यूएई राजदूत: भारत की रचनात्मक कूटनीति से बढ़ा है वैश्विक महत्व

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यूएई राजदूत: भारत की रचनात्मक कूटनीति से बढ़ा है वैश्विक महत्व

सारांश

ईरान के हमलों के बीच यूएई के राजदूत ने बताया कि भारत की कूटनीतिक पहल से क्षेत्र में स्थिरता संभव है। जानिए किस प्रकार भारत, ईरान-इजरायल संघर्ष में एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ बन सकता है।

Key Takeaways

  • ईरान के हमले ने खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ाया है।
  • यूएई ने सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए हैं।
  • भारत की रचनात्मक कूटनीति क्षेत्र में स्थिरता लाने का प्रयास कर रही है।

नई दिल्ली, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ईरान द्वारा किए जा रहे हमलों के कारण मिडिल ईस्ट में गंभीर तनाव उत्पन्न हो गया है। ऐसे हालात में, मिडिल ईस्ट में निवास करने वाले अन्य देशों के लोगों को अपने घर लौटने पर मजबूर होना पड़ रहा है। इस संदर्भ में, संयुक्त अरब अमीरात के राजदूत अब्दुलनासिर अलशाली ने राष्ट्र प्रेस के साथ एक विशेष बातचीत की।

सवाल: ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण खाड़ी में बढ़ते तनाव को आप कैसे देखते हैं?

जवाब: 28 फरवरी से, ईरान ने यूएई और उसके पड़ोसी देशों पर लगातार आतंकवादी हमले किए हैं। 29 मार्च तक, यूएई को 414 बैलिस्टिक मिसाइलों, 15 क्रूज मिसाइलों और 1,914 ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा है, जो अन्य सभी लक्षित देशों के हमलों की तुलना में अधिक है। विशेष रूप से चिंताजनक यह है कि ये हमले ईरान के साथ संघर्ष में शामिल देशों पर नहीं, बल्कि उन देशों पर किए गए हैं जो संघर्ष को रोकने का प्रयास कर रहे थे। यूएई और जीसीसी देशों ने मिलकर सैन्य टकराव को रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए। हम स्पष्ट थे कि हमारे क्षेत्र का उपयोग ईरान पर हमलों के लिए नहीं किया जाएगा, और हमने संयम और जिम्मेदारी के साथ कार्य किया। हम इस विवाद में शामिल नहीं थे, बल्कि हम उन लोगों में से थे जो बातचीत और तनाव कम करने की अपील कर रहे थे। फिर भी, ईरान ने इन विश्वासों की अनदेखी की और उन देशों को निशाना बनाया जो संघर्ष को समाप्त करने के लिए प्रयासरत थे। यह संघर्ष सीधे हमलों से कहीं आगे बढ़ चुका है। ईरान के जहाजों, बंदरगाहों और ऊर्जा अवसंरचना पर हमले खाड़ी में व्यापार की सुरक्षा को कमजोर कर रहे हैं और वैश्विक तेल आपूर्ति को खतरे में डाल रहे हैं। पूरे क्षेत्र में ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाना, जैसे कि दक्षिण पारस क्षेत्र से संबंधित सुविधाओं पर हमले, एक स्पष्ट और चिंताजनक पैटर्न दिखाता है।

यूएई इस हमले को सही ठहराने वाली किसी भी बात को पूरी तरह से खारिज करता है। ईरान का मिसाइल कार्यक्रम क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है। यूएई अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।

सवाल: ईरान से जुड़े हमलों के बीच दुबई और अबू धाबी जैसे शहर कितने सुरक्षित हैं?

जवाब: यूएई सुरक्षित और अच्छी तरह से संरक्षित है। सशस्त्र बल और संबंधित राष्ट्रीय प्राधिकरण अपनी जिम्मेदारियों को पेशेवरता और साहस के साथ निभा रहे हैं। हमलों को रोकने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हमारी रक्षा प्रणाली चौबीसों घंटे काम कर रही है। हमारे एकीकृत रक्षा प्रणालियों ने प्रभावी रूप से जवाब दिया है और हमारे खिलाफ लॉन्च की गई अधिकांश मिसाइलों और ड्रोन को इंटरसेप्ट किया गया है। हमारी प्राथमिकता हमारे नागरिकों और पर्यटकों की सुरक्षा रही है। यूएई में जीवन सामान्य रूप से चल रहा है, व्यापार जारी हैं, और पर्यटन क्षेत्र मजबूत सुरक्षा उपायों के साथ पर्यटकों का स्वागत कर रहा है।

सवाल: क्या प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ईरान-इजरायल युद्ध को समाप्त करने के लिए एक अच्छा मध्यस्थ बन सकता है?

जवाब: भारत की भूमिका की पहले ही सराहना की जा चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन विश्व नेताओं में से थे जिन्होंने हमलों के प्रारंभ होने के बाद यूएई के राष्ट्रपति को फोन किया था। यह कॉल भाईचारे का प्रतीक है। भारत ने यूएन सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 2817 में अपना नाम दिया और 135 देशों के साथ इसे सह-प्रायोजित किया। यह प्रस्ताव एक मजबूत संदेश देता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय संप्रभुता पर हमलों को बर्दाश्त नहीं करेगा। भारत पूरे पश्चिम एशिया में गहरे रिश्ते रखता है और इसकी आवाज़ की प्रामाणिकता इसकी कूटनीतिक परंपरा से है।

Point of View

जिसमें ईरान के हमलों के संदर्भ में भारत की कूटनीतिक भूमिका को प्रमुखता दी गई है।
NationPress
30/03/2026

Frequently Asked Questions

क्या यूएई सुरक्षित है?
हाँ, यूएई सुरक्षित है और इसकी सशस्त्र बल पूरी सुरक्षा के लिए मेहनत कर रहे हैं।
भारत ईरान-इजरायल युद्ध में मध्यस्थता कैसे कर सकता है?
भारत की कूटनीतिक पहल और मजबूत संबंध ईरान-इजरायल संघर्ष में मध्यस्थता के लिए महत्वपूर्ण हैं।
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