मॉर्गन स्टेनली का बड़ा दावा: भारतीय शेयर बाजार लंबी अवधि में मजबूत रिटर्न के लिए तैयार
सारांश
मुख्य बातें
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टेनली ने अपनी ताज़ा रणनीति रिपोर्ट में कहा है कि उभरते बाजारों (Emerging Markets) के मुकाबले पिछले 12 महीनों के कमज़ोर प्रदर्शन के बावजूद भारतीय शेयर बाजार आने वाले समय में मजबूत बढ़त के लिए तैयार है। फर्म के अनुसार, आय में सुधार, बढ़ता घरेलू निवेश और अनुकूल व्यापक आर्थिक परिस्थितियाँ बाजार के दीर्घकालिक आउटलुक को सहारा दे रही हैं।
मुख्य घटनाक्रम
मॉर्गन स्टेनली के विश्लेषक रिधम देसाई और नयनत पारेख ने अपने रणनीति नोट में स्वीकार किया कि भारतीय शेयरों ने पिछले 12 महीनों में उभरते बाजारों के समकक्षों के मुकाबले ‘अब तक का सबसे कमज़ोर प्रदर्शन’ किया है। हालाँकि, ब्रोकरेज का मानना है कि बाजार का ढाँचागत आधार मजबूत है और इस दशक के बचे हुए वर्षों में निवेशकों को ठोस रिटर्न मिल सकता है।
एआई एक्सपोज़र — सबसे बड़ी चुनौती
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय बाजारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में कम एक्सपोज़र है। यह ऐसे समय में है जब वैश्विक पूंजी प्रवाह तेज़ी से एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर, सेमीकंडक्टर और टेक्नोलॉजी-केंद्रित बाजारों की ओर मुड़ रहा है। मॉर्गन स्टेनली ने भारत के आईटी आउटसोर्सिंग उद्योग पर एआई की संभावित उथल-पुथल को लेकर भी चिंता जताई है, क्योंकि यह क्षेत्र वैश्विक प्रौद्योगिकी व्यय रुझानों से सीधे जुड़ा हुआ है।
आईटी सेक्टर — ‘अप्रत्याशित प्रतिभा’
दिलचस्प बात यह है कि ब्रोकरेज फर्म ने इसी आईटी सेक्टर को संभावित लाभार्थी भी बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अपेक्षाकृत कम श्रम उत्पादकता के कारण देश अंततः एआई-आधारित उत्पादकता लाभों का बड़ा लाभार्थी बन सकता है। भारतीय आईटी सेवा कंपनियाँ कथित तौर पर ‘अप्रत्याशित प्रतिभा’ साबित हो सकती हैं, क्योंकि वैश्विक कंपनियाँ एआई एप्लिकेशन और समाधान बनाने के लिए इन पर तेज़ी से निर्भर हो रही हैं।
सकारात्मक संकेतक और मूल्यांकन
कमज़ोर प्रदर्शन के बावजूद कई सकारात्मक संकेत उभर रहे हैं। मॉर्गन स्टेनली के अनुसार, 12 महीने के रोलिंग कॉर्पोरेट बायबैक रिकॉर्ड ऊँचाई के निकट हैं और जल्द ही ट्रेलिंग आधार पर लगभग 10 अरब डॉलर का आँकड़ा पार कर सकते हैं। मूल्यांकन भी अब अधिक उचित स्तर पर आ गए हैं।
MSCI इंडिया इस समय 3.4 गुना के प्राइस-टू-बुक मल्टीपल पर कारोबार कर रहा है, जो रिपोर्ट के अनुसार ऐतिहासिक रूप से लगभग 11 प्रतिशत के 10-वर्षीय फॉरवर्ड वार्षिक रिटर्न के अनुरूप है। गौरतलब है कि यह आकलन ऐसे समय आया है जब घरेलू निवेशकों का एसआईपी प्रवाह भी रिकॉर्ड स्तर पर बना हुआ है।
क्या होगा आगे
विश्लेषकों का कहना है कि निकट अवधि में वैश्विक एआई-केंद्रित प्रवाह से भारत पर दबाव बना रह सकता है, लेकिन आय वृद्धि और बायबैक गतिविधि बाजार के लिए ठोस आधार तैयार कर रही हैं। निवेशकों की नज़र अब आगामी तिमाही नतीजों और वैश्विक टेक खर्च के रुझानों पर रहेगी।