मोहित चौहान का जन्मदिन: अभिनेता बनने का सपना, लेकिन आवाज ने बना दिया उन्हें सितारा
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बॉलीवुड में मोहित चौहान को उनके रोमांटिक गानों के लिए जाना जाता है। उनकी आवाज ने लाखों दिलों को छू लिया है। 'तुम से ही', 'पी लूं', 'तुम हो' जैसे गाने आज भी लोगों की पसंदीदा धुनों में शामिल हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि मोहित चौहान का बचपन का ख्वाब गायक बनना नहीं, बल्कि अभिनेता बनना था।
उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि वह अभिनय की दुनिया में झांकना चाहते थे और इसके लिए उन्होंने थिएटर किया और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) में दाखिला लेने का प्रयास भी किया।
मोहित चौहान का जन्म 11 मार्च 1966 को हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के नाहन में हुआ। उनके पिता सरकारी नौकरी में थे, जिसके कारण परिवार को बार-बार अलग-अलग शहरों में ट्रांसफर होना पड़ता था। बचपन से ही उनका संगीत और अभिनय दोनों के प्रति लगाव था। उन्होंने अपने भाई के साथ गायन का अभ्यास किया और अपने दादा से प्रेरणा ली, जो एक शास्त्रीय गायक थे।
उनकी संगीत यात्रा सिल्क रूट बैंड से शुरू हुई। मोहित चौहान ने अपने साथियों के साथ मिलकर इस बैंड की स्थापना की। मोहित बैंड में मुख्य गायक थे। उनके पहले एलबम 'बूंदें' में 'डूबा डूबा' और 'पहचान' जैसे गीत शामिल थे, जो युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हुए।
बॉलीवुड में मोहित का सफर 2002 में फिल्म 'रोड' के गाने 'पहले नजर में डरी थी' से प्रारंभ हुआ। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में अपनी आवाज दी, लेकिन उन्हें असली पहचान 'रंग दे बसंती' के 'खून चला' और 'जब वी मेट' के 'तुम से ही' से मिली। मोहित ने अपने अभिनय के सपने को गाने के माध्यम से नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि गाने की भावनाओं में अभिनय करना उनके लिए एक तरीका रहा, जिससे उनका बचपन का सपना कहीं-न-कहीं पूरा हुआ।
मोहित चौहान ने 'मसकली' (दिल्ली-6), 'साड्डा हक' (रॉकस्टार), 'जो भी मैं' (रॉकस्टार), और 'तुझे भुला दिया' (अंजाना अनजानी) जैसे कई हिट गाने दिए हैं। उन्होंने हिंदी के अलावा बंगाली, कन्नड़, तमिल, पंजाबी और गुजराती में भी गाने गाए हैं। उनके योगदान को कई पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया है, जिनमें फिल्मफेयर, जी सिने अवार्ड और आईफा शामिल हैं।