ऑस्ट्रेलिया में ईरान पर हमलों का विरोध, सेना भेजने की इच्छा कम
सारांश
Key Takeaways
- ऑस्ट्रेलिया में ईरान के खिलाफ हमलों का समर्थन केवल 26 फीसदी है।
- 50 फीसदी लोग अपने सैनिकों को भेजने का विरोध कर रहे हैं।
- ईरानी पासपोर्ट धारकों के लिए यात्रा पर बैन लगाया गया है।
- ऑस्ट्रेलिया में 85,000 से अधिक ईरानी नागरिक हैं।
- खिलाड़ियों के राष्ट्रगान गाने से मना करने पर उन्हें देशद्रोही करार दिया गया।
नई दिल्ली, 26 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजरायल के हमलों के कारण तनाव की स्थिति बनी हुई है। एक हालिया सर्वे में दर्शाया गया है कि ऑस्ट्रेलिया की केवल 26 फीसदी आबादी ही ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के हमलों को उचित मानती है। वहीं, 50 फीसदी लोग ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों की तैनाती का विरोध कर रहे हैं।
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, स्वतंत्र फर्म 'एसेंशियल रिसर्च' द्वारा किए गए मासिक पोल 'द एसेंशियल रिपोर्ट' में बताया गया है कि 10 फीसदी लोग अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमले के फैसले को सही मानते हैं और 16 फीसदी इसे उचित कार्रवाई मानते हैं।
ऑस्ट्रेलियाई जनसंख्या का 27 फीसदी इस संघर्ष के खिलाफ है। 15 फीसदी ने इसे नामंजूर किया है, जबकि अन्य लोग निष्पक्ष रहने या इस मुद्दे पर असमंजस में हैं।
इस संघर्ष में ऑस्ट्रेलिया की भागीदारी पर पूछे जाने पर, 50 फीसदी लोगों ने कहा कि वे ईरान में अमेरिका-इजरायल के जमीनी अभियान के समर्थन में सेना भेजने का विरोध करेंगे, जबकि 21 फीसदी ने इस कदम का समर्थन किया।
इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया ने ईरान से आने वाले यात्रियों पर बैन लगाने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि मध्य पूर्व में युद्ध के कारण यह खतरा बढ़ गया है कि शॉर्ट-टर्म वीजा खत्म होने के बाद यात्री लौटने से इंकार कर सकते हैं।
गृह विभाग ने जानकारी दी है कि अगले छह महीनों तक ईरानी पासपोर्ट वाले लोगों को पर्यटन या काम के लिए ऑस्ट्रेलिया आने से रोका जाएगा।
एक बयान में कहा गया है, “ईरान में लड़ाई के कारण यह खतरा बढ़ गया है कि कुछ अस्थायी वीजा धारक अपने वीजा समाप्त होने पर ऑस्ट्रेलिया से बाहर नहीं जा पाएंगे।”
विभाग ने आगे कहा कि वीजा मामलों में थोड़ी राहत कुछ विशेष मामलों में दी जाएगी, जैसे कि ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के माता-पिता के लिए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 85,000 से अधिक ऑस्ट्रेलियाई नागरिक ईरान में जन्मे हैं और सिडनी तथा मेलबर्न जैसे बड़े शहरों में ईरानी समुदाय के लोग निवास करते हैं।
इससे पहले, ऑस्ट्रेलिया ने इस महीने मेहमान महिला फुटबॉल टीम की सात खिलाड़ियों और अधिकारियों को अपने देश में शरण दी थी। इस कदम से ईरान में भारी नाराजगी है।
दरअसल, एशियन कप मैच के दौरान खेल शुरू होने से पहले खिलाड़ियों ने ईरान का राष्ट्रगान गाने से इनकार कर दिया। इस पर ईरान में इन खिलाड़ियों को देशद्रोही करार दिया गया। इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ इस हरकत को बगावत के रूप में देखा गया।
इन सात खिलाड़ियों में से पांच ने बाद में ऑस्ट्रेलिया में पनाह लेने का अपना निर्णय बदल दिया, जिससे यह आशंका बढ़ गई कि उनके परिवार खतरे में हैं।