सिंधु जल संधि निलंबन जारी रहेगा जब तक सीमा पार आतंक नहीं रुकता — भारत का UNSC में पाकिस्तान को दो-टूक जवाब
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 23 जुलाई 2026 को भारत ने पाकिस्तान को स्पष्ट शब्दों में कहा कि सिंधु जल संधि का निलंबन तब तक जारी रहेगा, जब तक इस्लामाबाद सीमा पार आतंकवाद को अपनी राज्य नीति के रूप में इस्तेमाल करता रहेगा। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने यह कड़ा संदेश उस समय दिया जब पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने संधि निलंबन को 'एकतरफा और अवैध' करार देने की कोशिश की।
मुख्य घटनाक्रम
सुरक्षा परिषद में 'प्राकृतिक संसाधनों का शासन: शांति, सुरक्षा और समृद्धि की नींव' विषय पर आयोजित उच्चस्तरीय खुली बहस के दौरान पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने सिंधु जल संधि और जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत संधि को एकतरफा तरीके से स्थगित कर रहा है।
इस पर पी. हरीश ने पलटवार करते हुए कहा, "जब सीमा पार आतंकवाद को नियमित रूप से राज्य की नीति के एक साधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, तब आपसी विश्वास और सद्भावना के आधार पर सहयोग की अपेक्षा नहीं की जा सकती।" उन्होंने यह भी कहा कि सिंधु जल संधि पर भारत का रुख "स्पष्ट और लगातार एक जैसा" रहा है।
पहलगाम हमला: संधि निलंबन की पृष्ठभूमि
अप्रैल 2025 में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के पर्यटन स्थल पहलगाम में धर्म-आधारित हमला किया, जिसमें 24 निर्दोष लोगों की हत्या की गई। इस नृशंस हमले के बाद भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया और पाकिस्तान के साथ व्यापार भी रोक दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस समय इन फैसलों का कारण बताते हुए कहा था, "पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते।" यह वक्तव्य भारत की नीतिगत दृढ़ता का प्रतीक बन गया।
जम्मू-कश्मीर पर भारत का संवैधानिक पक्ष
पी. हरीश ने स्पष्ट किया कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा है और यह संवैधानिक एवं कानूनी सच्चाई है जिसे पाकिस्तान जानबूझकर नजरअंदाज करता है। उन्होंने कहा, "जम्मू और कश्मीर के संबंध में एकमात्र लंबित मुद्दा पाकिस्तान द्वारा भारत के संप्रभु क्षेत्र पर खुला हमला और अवैध कब्जा है।"
उन्होंने 21 अप्रैल 1948 के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उस प्रस्ताव का भी उल्लेख किया, जिसमें पाकिस्तान से जम्मू-कश्मीर से अपने सैनिकों और नागरिकों को वापस बुलाने, घुसपैठ रोकने और वहाँ लड़ रहे लोगों की मदद न करने की माँग की गई थी।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में दमन
भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान के अपने कब्जे वाले इलाके में हो रहे दमन की ओर भी ध्यान दिलाया। जून 2026 से अब तक पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने कश्मीरियों के विरोध प्रदर्शनों को कुचलते हुए 30 से अधिक लोगों को मार डाला है। 14 जुलाई 2026 को तरारखाल में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने छह कश्मीरियों की हत्या की।
हरीश ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए कहा, "भारत पर उंगली उठाने के बजाय, पाकिस्तान को अपना घर ठीक करके अपनी और अपने लोगों की बेहतर सेवा करनी चाहिए।"
आगे क्या
भारत की यह स्पष्ट नीतिगत घोषणा संकेत देती है कि सिंधु जल संधि की बहाली सीमा पार आतंकवाद की समाप्ति से सीधे जुड़ी है। जब तक पाकिस्तान अपनी राज्य नीति में ठोस बदलाव नहीं करता, द्विपक्षीय जल-साझेदारी की कोई भी बहाली संभव नहीं दिखती। यह रुख भारत की व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है जो आतंकवाद और द्विपक्षीय सहयोग को अलग-अलग नहीं देखती।