2026 के पहले 6 महीनों में बॉक्स ऑफिस ₹6,400 करोड़ पार, 'धुरंधर' और 'बॉर्डर-2' ने मारी बाज़ी: गिरीश वानखड़े
सारांश
मुख्य बातें
फिल्म समीक्षक और ट्रेड विश्लेषक गिरीश वानखड़े के अनुसार, 2026 के पहले छह महीनों में भारतीय फिल्म उद्योग ने ₹6,400 करोड़ से अधिक का कारोबार दर्ज किया है — और इस उपलब्धि में हिंदी सिनेमा की तीन फिल्मों का सबसे बड़ा योगदान रहा। मुंबई में हुई एक बातचीत में वानखड़े ने बताया कि हालाँकि हिट फिल्मों की संख्या कम रही, लेकिन जो फ़िल्में चलीं उनके कारोबारी आँकड़े प्रभावशाली रहे।
हिंदी सिनेमा का दबदबा
वानखड़े ने बताया कि इस अवधि में 'धुरंधर द रिवेंज', 'बॉर्डर 2' और 'भूतबंगला' — इन तीन हिंदी फ़िल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर ताबड़तोड़ कमाई की। उन्होंने कहा, "हमने एक्सपेक्ट किया था कि हिंदी की 5-6 फिल्में प्रभाव डालेंगी, लेकिन भले ही कम फिल्मों ने असर छोड़ा, उन्होंने जबरदस्त कमाई की है।" दक्षिण भारतीय फ़िल्मों में 'पेड्डी' ने भी उल्लेखनीय कारोबार किया, और तमिल-तेलुगु फ़िल्मों ने समग्र बॉक्स ऑफिस को संतुलन प्रदान किया।
हॉलीवुड का प्रदर्शन: 'द ओडिसी' और 'स्पाइडर-मैन'
वानखड़े के अनुसार, क्रिस्टोफर नोलन की फ़िल्म 'द ओडिसी' को भारत में विशेष रुचि के साथ देखा गया। नोलन स्वयं फ़िल्म के प्रीमियर और प्रमोशन के लिए मुंबई आए थे, जहाँ अभिनेता टॉम हॉलैंड और मैट डेमन भी उनके साथ मौजूद थे। फ़िल्म ने पहले हफ्ते में ₹20 करोड़ का कारोबार किया।
'स्पाइडर-मैन' का प्रदर्शन और भी उल्लेखनीय रहा। गुरुवार को रिलीज़ के पहले दिन फ़िल्म ने ₹65 करोड़ और दूसरे दिन ₹49 करोड़ की कमाई की। वानखड़े के अनुसार, अब तक फ़िल्म ₹438 करोड़ का कारोबार कर चुकी है और उनका अनुमान है कि यह ₹500 करोड़ का आँकड़ा पार कर लेगी। हिंदी और अंग्रेज़ी — दोनों भाषाओं में फ़िल्म ने अच्छी कमाई की, जबकि तमिल और मलयालम संस्करणों का कलेक्शन तुलनात्मक रूप से कम रहा।
ओटीटी और हॉलीवुड से जुड़ाव
वानखड़े ने यह भी रेखांकित किया कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती पहुँच के कारण भारतीय दर्शक हॉलीवुड फ़िल्मों से अधिक परिचित हुए हैं। उनके अनुसार, यही कारण है कि बड़े बजट की हॉलीवुड फ्रेंचाइज़ी फ़िल्मों को अब भारत में पहले से कहीं अधिक दर्शक मिल रहे हैं।
टिकट मूल्य निर्धारण का असंतुलन
वानखड़े ने उत्तर और दक्षिण भारत में टिकट मूल्य निर्धारण के बीच के अंतर को भी उजागर किया। उन्होंने बताया कि दक्षिण में ₹180 की अधिकतम सीमा तय है, जिससे थिएटर में दर्शकों की संख्या 70 से 90 प्रतिशत तक बनी रहती है। इसके विपरीत, उत्तर भारत में मल्टीप्लेक्स टिकट ₹700 से ₹1,200 तक पहुँच जाती है, और शुक्रवार-शनिवार-रविवार के रात के शो में ₹500 से ऊपर तक जाती है। उनके अनुसार, दक्षिण में मज़बूत यूनियन व्यवस्था के कारण यह मूल्य नियंत्रण संभव है, जो उत्तर में अनुपस्थित है।
वानखड़े का मानना है कि यदि उत्तर भारत में भी टिकट दरों पर इसी तरह का नियमन लागू हो, तो थिएटर ऑक्युपेंसी में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है — जो समग्र बॉक्स ऑफिस कारोबार को और मज़बूत करेगा।