23 जुलाई 2026
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सिंधु जल संधि निलंबन जारी रहेगा जब तक सीमा पार आतंक नहीं रुकता — भारत का UNSC में पाकिस्तान को दो-टूक जवाब

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सिंधु जल संधि निलंबन जारी रहेगा जब तक सीमा पार आतंक नहीं रुकता — भारत का UNSC में पाकिस्तान को दो-टूक जवाब

सारांश

UNSC की बहस में भारत ने साफ कर दिया — सिंधु जल संधि की बहाली तब तक नहीं होगी जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को राज्य नीति के रूप में इस्तेमाल करता रहेगा। पहलगाम में 24 लोगों की हत्या के बाद लिया गया यह फैसला अब भारत की अडिग कूटनीतिक शर्त बन चुका है।

मुख्य बातें

भारत ने UNSC में स्पष्ट किया कि सिंधु जल संधि का निलंबन तब तक जारी रहेगा जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद बंद नहीं करता।
भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी.
हरीश ने 23 जुलाई 2026 को सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान के आरोपों का करारा जवाब दिया।
अप्रैल 2025 में पहलगाम हमले में 24 लोगों की हत्या के बाद भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि निलंबित की थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था, "पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते।" पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में जून 2026 से अब तक 30 से अधिक कश्मीरी प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं; 14 जुलाई को तरारखाल में 6 की हत्या हुई।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 23 जुलाई 2026 को भारत ने पाकिस्तान को स्पष्ट शब्दों में कहा कि सिंधु जल संधि का निलंबन तब तक जारी रहेगा, जब तक इस्लामाबाद सीमा पार आतंकवाद को अपनी राज्य नीति के रूप में इस्तेमाल करता रहेगा। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने यह कड़ा संदेश उस समय दिया जब पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने संधि निलंबन को 'एकतरफा और अवैध' करार देने की कोशिश की।

मुख्य घटनाक्रम

सुरक्षा परिषद में 'प्राकृतिक संसाधनों का शासन: शांति, सुरक्षा और समृद्धि की नींव' विषय पर आयोजित उच्चस्तरीय खुली बहस के दौरान पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने सिंधु जल संधि और जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत संधि को एकतरफा तरीके से स्थगित कर रहा है।

इस पर पी. हरीश ने पलटवार करते हुए कहा, "जब सीमा पार आतंकवाद को नियमित रूप से राज्य की नीति के एक साधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, तब आपसी विश्वास और सद्भावना के आधार पर सहयोग की अपेक्षा नहीं की जा सकती।" उन्होंने यह भी कहा कि सिंधु जल संधि पर भारत का रुख "स्पष्ट और लगातार एक जैसा" रहा है।

पहलगाम हमला: संधि निलंबन की पृष्ठभूमि

अप्रैल 2025 में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के पर्यटन स्थल पहलगाम में धर्म-आधारित हमला किया, जिसमें 24 निर्दोष लोगों की हत्या की गई। इस नृशंस हमले के बाद भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया और पाकिस्तान के साथ व्यापार भी रोक दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस समय इन फैसलों का कारण बताते हुए कहा था, "पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते।" यह वक्तव्य भारत की नीतिगत दृढ़ता का प्रतीक बन गया।

जम्मू-कश्मीर पर भारत का संवैधानिक पक्ष

पी. हरीश ने स्पष्ट किया कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा है और यह संवैधानिक एवं कानूनी सच्चाई है जिसे पाकिस्तान जानबूझकर नजरअंदाज करता है। उन्होंने कहा, "जम्मू और कश्मीर के संबंध में एकमात्र लंबित मुद्दा पाकिस्तान द्वारा भारत के संप्रभु क्षेत्र पर खुला हमला और अवैध कब्जा है।"

उन्होंने 21 अप्रैल 1948 के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उस प्रस्ताव का भी उल्लेख किया, जिसमें पाकिस्तान से जम्मू-कश्मीर से अपने सैनिकों और नागरिकों को वापस बुलाने, घुसपैठ रोकने और वहाँ लड़ रहे लोगों की मदद न करने की माँग की गई थी।

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में दमन

भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान के अपने कब्जे वाले इलाके में हो रहे दमन की ओर भी ध्यान दिलाया। जून 2026 से अब तक पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने कश्मीरियों के विरोध प्रदर्शनों को कुचलते हुए 30 से अधिक लोगों को मार डाला है। 14 जुलाई 2026 को तरारखाल में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने छह कश्मीरियों की हत्या की।

हरीश ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए कहा, "भारत पर उंगली उठाने के बजाय, पाकिस्तान को अपना घर ठीक करके अपनी और अपने लोगों की बेहतर सेवा करनी चाहिए।"

आगे क्या

भारत की यह स्पष्ट नीतिगत घोषणा संकेत देती है कि सिंधु जल संधि की बहाली सीमा पार आतंकवाद की समाप्ति से सीधे जुड़ी है। जब तक पाकिस्तान अपनी राज्य नीति में ठोस बदलाव नहीं करता, द्विपक्षीय जल-साझेदारी की कोई भी बहाली संभव नहीं दिखती। यह रुख भारत की व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है जो आतंकवाद और द्विपक्षीय सहयोग को अलग-अलग नहीं देखती।

संपादकीय दृष्टिकोण

यानी जल-सुरक्षा, को आतंकवाद-विरोधी एजेंडे से जोड़ती है। गौरतलब है कि 1960 की सिंधु जल संधि को अब तक युद्धों के दौरान भी नहीं छेड़ा गया था, इसलिए इसका निलंबन अभूतपूर्व है। आलोचकों का कहना है कि इस कदम की अंतरराष्ट्रीय जल-कानून के तहत वैधता विवादास्पद बनी रहेगी, जो पाकिस्तान को वैश्विक मंचों पर सहानुभूति जुटाने का अवसर दे सकती है। असली परीक्षा यह है कि क्या यह रणनीति पाकिस्तान के व्यवहार में वास्तविक बदलाव लाती है, या दोनों देश एक लंबे कूटनीतिक गतिरोध में फँसे रहते हैं।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ने सिंधु जल संधि क्यों निलंबित की?
अप्रैल 2025 में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 24 पर्यटकों की हत्या की, जिसके बाद भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि निलंबित कर दी। प्रधानमंत्री मोदी ने इस फैसले को उचित ठहराते हुए कहा था कि 'पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते।'
UNSC में भारत ने 23 जुलाई को क्या कहा?
भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को राज्य नीति के रूप में इस्तेमाल करता रहेगा, तब तक सिंधु जल संधि निलंबित रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि आपसी विश्वास के बिना सहयोग की अपेक्षा नहीं की जा सकती।
सिंधु जल संधि की बहाली कब होगी?
भारत ने स्पष्ट किया है कि संधि की बहाली सीमा पार आतंकवाद की समाप्ति पर निर्भर है। पाकिस्तान की ओर से अभी तक कोई ठोस कदम न उठाए जाने के कारण बहाली की कोई निश्चित समयसीमा नहीं है।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में क्या हो रहा है?
जून 2026 से अब तक पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने वहाँ विरोध प्रदर्शनों को दबाते हुए 30 से अधिक कश्मीरियों को मार डाला है। 14 जुलाई 2026 को तरारखाल में छह कश्मीरियों की हत्या की गई।
जम्मू-कश्मीर पर भारत का संयुक्त राष्ट्र में क्या पक्ष है?
भारत ने UNSC में दोहराया कि जम्मू और कश्मीर उसका संवैधानिक और अटूट हिस्सा है। भारत के अनुसार एकमात्र लंबित मुद्दा पाकिस्तान द्वारा भारतीय क्षेत्र पर अवैध कब्जा है, न कि कोई द्विपक्षीय विवाद।
राष्ट्र प्रेस
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