वाजिद खान की जयंती: सलमान खान की फिल्म से मिली पहचान, 'दबंग' से 'एक था टाइगर' तक रचा संगीत का इतिहास
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड के सुप्रसिद्ध संगीतकार, म्यूजिक डायरेक्टर और प्लेबैक सिंगर वाजिद खान का जन्म 7 अक्टूबर 1977 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में हुआ था। साजिद-वाजिद की विख्यात जोड़ी के सदस्य के रूप में उन्होंने हिंदी सिनेमा को एक से बढ़कर एक सदाबहार धुनें दीं, जो आज भी करोड़ों श्रोताओं के दिलों में ज़िंदा हैं। 1 जून 2020 को मुंबई में महज 42 वर्ष की आयु में उनका असमय निधन हो गया, किंतु उनका संगीत-सफर बॉलीवुड के इतिहास में अमर हो गया।
संगीत की घराने से मिली विरासत
वाजिद खान का पालन-पोषण एक समृद्ध संगीत परंपरा के बीच हुआ। उनके पिता उस्ताद शराफत अली खान एक प्रतिष्ठित तबला वादक थे, जबकि उनके मामा उस्ताद फैज़ अहमद खान शास्त्रीय संगीत के जाने-माने गायक थे। घर में गूँजते रागों और तालों के बीच बड़े होने से वाजिद को संगीत की गहरी समझ बचपन से ही मिल गई। गिटार से उनका विशेष लगाव था और यही लगाव आगे चलकर उनकी पहचान बनी।
साजिद-वाजिद: बॉलीवुड की अनोखी भाई-जोड़ी
वाजिद के बड़े भाई साजिद खान के साथ मिलकर उन्होंने बॉलीवुड में 'साजिद-वाजिद' की संगीतकार जोड़ी के रूप में अपनी पहचान बनाई। इस जोड़ी ने अपने करियर की शुरुआत 1998 में सलमान खान की फिल्म 'प्यार किया तो डरना क्या' से की और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। सलमान खान के साथ यह जुड़ाव उनके करियर का एक मज़बूत आधार साबित हुआ।
इसके बाद इस जोड़ी ने 'तेरे नाम', 'मुझसे शादी करोगी', 'पार्टनर', 'वांटेड', 'वीर', 'दबंग' और 'एक था टाइगर' जैसी अनेक सुपरहिट फिल्मों में यादगार संगीत दिया। इन फिल्मों के गाने आज भी शादी-समारोहों से लेकर युवाओं की प्लेलिस्ट तक में शामिल रहते हैं।
प्लेबैक सिंगर के रूप में दमदार आवाज़
वाजिद खान केवल पर्दे के पीछे से धुनें बनाने तक सीमित नहीं थे — उनकी आवाज़ भी उतनी ही प्रभावशाली थी। उन्होंने 'हुड हुड दबंग', 'मेरा ही जलवा', 'सोनी दे नखरे', 'फेविकोल से', 'तुझे अक्सा बीच घुमा दूं', 'पांडे जी सीटी' और 'हमका पीनी है' जैसे लोकप्रिय गाने अपनी दमदार आवाज़ में गाए। इन गानों ने उन्हें एक बहुआयामी संगीत प्रतिभा के रूप में स्थापित किया।
निजी जीवन और असमय विदाई
वाजिद खान ने 2003 में कमलरुख खान से विवाह किया। इस दंपती की दो बेटियाँ हैं। 1 जून 2020 को मुंबई के एक अस्पताल में 42 वर्ष की अल्पायु में उनका निधन हो गया। संगीत जगत के लिए यह एक अपूरणीय क्षति थी। यह ऐसे समय में आया जब हिंदी फिल्म उद्योग पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा था।
विरासत जो अमर है
वाजिद खान की धुनें आज भी उतनी ही ताज़ी और ऊर्जावान लगती हैं जितनी पहले दिन थीं। गौरतलब है कि साजिद-वाजिद ने दो दशकों से अधिक समय में बॉलीवुड को दर्जनों हिट गाने दिए, जो हर पीढ़ी के श्रोताओं को जोड़ते हैं। उनकी जयंती पर उनके प्रशंसक और सहकर्मी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहे हैं। संगीत की दुनिया में वाजिद खान का योगदान आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करता रहेगा।