पाकिस्तान की खामोशी: सऊदी अरब-ईरान तनाव के बीच रक्षा समझौते पर सवाल

Click to start listening
पाकिस्तान की खामोशी: सऊदी अरब-ईरान तनाव के बीच रक्षा समझौते पर सवाल

सारांश

पाकिस्तान की विदेश नीति पर एक नई रिपोर्ट ने कई प्रश्न उठाए हैं। सऊदी अरब में ईरानी हमलों के बावजूद, इस्लामाबाद की प्रतिक्रिया चुप्पी साधे हुए है। क्या यह स्थिति पाकिस्तान की रणनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाती है?

Key Takeaways

  • पाकिस्तान की चुप्पी कई रणनीतिक प्रश्नों को जन्म देती है।
  • सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से सहयोग जारी है।
  • ईरान की आक्रामकता क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा है।
  • यूएई ने भी आवश्यक कदम उठाए हैं।
  • राजनयिक संबंध महत्वपूर्ण हैं, लेकिन नीति में बदलाव की आवश्यकता है।

इस्लामाबाद, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान की विदेश नीति पर एक हालिया रिपोर्ट ने कई प्रश्न खड़े किए हैं। पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच ‘स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट' (एसएमडीए) जैसे महत्वपूर्ण रक्षा समझौते मौजूद हैं। इसके बावजूद, सऊदी अरब में ईरानी हमलों के प्रति इस्लामाबाद की प्रतिक्रिया शांत बनी हुई है।

द यूरेशियन टाइम्स में प्रकाशित एक लेख में सलाहुद्दीन शोएब चौधरी ने उल्लेख किया है कि दशकों से सऊदी अरब से मिल रहे वित्तीय और रणनीतिक समर्थन के बावजूद, पाकिस्तान ने ईरान को ‘खुश करने’ की नीति अपनाई है।

लेख में कहा गया है, “यह ध्यान देने योग्य है कि सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच संबंध सात दशकों से भी अधिक पुराने हैं। सऊदी सुरक्षा के लिए पाकिस्तानी सैन्य कर्मियों की तैनाती एक संस्थागत व्यवस्था बनी हुई है। इसके अलावा, सऊदी अरब में लाखों पाकिस्तानी नागरिक काम कर रहे हैं, जो इस्लामाबाद की विदेशी मुद्रा आय में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।”

द यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया कि ईरान से बार-बार हमलों का सामना करने के बाद, सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने चेतावनी दी है कि ईरानी आक्रामकता के सामने किंगडम का संयम 'असीमित नहीं है', जिसका अर्थ है कि सैन्य कार्रवाई अभी भी एक विकल्प हो सकता है। इस बीच, अरब और इस्लामिक देशों ने एक संयुक्त बयान में तेहरान से अपनी आक्रामकता रोकने का अनुरोध किया।

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने 7 मार्च को सार्वजनिक रूप से पश्चिम एशिया के देशों के खिलाफ हुई आक्रामक कार्रवाइयों के लिए माफी मांगी। फिर भी, रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने खाड़ी देशों पर हमले जारी रखे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि तेहरान का उद्देश्य न केवल इजरायल को नुकसान पहुंचाना है, बल्कि पश्चिम एशिया के देशों की अर्थव्यवस्थाओं को भी उनके महत्वपूर्ण अवसंरचना को निशाना बनाकर प्रभावित करना है।

युद्ध के दौरान सबसे अधिक प्रभावित खाड़ी देशों में सऊदी अरब, यूएई और कतर शामिल हैं। जबकि दोहा ने कथित तौर पर हमास, हिज़्बुल्लाह और हूती जैसे ईरानी प्रॉक्सी समूहों का समर्थन करने में धन खर्च किया है, जिसका उद्देश्य इजरायल पर लगातार दबाव बनाए रखना बताया गया है।

इस बीच, यूएई के उद्योग और उन्नत प्रौद्योगिकी मंत्री सुल्तान अल जाबेर ने चेतावनी दी है कि ऊर्जा अवसंरचना पर हमले उनके संचालन को प्रभावित कर रहे हैं और तनाव बढ़ने पर इसके गंभीर प्रभाव हो सकते हैं।

ईरान के बढ़ते हमलों के बीच कतर के विदेश मंत्रालय ने कई ईरानी राजनयिकों को ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ (अवांछित व्यक्ति) घोषित किया है। रिपोर्टों के अनुसार, यूएई में बड़ी संख्या में ईरानी नागरिक, जिनमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) और बासिज के सीक्रेट मेंबर्स शामिल हैं, सरकार के खिलाफ अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

लेख में यह भी कहा गया है कि ईरानी ऑपरेटिव्स यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत और सऊदी अरब में पाकिस्तानी नागरिकों को भर्ती कर इन देशों और उनके नेतृत्व के खिलाफ ऑनलाइन प्रोपेगेंडा अभियान चलाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इससे पहले, तुर्की की पत्रकार उज़ाय बुलुत ने एक खोजी रिपोर्ट में बताया था कि पाकिस्तान-आधारित नेटवर्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एआई-आधारित ईरानी प्रोपेगेंडा फैला रहे हैं।

Point of View

ईरानी हमलों के प्रति पाकिस्तान की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।
NationPress
23/03/2026

Frequently Asked Questions

पाकिस्तान की विदेश नीति में मौन का क्या मतलब है?
पाकिस्तान का मौन सऊदी अरब के साथ संबंधों और ईरान के साथ उसकी रणनीति को दर्शाता है।
सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच क्या संबंध हैं?
सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच संबंध दशकों पुराने हैं, जिसमें सैन्य सहयोग भी शामिल है।
ईरानी आक्रामकता पर सऊदी अरब का क्या रुख है?
सऊदी अरब ने ईरानी आक्रामकता के खिलाफ संयम बरतने की चेतावनी दी है, लेकिन सैन्य कार्रवाई भी एक विकल्प है।
कतर का ईरान के प्रति क्या रुख है?
कतर ने ईरानी राजनयिकों को अवांछित घोषित किया है और ईरानी गतिविधियों के खिलाफ कदम उठाए हैं।
क्या ईरान का मौजूदा व्यवहार खाड़ी देशों को प्रभावित कर रहा है?
हाँ, ईरान के हमले खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्थाओं और सुरक्षा को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं।
Nation Press