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ट्रंप ने भारत की चुनाव प्रणाली को सराहा, भाजपा बोली — विपक्ष को मिला करारा जवाब

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ट्रंप ने भारत की चुनाव प्रणाली को सराहा, भाजपा बोली — विपक्ष को मिला करारा जवाब

सारांश

ट्रंप ने 'सेव अमेरिका एक्ट' के समर्थन में भारत की चुनाव प्रणाली का हवाला दिया — और भाजपा ने इसे विपक्ष के खिलाफ तुरुप के पत्ते की तरह इस्तेमाल किया। प्रवीण खंडेलवाल से लेकर गुरु प्रकाश तक, पार्टी ने एकसुर में कहा: जिस आयोग पर देश में सवाल उठते हैं, उसकी तारीफ अब वाशिंगटन से भी आ रही है।

मुख्य बातें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'सेव अमेरिका एक्ट' के समर्थन में भारत की चुनाव प्रणाली का उल्लेख किया।
भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने ट्रंप के बयान को चुनाव आयोग की निष्पक्षता का वैश्विक प्रमाण बताया।
भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा — अमेरिका अब भारत जैसी चुनावी व्यवस्था अपनाना चाहता है।
भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने याद दिलाया कि भारत का चुनाव आयोग अफ्रीकी देशों में भी चुनाव सफलतापूर्वक करा चुका है।
भाजपा नेताओं ने विपक्ष से कहा — जिस आयोग पर तुम सवाल उठाते हो, उसकी तारीफ विदेशों में हो रही है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'सेव अमेरिका एक्ट' के समर्थन में भारत की चुनाव प्रणाली का हवाला दिया, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने इसे भारतीय चुनाव आयोग की पारदर्शिता और निष्पक्षता की वैश्विक स्वीकृति बताया। 18 अगस्त को नई दिल्ली में प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेताओं ने कहा कि ट्रंप का यह बयान उन विपक्षी दलों के लिए स्पष्ट उत्तर है जो बार-बार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर संदेह जताते हैं।

भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल की प्रतिक्रिया

भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा भारत की चुनाव प्रणाली का उल्लेख इस बात का प्रमाण है कि भारत का चुनाव आयोग पूरी निष्पक्षता से कार्य करता है। उन्होंने कहा, 'इससे साफ पता चलता है कि भारत का चुनाव आयोग कितनी लगन, ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ काम करता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान उन सभी लोगों के लिए एक करारा जवाब है जो बार-बार भारत के चुनाव आयोग और उसके कामकाज पर सवाल उठाते हैं।'

खंडेलवाल ने आगे कहा, 'उन्हें कम से कम यह समझना चाहिए कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति भारत की चुनाव प्रणाली और चुनाव आयोग की तारीफ़ कर रहे हैं, तो यह दिखाता है कि हमारा चुनाव आयोग निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से काम करता है, जिसमें शक की कोई गुंजाइश नहीं है।'

भाजपा प्रवक्ताओं का रुख

भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा कि भारत की चुनावी प्रक्रिया को अब वैश्विक स्तर पर मान्यता मिल रही है और अमेरिका भी ऐसी ही व्यवस्था अपनाना चाहता है। उन्होंने कहा, 'भारत की चुनाव प्रणाली का लोहा दुनिया मानती है। अब तो अमेरिका के राष्ट्रपति ने भी इस बात पर मोहर लगा दिया है। यहां की जैसी प्रक्रिया अब वह वहां भी लागू करना चाहते हैं। आज दुनिया के बड़े लोकतंत्र एक दूसरे से सीखकर आगे बढ़ रहे हैं।'

भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने कहा, 'भारत एक सशक्त लोकतंत्र है। पूरे विश्व को हमने लोकतंत्र दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कहते हैं कि भारत लोकतंत्र की जननी है।' उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि भारत के चुनाव आयोग ने पहले भी अफ्रीका के कई देशों में चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न कराए हैं।

विपक्ष पर सीधा निशाना

गुरु प्रकाश ने विपक्षी दलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जिस चुनाव आयोग पर वे सवाल उठाते हैं, उसकी तारीफ अब विदेशों में भी हो रही है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत के विपक्षी दल, विशेष रूप से कांग्रेस, चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता को लेकर लगातार सवाल उठाते रहे हैं।

व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि भारत का चुनाव आयोग दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में चुनाव संचालन के लिए जाना जाता है, जहाँ 97 करोड़ से अधिक मतदाता पंजीकृत हैं। ट्रंप द्वारा 'सेव अमेरिका एक्ट' के संदर्भ में भारत की चुनाव प्रणाली का उल्लेख एक कूटनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है, हालाँकि विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देशों की चुनावी संरचनाएँ मूलतः भिन्न हैं। आगे यह देखना होगा कि विपक्षी दल इस घटनाक्रम पर किस प्रकार की प्रतिक्रिया देते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे संदर्भ से परे नहीं देखा जाना चाहिए — 'सेव अमेरिका एक्ट' स्वयं अमेरिका में विवादास्पद है और उसकी तुलना भारत की चुनाव प्रणाली से करना सरलीकरण हो सकता है। यह ध्यान देने योग्य है कि भारत के चुनाव आयोग की अंतरराष्ट्रीय साख वास्तविक है — वह दशकों की संस्थागत मेहनत का नतीजा है — लेकिन घरेलू आलोचनाओं को महज विदेशी तारीफ से खारिज नहीं किया जा सकता। विपक्ष के सवाल लोकतांत्रिक जवाबदेही का हिस्सा हैं; उन्हें 'देशद्रोह' की तरह पेश करना संस्थाओं को मज़बूत नहीं, कमज़ोर करता है।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप ने भारत की चुनाव प्रणाली का जिक्र किस संदर्भ में किया?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'सेव अमेरिका एक्ट' के समर्थन में भारत की चुनाव प्रणाली का हवाला दिया। उनका तर्क था कि भारत जैसी व्यवस्था अमेरिका में भी लागू की जा सकती है।
भाजपा ने ट्रंप के बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल और प्रवक्ताओं आरपी सिंह व गुरु प्रकाश ने ट्रंप के बयान को भारत के चुनाव आयोग की वैश्विक स्वीकृति बताया। उन्होंने इसे विपक्ष के उन आरोपों का जवाब करार दिया जो चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हैं।
भारत का चुनाव आयोग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्यों जाना जाता है?
भारत का चुनाव आयोग दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में 97 करोड़ से अधिक मतदाताओं के लिए चुनाव संचालित करता है। इसके अलावा यह अफ्रीका के कई देशों में भी चुनाव प्रक्रिया में सहयोग दे चुका है।
विपक्ष ने चुनाव आयोग पर क्या सवाल उठाए हैं?
विपक्षी दल, विशेष रूप से कांग्रेस, चुनाव आयोग की स्वायत्तता, आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया और चुनावी निर्णयों पर समय-समय पर सवाल उठाते रहे हैं। भाजपा का कहना है कि ट्रंप के बयान ने इन आरोपों को निराधार साबित किया है।
'सेव अमेरिका एक्ट' क्या है?
'सेव अमेरिका एक्ट' अमेरिका में प्रस्तावित एक विधेयक है जो अमेरिकी चुनाव प्रणाली में बदलाव से संबंधित है। ट्रंप ने इस विधेयक के समर्थन में भारत की चुनावी व्यवस्था को एक सफल मॉडल के रूप में उद्धृत किया।
राष्ट्र प्रेस
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