शहबाज शरीफ का 'सऊदी प्रेम' पाकिस्तान को पड़ सकता है भारी, ईरान नाराज तो होगी दोहरी मार
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा सऊदी अरब के समर्थन में हूती विद्रोहियों के हमलों की कड़ी निंदा किए जाने के बाद इस्लामाबाद के सामने एक नई कूटनीतिक दुविधा खड़ी हो गई है। मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत दिया गया यह बयान जहाँ अमेरिका को खुश कर सकता है, वहीं ईरान के साथ पाकिस्तान के संबंधों के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। विश्लेषकों के अनुसार, शहबाज सरकार इस समय 'इधर कुआं, उधर खाई' जैसे हालात में फंसती दिख रही है।
शहबाज का एक्स पोस्ट और सऊदी समर्थन
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'मैं सऊदी अरब के खिलाफ हूती विद्रोहियों की ओर से किए जा रहे बार-बार के हमलों की कड़ी निंदा करता हूं। इनमें रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और अभा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को निशाना बनाया गया, जिसके कारण लोगों की जान गई और कई नागरिक घायल हुए।'
उन्होंने आगे लिखा, 'मैं सऊदी सशस्त्र बलों और गठबंधन की सतर्कता तथा पेशेवर क्षमता की सराहना करता हूं, जिन्होंने कई बैलिस्टिक मिसाइलों को बीच रास्ते में ही नष्ट कर दिया। निर्दोष लोगों की जान बचाने और सऊदी अरब की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनके निरंतर प्रयास प्रशंसनीय हैं।'
शहबाज ने यह भी कहा, 'पाकिस्तान, सऊदी अरब के नेतृत्व और वहां की जनता के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है। मक्का संयुक्त रक्षा समझौते और इसकी रणनीतिक राजनीतिक एवं रक्षा समिति के हालिया निर्णयों के अनुरूप, सऊदी अरब की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता अटल है। हूती विद्रोहियों को तुरंत इन हमलों को बंद करना चाहिए।'
दोहरी कूटनीति का संकट
पाकिस्तान एक ओर सऊदी अरब से मजबूत रक्षा और आर्थिक संबंध रखता है, तो दूसरी ओर ईरान के साथ भी सीमा और व्यापारिक रिश्ते बनाए रखने का दावा करता है। ईरान पर पहले से ही हूती समूहों को समर्थन देने के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में सऊदी पक्ष में इतनी मुखर बयानबाजी तेहरान की नाराजगी को न्योता दे सकती है।
यह ऐसे समय में आया है जब ईरान खुद अमेरिका से जारी तनाव के बीच सऊदी अरब से टकराव की स्थिति में है। गौरतलब है कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान — दोनों — से संबंध बनाए रखने की कोशिश करता रहा है, जो एक कठिन संतुलन की मांग करता है।
वैश्विक संदर्भ और हूती हमले
इस समय सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमलों का वैश्विक स्तर पर विरोध हो रहा है। हमलों में रियाद और अभा के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे जैसे नागरिक ढाँचे को निशाना बनाया गया है। कई देशों ने इन हमलों की निंदा की है और पाकिस्तान ने भी इसी वैश्विक स्वर में अपनी आवाज मिलाई है।
हालांकि, आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान की यह स्थिति महज एक घोषणा तक सीमित नहीं है — मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत इसके व्यावहारिक निहितार्थ भी हो सकते हैं, जो इस्लामाबाद को सैन्य जिम्मेदारियों में भी खींच सकते हैं।
पाकिस्तान की विदेश नीति पर असर
विश्लेषकों के मुताबिक, पाकिस्तान की यह स्थिति उसकी दीर्घकालिक विदेश नीति के लिए परीक्षा की घड़ी है। सऊदी अरब से आर्थिक मदद और प्रवासी कामगारों का रिश्ता पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है। वहीं, ईरान के साथ सीमावर्ती इलाकों में सहयोग और ऊर्जा व्यापार के समझौते भी चर्चा में रहे हैं।
एक को साधने में दूसरे को नाराज करना — यही वह जोखिम है जिसे शहबाज शरीफ सरकार अभी उठा रही है। आने वाले हफ्तों में ईरान की आधिकारिक प्रतिक्रिया इस्लामाबाद की कूटनीतिक स्थिति को और स्पष्ट करेगी।