पहलगाम हमला: हाफिज सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट पर पूर्व DGP एसपी वैद बोले — 'पाकिस्तान पर बढ़ेगा अंतरराष्ट्रीय दबाव'
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपी वैद ने 14 जुलाई को कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के मामले में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) प्रमुख हाफिज सईद के खिलाफ भारतीय अदालत द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट एक निर्णायक कानूनी कदम है, जो पाकिस्तान पर वांछित आतंकियों को भारत को सौंपने का अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने पर्याप्त साक्ष्य जुटाकर अदालत को संतुष्ट किया, तभी यह वारंट जारी हुआ।
मुख्य घटनाक्रम
पहलगाम आतंकी हमले में 20 से अधिक लोगों की जान गई थी। पूर्व डीजीपी वैद ने कहा कि इस स्तर के हमलों की साजिश शीर्ष नेतृत्व स्तर पर रची जाती है, जबकि उन्हें अंजाम देने का काम संगठन के निचले स्तर के सदस्य करते हैं। उन्होंने कहा, 'हाफिज सईद का नाम जाँच में शामिल होना और उनके खिलाफ वारंट जारी होना पूरी कानूनी प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।' लश्कर-ए-तैयबा द्वारा किए गए अधिकांश बड़े हमलों के पीछे हाफिज सईद की कथित साजिश और रणनीति रही है — मुंबई आतंकी हमला इसका प्रमुख उदाहरण है।
अंतरराष्ट्रीय दबाव और कानूनी रास्ते
वैद ने बताया कि गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद अब CBI और इंटरपोल की मदद ली जा सकती है। रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाफिज सईद की आवाजाही सीमित होगी। उन्होंने कहा कि जब भी भारत-पाकिस्तान के बीच ऐसे मामलों पर बातचीत होगी, तब भारत यह कह सकता है कि संबंधित व्यक्ति भारतीय अदालत में वांछित है और उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत सौंपा जाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जब साक्ष्यों की माँग होती है, तब अदालत द्वारा जारी वारंट और कानूनी प्रक्रिया भारत के पक्ष को और मजबूत बनाती है।
NIA की भूमिका और अन्य आतंकी मामले
वैद ने NIA की सराहना करते हुए कहा कि एजेंसी ने पर्याप्त साक्ष्य जुटाकर अदालत को संतुष्ट किया। उन्होंने यह भी कहा कि इसी तरह जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर और अन्य आतंकी संगठनों के सरगनाओं के खिलाफ भी साक्ष्य जुटाकर अदालतों से वारंट हासिल किए जाने चाहिए। उन्होंने संसद हमले, जम्मू-कश्मीर विधानसभा हमले और पुलवामा हमले जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि जहाँ भी संबंधित आतंकी संगठनों की भूमिका सामने आई है, वहाँ शीर्ष साजिशकर्ताओं के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया पूरी कर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया जाना चाहिए।
वैष्णो देवी मामले में पारदर्शी जाँच की माँग
वैष्णो देवी मंदिर में कथित नकली चाँदी चढ़ाए जाने के मामले पर वैद ने कहा कि इस मामले की जाँच क्राइम ब्रांच को करनी चाहिए थी। उन्होंने माँग की कि जाँच के दौरान मंदिर में चढ़ाई गई चाँदी की पूरी इन्वेंट्री, CCTV फुटेज, रिकॉर्ड, संग्रहण की प्रक्रिया और चाँदी को मिंट भेजे जाने से जुड़े सभी दस्तावेजों की जाँच की जाए। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि श्रद्धालुओं ने कथित तौर पर नकली चाँदी चढ़ाई थी या फिर पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई।
आगे क्या होगा
पूर्व डीजीपी वैद ने माना कि यह कहना कठिन है कि हाफिज सईद या अन्य वांछित आतंकियों को भारत कब लाया जा सकेगा, लेकिन उन्होंने कहा कि देश उस दिन का इंतजार कर रहा है जब पाकिस्तान ऐसे लोगों को भारत को सौंपेगा ताकि आतंकी हमलों में जान गंवाने वाले लोगों को न्याय मिल सके। उन्होंने इस कदम को 'बहुत अच्छा कदम' बताते हुए कहा कि इससे आतंकवाद के खिलाफ भारत की कानूनी लड़ाई को मजबूती मिलेगी।