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ज्ञानेश कुमार के रहते निष्पक्ष चुनाव असंभव: सपा नेता फखरुल हसन चांद, सांसद अवधेश प्रसाद का भी हमला

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ज्ञानेश कुमार के रहते निष्पक्ष चुनाव असंभव: सपा नेता फखरुल हसन चांद, सांसद अवधेश प्रसाद का भी हमला

सारांश

सपा नेता फखरुल हसन चांद का सीधा आरोप — ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति भाजपा की मर्जी की है, इसलिए उनसे निष्पक्षता की उम्मीद बेमानी है। बंगाल में वोटर नामों की बड़े पैमाने पर कटौती से लेकर 18,000 से अधिक एफिडेविट की अनदेखी तक — सपा ने SIR प्रक्रिया और पूरे चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं।

मुख्य बातें

सपा नेता फखरुल हसन चांद ने 27 सितंबर 2026 को कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के रहते निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं।
सपा की माँग — सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार प्रकरण पर स्वतः संज्ञान ले; नियुक्ति की पूर्व न्यायिक व्यवस्था बहाल हो।
सपा ने SIR प्रक्रिया के तहत बंगाल में बड़े पैमाने पर मतदाता नाम काटे जाने और 18,000 से अधिक एफिडेविट की अनदेखी का आरोप लगाया।
अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि भाजपा और चुनाव आयोग 'एक-दूसरे के सहयोगी' बन गए हैं, यह लोकतंत्र के लिए खतरा है।
राम मंदिर चढ़ावा मामले में सपा ने सुप्रीम कोर्ट की एसआईटी रिपोर्ट आने तक पुलिस चार्जशीट पर टिप्पणी से इनकार किया।

समाजवादी पार्टी के नेता फखरुल हसन चांद ने 27 सितंबर 2026 को लखनऊ में स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पद पर रहते हुए देश में निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने संवैधानिक संस्थाओं को लगातार कमज़ोर करने का प्रयास किया है और सुप्रीम कोर्ट को चुनाव आयोग के मामले में स्वतः संज्ञान लेना चाहिए।

मुख्य आरोप और बयान

फखरुल हसन चांद ने कहा कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले भी यह माँग उठा चुके हैं कि सर्वोच्च न्यायालय ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के पूरे प्रकरण पर स्वतः संज्ञान ले। उनका तर्क है कि ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति भाजपा सरकार की इच्छा से हुई है, इसलिए उनसे निष्पक्षता की अपेक्षा रखना उचित नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट का जो पूर्व निर्णय था, भाजपा ने उसे पलट दिया, जबकि वही व्यवस्था लागू होनी चाहिए थी।

एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल

चांद ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि बंगाल का मामला बेहद चौंकाने वाला है, जहाँ बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटे गए और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही उन्हें वापस जोड़ा गया। उनके अनुसार समाजवादी पार्टी ने चुनाव आयोग के समक्ष 18,000 से अधिक एफिडेविट दाखिल किए थे, परंतु उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। सपा का स्पष्ट मत है कि SIR की पूरी प्रक्रिया बंद होनी चाहिए।

चुनाव आयोग की बैठक पर प्रतिक्रिया

भारत निर्वाचन आयोग की शनिवार को हुई अहम बैठक में SIR को लेकर कई फैसले लिए गए। इस पर चांद ने कहा कि जब भी कोई पर्दाफाश होता है, तब भाजपा सक्रिय हो जाती है और चुनाव आयोग बड़ी बैठकें व बड़े बयान देने लगता है। उनके अनुसार कुछ समय बाद परिस्थितियाँ पहले जैसी हो जाती हैं और आयोग की भूमिका पर फिर सवाल उठने लगते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग सत्तापक्ष पर कभी कार्रवाई नहीं करता, जबकि विपक्ष-शासित राज्यों में बड़े पैमाने पर अधिकारियों के तबादले किए जाते हैं।

अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद का हमला

अयोध्या से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि भाजपा और चुनाव आयोग एक-दूसरे के सहयोगी बन गए हैं — सरकार आयोग का सहयोग कर रही है और आयोग सरकार की मदद। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए सीधा खतरा बताया। प्रसाद ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री स्तर तक चुनाव आयोग के समर्थन में प्रेस कॉन्फ्रेंस की जा रही हैं, जो इस बात का संकेत है कि सत्तापक्ष का भरोसा जनता पर नहीं, बल्कि आयोग पर है। उन्होंने दावा किया कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव की सरकार बनेगी।

राम मंदिर चढ़ावा मामले पर सपा का रुख

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस की चार्जशीट पर सपा नेता ने सतर्क रुख अपनाया। चांद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एसआईटी गठित की है और जब उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक हो, तभी स्थिति स्पष्ट होगी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की एसआईटी पर सुप्रीम कोर्ट को भरोसा नहीं था, इसलिए पार्टी पुलिस चार्जशीट पर कोई टिप्पणी नहीं करेगी। यह मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और आगे सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 से अधिक एफिडेविट दाखिल कर उनकी अनदेखी का आरोप गंभीर है — यदि सत्यापित हो तो यह चुनाव आयोग की जवाबदेही पर बड़ा सवाल है। दूसरी ओर, विपक्ष की यह रणनीति 2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले मतदाताओं में अविश्वास का माहौल बनाने की भी कोशिश मानी जा सकती है — जो स्वयं लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चिंताजनक है।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सपा नेता फखरुल हसन चांद ने ज्ञानेश कुमार के बारे में क्या कहा?
सपा नेता फखरुल हसन चांद ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के रहते चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं हो सकता, क्योंकि उनकी नियुक्ति भाजपा सरकार की इच्छा से हुई है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इस पूरे प्रकरण पर स्वतः संज्ञान लेने की माँग की।
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण पर सपा की क्या आपत्ति है?
सपा का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के तहत बंगाल सहित कई राज्यों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटे गए। सपा ने आयोग के समक्ष 18,000 से अधिक एफिडेविट दाखिल किए थे, जिन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। पार्टी की माँग है कि SIR प्रक्रिया पूरी तरह बंद की जाए।
अवधेश प्रसाद ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाया?
अयोध्या से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि भाजपा और चुनाव आयोग एक-दूसरे के सहयोगी बन गए हैं — सरकार आयोग का सहयोग कर रही है और आयोग सरकार की मदद। उन्होंने मुख्यमंत्री स्तर पर चुनाव आयोग के समर्थन में प्रेस कॉन्फ्रेंस को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर सपा का रुख क्या है?
सपा ने इस मामले में पुलिस की चार्जशीट पर टिप्पणी करने से इनकार किया है। पार्टी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी, क्योंकि राज्य सरकार की एसआईटी पर सुप्रीम कोर्ट को पहले से भरोसा नहीं था।
सपा ने चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया पर क्या माँग रखी है?
सपा का कहना है कि चुनाव आयुक्त की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट का जो पूर्व निर्णय था, जिसे भाजपा ने पलट दिया, वही व्यवस्था फिर से लागू होनी चाहिए। पार्टी का तर्क है कि वर्तमान प्रक्रिया आयोग की स्वतंत्रता को कमज़ोर करती है।
राष्ट्र प्रेस
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