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सिंधु जल संधि पर डिफेंस एक्सपर्ट अनिल गौर: 'पाकिस्तान को ज़रूरत से ज़्यादा पानी, भारत को नुकसान'

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सिंधु जल संधि पर डिफेंस एक्सपर्ट अनिल गौर: 'पाकिस्तान को ज़रूरत से ज़्यादा पानी, भारत को नुकसान'

सारांश

डिफेंस एक्सपर्ट अनिल गौर का सीधा संदेश — सिंधु जल संधि में पाकिस्तान को ज़रूरत से ज़्यादा पानी मिलता रहा है और भारत को नुकसान। अब जब तक पाकिस्तान आतंकवाद नहीं रोकता, पानी पर कोई बातचीत नहीं।

मुख्य बातें

डिफेंस एक्सपर्ट अनिल गौर ने 21 जुलाई को जम्मू में सिंधु जल संधि की तत्काल समीक्षा की माँग की।
गौर के अनुसार, पाकिस्तान को संधि के तहत ज़रूरत से अधिक पानी मिलता रहा है जबकि भारत को अपेक्षाकृत कम।
प्रधानमंत्री मोदी के 'बातचीत और आतंकवाद साथ-साथ नहीं चल सकते' वक्तव्य का हवाला देते हुए गौर ने संधि निलंबन का समर्थन किया।
हाल की दो-तीन घुसपैठ घटनाओं का उल्लेख करते हुए गौर ने पाकिस्तानी नेतृत्व को आगाह किया।
गौर का स्पष्ट संदेश — पहले आतंकवाद बंद हो, उसके बाद ही जल संधि पर वार्ता संभव।

डिफेंस एक्सपर्ट अनिल गौर ने 21 जुलाई को जम्मू में सिंधु जल संधि (इंडस वाटर ट्रीटी) पर भारत के कड़े रुख का समर्थन करते हुए कहा कि मौजूदा संधि की तत्काल समीक्षा ज़रूरी है, क्योंकि शुरू से ही पाकिस्तान को आवश्यकता से अधिक जल आवंटन मिलता रहा है जबकि भारत को अपेक्षाकृत कम। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद को बढ़ावा मिलता रहेगा, तब तक इस संधि पर किसी भी वार्ता का कोई प्रश्न नहीं उठता।

संधि की समीक्षा क्यों ज़रूरी है

अनिल गौर के अनुसार, सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को जितना पानी दिया जा रहा है, उसकी वास्तविक ज़रूरत उससे कहीं कम है। उन्होंने तर्क दिया कि पाकिस्तान में अन्य नदियों का पानी भी पहुँचता है, जो उसकी आवश्यकता पूरी करने के लिए पर्याप्त है। दूसरी ओर, भारत की बढ़ती जनसंख्या और कृषि-औद्योगिक माँग को देखते हुए इस पानी की ज़रूरत यहाँ कहीं अधिक है।

'जैसे-जैसे भारत की ज़रूरतें बढ़ती जा रही हैं, पानी का आवंटन उसी अनुपात में होना चाहिए,' गौर ने कहा। उनके अनुसार, अब पाकिस्तान को उसकी वास्तविक ज़रूरत के हिसाब से ही जल आवंटन मिलना चाहिए।

बातचीत और आतंकवाद एक साथ नहीं

गौर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस वक्तव्य का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि 'बातचीत और आतंकवाद साथ-साथ नहीं चल सकते।' गौर ने इसी सिद्धांत को सिंधु जल संधि पर लागू करते हुए कहा कि इसीलिए यह संधि रद्द की गई है। उनका मानना है कि पाकिस्तान को पहले आतंकवाद पर अंकुश लगाना होगा, उसके बाद ही किसी भी वार्ता की संभावना बन सकती है।

हालिया घुसपैठ की घटनाएँ

डिफेंस एक्सपर्ट ने हाल की दो-तीन घुसपैठ की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पाकिस्तान का शीर्ष नेतृत्व यह तय करे कि उसे भारत के साथ किस तरह के संबंध चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पाकिस्तान इसी तरह की शत्रुतापूर्ण गतिविधियाँ जारी रखता है, तो उसे पानी के मुद्दे पर किसी सहयोग की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए।

'अगर पाकिस्तान चाहता है कि इस मुद्दे पर ठीक तरह से बात आगे बढ़े, तो पहले आतंकवाद बंद करे — फिर बैठकर बातचीत होगी,' गौर ने कहा।

आगे क्या होगा

भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने के बाद दोनों देशों के बीच जल-कूटनीति एक संवेदनशील मोड़ पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पाकिस्तान की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए जाते, भारत अपने जल संसाधनों पर नियंत्रण और मज़बूत करता जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब सीमा पर तनाव लगातार बना हुआ है और द्विपक्षीय संबंध अपने न्यूनतम स्तर पर हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

केवल पहलगाम जैसी घटनाओं के बाद नहीं। असली परीक्षा यह है कि क्या भारत संधि के निलंबन को एक कूटनीतिक उपकरण के रूप में प्रभावी ढंग से इस्तेमाल कर पाएगा, या यह केवल बयानबाज़ी तक सीमित रहेगा। जल-कूटनीति और सुरक्षा नीति को एक ही तराज़ू पर तौलना रणनीतिक रूप से समझ में आता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय जल कानून और विश्व बैंक की मध्यस्थता भूमिका इसे जटिल बनाती है — जिस पर मुख्यधारा की कवरेज प्रायः ध्यान नहीं देती।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिंधु जल संधि क्या है और भारत ने इसे क्यों निलंबित किया?
सिंधु जल संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई थी, जिसके तहत सिंधु नदी तंत्र के जल का बँटवारा तय किया गया था। भारत ने कथित तौर पर सीमा पार आतंकवाद के मद्देनज़र इस संधि को निलंबित किया है।
अनिल गौर के अनुसार संधि की समीक्षा क्यों ज़रूरी है?
डिफेंस एक्सपर्ट अनिल गौर का कहना है कि मौजूदा संधि के तहत पाकिस्तान को ज़रूरत से अधिक पानी मिलता है जबकि भारत की बढ़ती आबादी और कृषि-औद्योगिक माँग को देखते हुए यहाँ पानी की अधिक ज़रूरत है। पाकिस्तान में अन्य नदियों का पानी भी उपलब्ध है जो उसकी आवश्यकता पूरी कर सकता है।
क्या पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि पर बातचीत दोबारा शुरू हो सकती है?
गौर के अनुसार, बातचीत तभी संभव है जब पाकिस्तान आतंकवाद को पूरी तरह बंद करे। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के वक्तव्य का हवाला दिया कि 'बातचीत और आतंकवाद साथ-साथ नहीं चल सकते।'
हालिया घुसपैठ घटनाओं का सिंधु जल संधि से क्या संबंध है?
गौर ने हाल की दो-तीन घुसपैठ घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये घटनाएँ यह साबित करती हैं कि पाकिस्तान अभी भी शत्रुतापूर्ण रवैया अपना रहा है। जब तक यह रवैया नहीं बदलता, भारत जल संधि पर किसी सहयोग के लिए तैयार नहीं होगा।
सिंधु जल संधि के निलंबन से भारत को क्या फायदा होगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, संधि के निलंबन से भारत को पश्चिमी नदियों — झेलम, चिनाब और सिंधु — के जल पर अधिक नियंत्रण मिल सकता है, जो अभी तक पाकिस्तान के लिए आवंटित थीं। हालाँकि, इसके व्यावहारिक क्रियान्वयन और अंतरराष्ट्रीय कानूनी पहलुओं पर अभी विचार-विमर्श जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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