क्या अफगान सीमा पर झड़पों ने पाकिस्तान में आतंकी हमलों को बढ़ावा दिया?
सारांश
Key Takeaways
- पाकिस्तान में आतंकी हमलों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।
- सीमा संघर्ष ने आर्थिक चुनौतियाँ पैदा की हैं।
- तालिबान का प्रभाव पाकिस्तान की सुरक्षा पर है।
इस्लामाबाद/काबुल, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हालिया सीमा झड़पों का गहरा प्रभाव पाकिस्तान में आतंकी गतिविधियों की बढ़ती रफ्तार पर पड़ा है। एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में आत्मघाती हमलों और सुरक्षा बलों पर हमलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
इस्लामाबाद स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज़ के अनुसार, वर्ष 2025 के पहले 11 महीनों में कम से कम 3,187 लोगों की मौत हुई, जिनमें नागरिक और सुरक्षा कर्मी शामिल हैं। यह आंकड़ा 2024 की तुलना में 25 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।
यूरोपियन टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान के साथ चल रहे सीमा संघर्ष ने पाकिस्तान को आर्थिक रूप से कमजोर किया है। एक ओर, सैन्य खर्च बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर, आतंकी हमलों से निपटने की चुनौती भी बनी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने इस साल के लिए नई रक्षा खरीद और सेवाओं की मांगों को मंजूरी दी है।
पाकिस्तान ने तालिबान समर्थित संगठनों को हमलों का जिम्मेदार ठहराया है, जबकि काबुल ने इन आरोपों को गलत सूचना बताते हुए खारिज किया है। अफगानिस्तान का कहना है कि पाकिस्तान इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी समूहों का उपयोग कर उसकी स्थिरता को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तालिबान ने सीमा पार भारी गोलीबारी की, जिससे पाकिस्तान को नुकसान हुआ। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, मध्य दिसंबर तक अफगानिस्तान की ओर से हुई गोलीबारी में कम से कम 44 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए।
पूर्व पाकिस्तानी राजनयिक जावेद हुसैन ने चेतावनी दी है कि अफगानिस्तान में कोई भी जमीनी सैन्य कार्रवाई करने से बचना चाहिए।
दक्षिण एशियाई भू-राजनीति के विशेषज्ञ मीर मुस्तफिज़ुर रहमान ने कहा कि यह संघर्ष पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियों को और बढ़ा सकता है।