तारिक खान: आमिर खान के चचेरे भाई जो 'यादों की बारात' से बने थे 70 के दशक के गिटार-स्टार
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड अभिनेता तारिक खान, जो सुपरस्टार आमिर खान के चचेरे भाई हैं, 1970 के दशक में अपनी चॉकलेटी इमेज, धमाकेदार डांस और गिटार बजाने के अनोखे अंदाज़ से युवा दर्शकों के चहेते बन गए थे। 9 नवंबर 1951 को लखनऊ में जन्मे तारिक का बॉलीवुड से पुराना नाता था — उनके मामा और जाने-माने निर्माता-निर्देशक नासिर हुसैन ने उन्हें इस दुनिया से परिचय कराया। हालाँकि, 1995 में अपनी आखिरी फिल्म के बाद उन्होंने फ़िल्मी दुनिया को अलविदा कह दिया।
फ़िल्मी दुनिया में कदम
तारिक खान के परिवार की जड़ें शुरू से ही हिंदी सिनेमा से जुड़ी हुई थीं। उनके मामा नासिर हुसैन हिंदी फ़िल्मों के प्रतिष्ठित निर्माता और निर्देशक थे। तारिक ने अपने करियर की शुरुआत 1971 में नासिर हुसैन की ही फिल्म 'कारवां' से की। इसी नाते, आमिर खान — जो नासिर हुसैन के बेटे हैं — तारिक के चचेरे भाई हैं।
'यादों की बारात' से मिली बड़ी पहचान
साल 1973 में आई फिल्म 'यादों की बारात' ने तारिक खान को बतौर अभिनेता बड़ी पहचान दिलाई। इस फिल्म में धर्मेंद्र, विजय अरोड़ा और ज़ीनत अमान जैसे दिग्गज कलाकार थे। फिल्म के गाने 'आप के कमरे में' और 'लेकर हम दीवाना दिल' में तारिक का गिटार बजाते हुए डांस करने का अंदाज़ युवाओं में बेहद लोकप्रिय हुआ। गौरतलब है कि इसी फिल्म में आमिर खान ने तारिक के किरदार मोंटो का बचपन वाला रोल निभाया था — यह आमिर के शुरुआती परदे पर दिखने का दुर्लभ उदाहरण है।
फ़िल्मफेयर नामांकन और लोकप्रियता का शिखर
1975 में तारिक फिल्म 'ज़ख्मी' में नज़र आए। इसके दो साल बाद 1977 में आई 'हम किसी से कम नहीं' ने उनकी लोकप्रियता को नई ऊँचाई दी। इस फिल्म में ऋषि कपूर, काजल किरण और अमजद खान भी अहम भूमिकाओं में थे। इस भूमिका के लिए तारिक को फ़िल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार के लिए नामांकन मिला — जो उनके करियर का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर रहा। इसके अलावा उन्होंने 'जमाने को दिखाना है', 'शौकीन', 'पसंद अपनी अपनी', 'मंजिल मंजिल', 'बात बन जाए' और 'जबरदस्त' जैसी फिल्मों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
फ़िल्मों से दूरी और नया रास्ता
यह ऐसे समय की बात है जब तारिक के पास फ़िल्मों की कोई कमी नहीं थी, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें मनचाहा काम मिलना बंद होता गया। उनकी आखिरी फिल्म 'मेरा दामाद' 1995 में आई। एक साक्षात्कार में तारिक ने बताया था कि फ़िल्मों में लगातार काम न मिलने की स्थिति ने उन्हें अपना पेशा बदलने पर मजबूर किया। इसके बाद उन्होंने कार्गो, कूरियर और ट्रैवल के क्षेत्र में काम किया।
बॉलीवुड की भूली-बिसरी विरासत
तारिक खान की कहानी उन तमाम प्रतिभाशाली अभिनेताओं की याद दिलाती है, जो एक दौर में ज़बरदस्त लोकप्रियता पाने के बाद बदलते समय और बदलती अभिनेता-पसंद के साथ मुख्यधारा से बाहर हो गए। यह बॉलीवुड इतिहास का वह पहलू है जो अक्सर मुख्यधारा की चर्चा से ओझल रह जाता है। उनके भतीजे आमिर खान आज भी 'मि. परफेक्शनिस्ट' के रूप में उद्योग में सक्रिय हैं, जबकि तारिक का सितारा 70 के दशक की चकाचौंध में ही डूब गया।