8 नवंबर 2026
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काली पूजा-दिवाली एकसाथ: कोलकाता में लाल गुड़हल की माला 5 गुना महंगी, 108 फूलों की माला ₹200 तक

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काली पूजा-दिवाली एकसाथ: कोलकाता में लाल गुड़हल की माला 5 गुना महंगी, 108 फूलों की माला ₹200 तक

सारांश

इस साल काली पूजा और दिवाली एक ही दिन पड़ने से कोलकाता के फूल बाज़ारों में अभूतपूर्व उछाल आया। 108 लाल गुड़हल की माला ₹25 से ₹200 तक जा पहुँची — यानी हफ्ते भर में पाँच गुना वृद्धि। किसान स्तर से शुरू होकर थोक और खुदरा तक फैली इस महँगाई ने भक्तों की जेब पर गहरा असर डाला।

मुख्य बातें

8 नवंबर 2026 को कोलकाता के खुदरा बाज़ारों में लाल गुड़हल की कीमतें सामान्य से 5 गुना से अधिक हो गईं।
108 फूलों की माला एक हफ्ते में ₹25-30 से बढ़कर ₹150-200 हो गई।
1,008 फूलों की माला पिछले साल की ₹700-800 की तुलना में इस बार ₹1,000-1,200 में बिकी।
मूल्य वृद्धि की शुरुआत किसान स्तर से होकर थोक और फिर गरियाहाट, कस्बा बाज़ार जैसे खुदरा बाज़ारों तक पहुँची।
कमल के फूल भी दोगुने — ₹10-15 से ₹30-35 प्रति फूल; गेंदा ₹180-220 प्रति किलो पर बिका।
मूल्य वृद्धि का मुख्य कारण इस वर्ष काली पूजा और दिवाली का एक ही दिन पड़ना।

कोलकाता के खुदरा फूल बाज़ारों में 8 नवंबर को काली पूजा के लिए अनिवार्य लाल गुड़हल के फूलों की कीमतें सामान्य से पाँच गुना से भी अधिक हो गईं। इस असाधारण मूल्य वृद्धि की प्रमुख वजह यह है कि इस वर्ष काली पूजा और दिवाली एक ही दिन पड़ रहे हैं, जिससे दोनों पर्वों की माँग एक साथ उमड़ पड़ी।

फूलों की कीमतों में कितना उछाल

खुदरा बाज़ारों में 108 लाल गुड़हल के फूलों की एक माला रविवार को ₹150 से ₹200 के बीच बिक रही थी, जो इलाके के अनुसार अलग-अलग रही। यह वही माला है जो मात्र एक हफ्ते पहले ₹25 से ₹30 में सहज उपलब्ध थी।

1,008 लाल गुड़हल के फूलों वाली माला रविवार को ₹1,000 से ₹1,200 के बीच बिक रही थी, जबकि पिछले साल इसी माला की अधिकतम कीमत ₹700 से ₹800 थी — यानी साल-दर-साल लगभग दोगुनी वृद्धि।

किसान स्तर से शुरू होती है महँगाई

दक्षिण कोलकाता के गरियाहाट बाज़ार के एक फूल विक्रेता के अनुसार, 'लाल गुड़हल की कीमतों में बढ़ोतरी किसानों के स्तर से ही शुरू हो जाती है, जो अपने फूल ऊँचे दामों पर बेचते हैं। इसका असर सबसे पहले थोक बाज़ारों में और फिर खुदरा बाज़ारों में देखने को मिलता है।'

कस्बा बाज़ार के एक अन्य विक्रेता ने बताया कि रविवार को अधिकतर दुकानदारों ने लाल गुड़हल को अलग-अलग (खुले) बेचना बंद कर दिया। माला बनाकर बेचने में गूँथने की मज़दूरी भी जुड़ती है, जिससे मार्जिन बेहतर रहता है।

अन्य फूलों पर भी असर

लाल गुड़हल के अलावा कमल के फूल भी रविवार को सामान्य से दोगुने से अधिक दाम पर बिके। जो कमल एक हफ्ते पहले ₹10 से ₹15 में मिल रहा था, वह रविवार को ₹30 से ₹35 प्रति फूल हो गया।

नारंगी गेंदे के फूल ₹180 से ₹200 प्रति किलो और पीले गेंदे के फूल ₹210 से ₹220 प्रति किलो के भाव पर बिके।

माँग का यह संयोग क्यों बड़ा फर्क डालता है

गौरतलब है कि लाल गुड़हल के फूल वैसे तो साल भर काफी कम कीमत पर मिलते हैं, लेकिन काली पूजा के करीब इनकी माँग कई गुना बढ़ जाती है। इस साल दिवाली का एक साथ पड़ना आपूर्ति-श्रृंखला के लिए असाधारण दबाव बन गया। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में त्योहारी सीज़न में फूलों की कीमतें वैसे भी ऊँची रहती हैं।

आने वाले दिनों में — जब काली पूजा और दिवाली का उत्सव समाप्त होगा — बाज़ार विशेषज्ञों का अनुमान है कि कीमतें धीरे-धीरे सामान्य स्तर पर लौट आएंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिस पर नीतिगत ध्यान अब तक न के बराबर रहा है।
RashtraPress
8 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

काली पूजा में लाल गुड़हल के फूल इतने महँगे क्यों हो गए?
इस साल काली पूजा और दिवाली एक ही दिन पड़ने से दोनों पर्वों की माँग एकसाथ बढ़ गई, जिससे आपूर्ति कम पड़ी और कीमतें पाँच गुना तक उछल गईं। किसान स्तर पर ऊँचे दाम मिलने से यह वृद्धि थोक और खुदरा बाज़ारों तक पहुँची।
कोलकाता में 108 लाल गुड़हल की माला की कीमत कितनी हो गई?
8 नवंबर 2026 को कोलकाता के खुदरा बाज़ारों में 108 लाल गुड़हल के फूलों की माला ₹150 से ₹200 के बीच बिक रही थी। एक हफ्ते पहले यही माला ₹25 से ₹30 में उपलब्ध थी।
1,008 लाल गुड़हल के फूलों की माला की कीमत पिछले साल से कितनी बढ़ी?
2026 में 1,008 लाल गुड़हल के फूलों की माला ₹1,000 से ₹1,200 के बीच बिकी, जबकि पिछले साल इसकी अधिकतम कीमत ₹700 से ₹800 थी — यानी साल-दर-साल लगभग दोगुनी वृद्धि।
काली पूजा में कमल और गेंदे के फूलों की कीमत क्या रही?
कमल के फूल एक हफ्ते पहले के ₹10-15 से बढ़कर ₹30-35 प्रति फूल हो गए। नारंगी गेंदा ₹180-200 प्रति किलो और पीला गेंदा ₹210-220 प्रति किलो पर बिका।
फूल विक्रेताओं ने खुले (अलग-अलग) फूल बेचना क्यों बंद किया?
कस्बा बाज़ार के विक्रेताओं के अनुसार, माला बनाकर बेचने में फूलों के दाम के साथ गूँथने की मज़दूरी भी जुड़ती है, जिससे लाभ अधिक होता है। इसलिए रविवार को अधिकतर दुकानदारों ने खुले फूल बेचना बंद करके माला के रूप में ही फूल बेचे।
राष्ट्र प्रेस
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