14 जुलाई 2026
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पहलगाम हमला: हाफिज सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट पर पूर्व DGP एसपी वैद बोले — 'पाकिस्तान पर बढ़ेगा अंतरराष्ट्रीय दबाव'

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पहलगाम हमला: हाफिज सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट पर पूर्व DGP एसपी वैद बोले — 'पाकिस्तान पर बढ़ेगा अंतरराष्ट्रीय दबाव'

सारांश

पहलगाम हमले में हाफिज सईद के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट महज कागजी कार्रवाई नहीं — यह भारत की उस कानूनी रणनीति का हिस्सा है जो पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर घेरती है। पूर्व DGP एसपी वैद के अनुसार, इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस और CBI सहयोग से यह दबाव और बढ़ सकता है।

मुख्य बातें

पहलगाम आतंकी हमले में 20 से अधिक लोगों की मौत हुई थी; NIA ने पर्याप्त साक्ष्य जुटाकर अदालत से हाफिज सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट हासिल किया।
पूर्व DGP एसपी वैद ने कहा कि वारंट जारी होने के बाद CBI और इंटरपोल की मदद ली जा सकती है और रेड कॉर्नर नोटिस की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
वैद ने जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर सहित अन्य आतंकी सरगनाओं के खिलाफ भी इसी तरह वारंट हासिल करने की वकालत की।
उन्होंने संसद हमले , पुलवामा हमले और जम्मू-कश्मीर विधानसभा हमले का उल्लेख करते हुए कानूनी प्रक्रिया से अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की माँग की।
वैष्णो देवी कथित नकली चाँदी मामले में वैद ने क्राइम ब्रांच जाँच, CCTV फुटेज और पूरी इन्वेंट्री की समीक्षा की माँग की।

जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपी वैद ने 14 जुलाई को कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के मामले में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) प्रमुख हाफिज सईद के खिलाफ भारतीय अदालत द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट एक निर्णायक कानूनी कदम है, जो पाकिस्तान पर वांछित आतंकियों को भारत को सौंपने का अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने पर्याप्त साक्ष्य जुटाकर अदालत को संतुष्ट किया, तभी यह वारंट जारी हुआ।

मुख्य घटनाक्रम

पहलगाम आतंकी हमले में 20 से अधिक लोगों की जान गई थी। पूर्व डीजीपी वैद ने कहा कि इस स्तर के हमलों की साजिश शीर्ष नेतृत्व स्तर पर रची जाती है, जबकि उन्हें अंजाम देने का काम संगठन के निचले स्तर के सदस्य करते हैं। उन्होंने कहा, 'हाफिज सईद का नाम जाँच में शामिल होना और उनके खिलाफ वारंट जारी होना पूरी कानूनी प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।' लश्कर-ए-तैयबा द्वारा किए गए अधिकांश बड़े हमलों के पीछे हाफिज सईद की कथित साजिश और रणनीति रही है — मुंबई आतंकी हमला इसका प्रमुख उदाहरण है।

अंतरराष्ट्रीय दबाव और कानूनी रास्ते

वैद ने बताया कि गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद अब CBI और इंटरपोल की मदद ली जा सकती है। रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाफिज सईद की आवाजाही सीमित होगी। उन्होंने कहा कि जब भी भारत-पाकिस्तान के बीच ऐसे मामलों पर बातचीत होगी, तब भारत यह कह सकता है कि संबंधित व्यक्ति भारतीय अदालत में वांछित है और उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत सौंपा जाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जब साक्ष्यों की माँग होती है, तब अदालत द्वारा जारी वारंट और कानूनी प्रक्रिया भारत के पक्ष को और मजबूत बनाती है।

NIA की भूमिका और अन्य आतंकी मामले

वैद ने NIA की सराहना करते हुए कहा कि एजेंसी ने पर्याप्त साक्ष्य जुटाकर अदालत को संतुष्ट किया। उन्होंने यह भी कहा कि इसी तरह जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर और अन्य आतंकी संगठनों के सरगनाओं के खिलाफ भी साक्ष्य जुटाकर अदालतों से वारंट हासिल किए जाने चाहिए। उन्होंने संसद हमले, जम्मू-कश्मीर विधानसभा हमले और पुलवामा हमले जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि जहाँ भी संबंधित आतंकी संगठनों की भूमिका सामने आई है, वहाँ शीर्ष साजिशकर्ताओं के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया पूरी कर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया जाना चाहिए।

वैष्णो देवी मामले में पारदर्शी जाँच की माँग

वैष्णो देवी मंदिर में कथित नकली चाँदी चढ़ाए जाने के मामले पर वैद ने कहा कि इस मामले की जाँच क्राइम ब्रांच को करनी चाहिए थी। उन्होंने माँग की कि जाँच के दौरान मंदिर में चढ़ाई गई चाँदी की पूरी इन्वेंट्री, CCTV फुटेज, रिकॉर्ड, संग्रहण की प्रक्रिया और चाँदी को मिंट भेजे जाने से जुड़े सभी दस्तावेजों की जाँच की जाए। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि श्रद्धालुओं ने कथित तौर पर नकली चाँदी चढ़ाई थी या फिर पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई।

आगे क्या होगा

पूर्व डीजीपी वैद ने माना कि यह कहना कठिन है कि हाफिज सईद या अन्य वांछित आतंकियों को भारत कब लाया जा सकेगा, लेकिन उन्होंने कहा कि देश उस दिन का इंतजार कर रहा है जब पाकिस्तान ऐसे लोगों को भारत को सौंपेगा ताकि आतंकी हमलों में जान गंवाने वाले लोगों को न्याय मिल सके। उन्होंने इस कदम को 'बहुत अच्छा कदम' बताते हुए कहा कि इससे आतंकवाद के खिलाफ भारत की कानूनी लड़ाई को मजबूती मिलेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन व्यावहारिक रूप से इसकी सीमाएँ स्पष्ट हैं — पाकिस्तान ने आज तक किसी भी वांछित आतंकी को भारत को नहीं सौंपा है। मुंबई हमले के बाद भी यही कानूनी रास्ते आजमाए गए थे, फिर भी हाफिज सईद पाकिस्तान में खुलेआम रहे। असली सवाल यह है कि क्या यह वारंट केवल राजनयिक बहसों में भारत का पक्ष मजबूत करेगा, या इसके पीछे कोई ठोस द्विपक्षीय या बहुपक्षीय तंत्र भी है जो इसे अमल में ला सके। जब तक FATF जैसे दबाव-तंत्र सक्रिय न हों, अदालती वारंट की सीमा कागज से आगे जाना मुश्किल होता है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पहलगाम हमले में हाफिज सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट क्यों जारी हुआ?
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने पहलगाम आतंकी हमले की जाँच में पर्याप्त साक्ष्य जुटाकर अदालत को संतुष्ट किया, जिसके बाद लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया। पूर्व DGP एसपी वैद के अनुसार, इस स्तर के हमलों की साजिश शीर्ष नेतृत्व स्तर पर रची जाती है, इसलिए मुख्य साजिशकर्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जरूरी है।
इस वारंट से भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या फायदा होगा?
वारंट जारी होने के बाद भारत CBI और इंटरपोल की मदद से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करा सकता है, जिससे हाफिज सईद की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही सीमित होगी। साथ ही, भारत-पाकिस्तान के बीच किसी भी बातचीत में भारत यह कह सकता है कि संबंधित व्यक्ति भारतीय अदालत में वांछित है और उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत सौंपा जाना चाहिए।
क्या हाफिज सईद को जल्द भारत लाया जा सकता है?
पूर्व DGP एसपी वैद ने माना कि यह कहना कठिन है कि हाफिज सईद को भारत कब लाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि देश उस दिन का इंतजार कर रहा है जब पाकिस्तान ऐसे वांछित लोगों को भारत को सौंपेगा ताकि आतंकी हमलों के पीड़ितों को न्याय मिल सके।
वैष्णो देवी नकली चाँदी मामले में एसपी वैद ने क्या माँग की?
एसपी वैद ने इस मामले में क्राइम ब्रांच द्वारा पारदर्शी और निष्पक्ष जाँच की माँग की। उन्होंने कहा कि जाँच में मंदिर में चढ़ाई गई चाँदी की पूरी इन्वेंट्री, CCTV फुटेज, रिकॉर्ड, संग्रहण प्रक्रिया और मिंट से जुड़े सभी दस्तावेजों की समीक्षा होनी चाहिए।
एसपी वैद ने किन अन्य आतंकी मामलों में इसी तरह की कानूनी कार्रवाई की वकालत की?
उन्होंने जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर के खिलाफ भी साक्ष्य जुटाकर वारंट हासिल करने की बात कही। इसके अलावा संसद हमले, जम्मू-कश्मीर विधानसभा हमले और पुलवामा हमले जैसे मामलों में भी शीर्ष साजिशकर्ताओं के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया पूरी कर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की माँग की।
राष्ट्र प्रेस
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