर्यात 10.5 प्रतिशत बढ़कर ₹16,322 करोड़ तक पहुँचा। प्रौद्योगिकी एकीकरण की बदौलत जीएसटी संग्रह में 21 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई और यह ₹13,282 करोड़ तक पहुँचा।

निवेश प्रवाह और मेगा परियोजनाएँ

राज्य में निवेश का परिदृश्य भी उत्साहजनक रहा। ₹2.88 लाख करोड़ मूल्य की मेगा परियोजनाओं के क्रियान्वयन में 75.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि ₹60,000 करोड़ के MSME निवेश में 73.6 प्रतिशत की बढ़त देखी गई। कर और गैर-कर राजस्व में भी सुधार आया है।

आगे की राह

नायडू ने सभी सरकारी विभागों को मापने योग्य मानकों के आधार पर काम करने और प्रभावी संसाधन प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की हर योजना राज्य की विकास दर को गति देने में ठोस योगदान देने वाली होनी चाहिए। अल नीनो के दीर्घकालिक प्रभावों को देखते हुए, राज्य की आकस्मिक योजना और कमिटी की सिफारिशें आने वाले महीनों में नीति-निर्माण की दिशा तय करेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा कमिटी की समयसीमा और उसकी सिफारिशों के क्रियान्वयन में होगी — जिसका अभी कोई ब्यौरा सामने नहीं आया है। गौरतलब है कि राज्य की 10.7% विकास दर प्रभावशाली है, परंतु अल नीनो का असर कृषि पर अगली तिमाही में अधिक गहरा हो सकता है, जबकि कृषि क्षेत्र ही ग्रामीण महंगाई का सबसे बड़ा निर्धारक है। श्रीशैलम और नागार्जुन सागर के अधूरे जलाशय रबी सीजन की सिंचाई के लिए खतरे की घंटी हैं। 15% विकास दर का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, और बिना जल-प्रबंधन की ठोस रणनीति के यह लक्ष्य दबाव में आ सकता है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CM नायडू ने अल नीनो को लेकर अधिकारियों को क्या निर्देश दिए?
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 11 अगस्त 2026 को अधिकारियों को निर्देश दिया कि अल नीनो संकट के कारण आम जनता पर कीमतों का कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े। उन्होंने इस मुद्दे की जाँच के लिए एक कमिटी बनाने का सुझाव दिया और पानी की उपलब्धता व वैल्यू एडिशन को ध्यान में रखते हुए आकस्मिक योजना तैयार करने को कहा।
अल नीनो का आंध्र प्रदेश की जल आपूर्ति पर क्या असर पड़ा है?
अल नीनो के कारण राज्य में वर्षा कम हुई है, जिससे कृष्णा नदी में पानी की आवक घट गई है। इसके परिणामस्वरूप श्रीशैलम और नागार्जुन सागर जलाशय अब तक पूरी तरह नहीं भर पाए हैं। कृष्णा डेल्टा को पानी देने के लिए राज्य ने गोदावरी के बाढ़ जल को डाइवर्ट किया है।
अल नीनो के बावजूद आंध्र प्रदेश की आर्थिक स्थिति कैसी है?
जुलाई 2026 की मासिक आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार, आंध्र प्रदेश ने 2025-26 की दूसरी तिमाही में 10.7% की विकास दर दर्ज की। राज्य का GSDP 2023-24 के 6.5% से बढ़कर 2025-26 में 9.9% हो गया है, और पिछले दो वर्षों से यह राष्ट्रीय विकास दर से अधिक बना हुआ है।
आंध्र प्रदेश में जीएसटी संग्रह और निर्यात के आँकड़े क्या हैं?
रिपोर्ट के अनुसार प्रौद्योगिकी एकीकरण की वजह से जीएसटी संग्रह 21% बढ़कर ₹13,282 करोड़ पहुँचा। सामान्य निर्यात 10.5% बढ़कर ₹16,322 करोड़ तक पहुँचा। ₹2.88 लाख करोड़ की मेगा परियोजनाओं में 75.4% और ₹60,000 करोड़ के MSME निवेश में 73.6% की वृद्धि दर्ज की गई।
CM नायडू ने राज्य की विकास दर के लिए क्या लक्ष्य रखा है?
मुख्यमंत्री नायडू ने अधिकारियों को राज्य की 15% वार्षिक विकास दर के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जिला, निर्वाचन क्षेत्र और मंडल स्तर पर रिपोर्टिंग की व्यवस्था करने और मापने योग्य मानकों के आधार पर काम करने पर जोर दिया।
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