क्या भारत की अर्थव्यवस्था 2026 में वैश्विक बाजारों से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है?
सारांश
Key Takeaways
- भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है।
- 2026 में शेयर बाजार बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
- निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
- सोने और चांदी में निवेश के लिए संतुलन जरूरी है।
- युवा आबादी और आर्थिक विकास भारत की ताकत हैं।
मुंबई, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वर्ष 2025 भारतीय बाजारों के लिए ‘सुस्ती का वर्ष’ साबित हुआ, फिर भी भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रही। सरकार का घाटा कम रहा, महंगाई नियंत्रण में रही और आर्थिक विकास भी संतोषजनक रहा। लेकिन इसके बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने अधिक मुनाफा नहीं दिया। साथ ही भारतीय रुपया भी अमेरिकी डॉलर सहित कई विदेशी मुद्राओं के मुकाबले कमजोर रहा।
नए साल के लिए अपने अनुमान साझा करते हुए आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और मुख्य निवेश अधिकारी (सीआईओ) एस. नरेन ने कहा कि इन सबके बावजूद, साल 2026 भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहतर साबित हो सकता है। आने वाले समय में भारतीय बाजार दुनिया के कई बड़े बाजारों से अधिक प्रदर्शन कर सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत की विकास कहानी लंबी और मजबूत है। देश की युवा आबादी, बढ़ती अर्थव्यवस्था और भविष्य की संभावनाएं भारत को खास बनाती हैं।
नरेन ने निवेशकों को सलाह दी कि उन्हें जल्दी मुनाफा कमाने के पीछे नहीं भागना चाहिए। इसके बजाय अपने निवेश को शेयर, बॉंड जैसे विकल्पों में सही तरह से बांटना चाहिए।
उन्होंने बताया कि 2025 की शुरुआत के मुकाबले अब शेयरों में थोड़ा अधिक निवेश किया जा सकता है, क्योंकि भारतीय बाजारों ने पिछले एक साल में कई विदेशी बाजारों की तुलना में खराब प्रदर्शन किया है। इससे समझदारी से जोखिम लेने वाले निवेशकों को अवसर मिल सकता है।
हालांकि, उन्होंने सोने और चांदी में अधिक निवेश करने से सावधान रहने को कहा। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में सोना और चांदी ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है, जिससे उनकी कीमतें बहुत अधिक बढ़ गई हैं।
पिछले एक साल में चांदी की कीमत दोगुनी से भी अधिक हो गई, जबकि सोने की कीमत लगभग 70 प्रतिशत बढ़ गई। वहीं शेयर बाजार ने केवल लगभग 10 प्रतिशत का रिटर्न दिया।
नरेन ने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया भर में जोखिम अभी भी बहुत अधिक हैं। खासकर अमेरिका की टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयर बहुत महंगे लग रहे हैं और सोना-चांदी में जरूरत से ज्यादा उम्मीदें दिखाई दे रही हैं।
इसलिए 2026 में निवेश करते समय संतुलन और सावधानी जरूरी है। उन्होंने कहा कि निवेशकों को अच्छे मौके और जोखिम, दोनों को ध्यान में रखकर फैसले लेने चाहिए।