ट्रंप की विवादित टिप्पणी पर भारत का कड़ा जवाब — MEA ने कहा 'अनुचित और अशोभनीय'
सारांश
Key Takeaways
- विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ट्रंप की टिप्पणियों को 'बिना जानकारी के, अनुचित और अशोभनीय' करार दिया।
- ट्रंप ने अपने पोस्ट में दावा किया कि अमेरिका में जन्मे बच्चे भारत और चीन से पूरे परिवार को वहां ले आते हैं।
- हिंदू अमेरिकन फ़ाउंडेशन ने पोस्ट को नस्लभेदी बताते हुए गहरी नाराजगी जाहिर की।
- नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने हडसन इंस्टीट्यूट के कार्यक्रम में ट्रंप के बयानों को अनुचित बताया।
- ट्रंप ने ACLU को 'गैंगस्टर आपराधिक संगठन' कहा और अमेरिकी संविधान की प्रासंगिकता पर भी सवाल उठाए।
- यह विवाद भारत-अमेरिका के बीच जारी व्यापार शुल्क विवाद के बीच सामने आया, जिससे द्विपक्षीय संबंधों पर दबाव बढ़ सकता है।
नई दिल्ली, 23 अप्रैल — अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सोशल मीडिया पर भारत के खिलाफ की गई विवादित टिप्पणियों पर भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने बुधवार को तीखी प्रतिक्रिया दी। मंत्रालय ने इन बयानों को 'बिना जानकारी के, अनुचित और अशोभनीय' करार देते हुए स्पष्ट किया कि ये टिप्पणियां भारत-अमेरिका के दीर्घकालिक और सम्मानजनक संबंधों की वास्तविकता को नहीं दर्शातीं।
विदेश मंत्रालय की आधिकारिक प्रतिक्रिया
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर लिखा, "हमने उन टिप्पणियों को देखा है और साथ ही उनके जवाब में अमेरिकी दूतावास द्वारा जारी किए गए बाद के बयान को भी।" उन्होंने आगे कहा कि ये टिप्पणियां स्पष्ट रूप से बिना जानकारी के, अनुचित और अशोभनीय हैं।
जायसवाल ने जोर देकर कहा कि भारत-अमेरिका संबंध लंबे समय से आपसी सम्मान और साझा हितों पर आधारित रहे हैं और ट्रंप की टिप्पणियां इस ठोस रिश्ते की सच्चाई को नहीं दर्शातीं।
ट्रंप के पोस्ट में क्या था विवादित?
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में जन्मसिद्ध नागरिकता (Birthright Citizenship) के मुद्दे पर सवाल उठाते हुए कहा कि अमेरिका में जन्म लेने वाला बच्चा तुरंत नागरिक बन जाता है और फिर वह अपने पूरे परिवार को चीन, भारत या अन्य देशों से वहां ले आता है।
पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि "कैलिफोर्निया में गोरे लोगों को नौकरी नहीं मिलती, खासकर हाई-टेक कंपनियों में।" इसके अलावा ट्रंप ने अमेरिकन सिविल लिबर्टीज़ यूनियन (ACLU) को 'गैंगस्टर आपराधिक संगठन' तक कह दिया।
ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिकी संविधान उस दौर में लिखा गया था जब न हवाई यात्रा थी और न इंटरनेट, इसलिए आज के संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता पर पुनर्विचार होना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि जन्मसिद्ध नागरिकता जैसे मुद्दों पर "वकीलों की बजाय जनता को राष्ट्रीय स्तर पर मतदान के जरिए फैसला करना चाहिए।"
भारतीय नेता और संगठनों की प्रतिक्रिया
भारतीय नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने हडसन इंस्टीट्यूट के एक कार्यक्रम में कहा कि जब वह वहां पहुंच रही थीं, तभी उन्होंने ट्रंप का यह पोस्ट देखा। उन्होंने कहा, "मैं उम्मीद करती हूं कि भारत को 'नरक' कहने और इस तरह के बयान देने से बचा जाए।" उन्होंने इन बयानों को अनुचित बताते हुए कहा कि इन्हें नजरअंदाज किया जाना चाहिए।
हिंदू अमेरिकन फ़ाउंडेशन (HAF) ने भी इस पोस्ट पर गहरी नाराजगी जताई। संगठन ने कहा कि वह इस पोस्ट से "गहराई से परेशान" है क्योंकि इस तरह के नस्लभेदी और नफरत भरे बयान भारतीय और चीनी मूल के अमेरिकियों को सीधे निशाना बनाते हैं।
जन्मसिद्ध नागरिकता का संवैधानिक आधार
अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता (Birthright Citizenship) का अधिकार संविधान के 14वें संशोधन के तहत प्रदत्त है। यह मुद्दा दशकों से अमेरिकी इमिग्रेशन बहस का केंद्र रहा है।
अधिकांश कानूनी विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि अमेरिका में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति, उसके माता-पिता की नागरिकता या कानूनी स्थिति चाहे जो भी हो, नागरिकता का संवैधानिक अधिकारी होता है। ट्रंप प्रशासन इस व्याख्या को बदलने की कोशिश में लगा है, जिसे अदालतों में चुनौती मिल रही है।
गहरा संदर्भ: भारत-अमेरिका संबंधों पर असर
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार शुल्क (Tariff) को लेकर तनाव पहले से चल रहा है। ट्रंप प्रशासन ने भारतीय आयात पर भारी शुल्क लगाने की धमकी दी है और दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता जारी है।
इस पृष्ठभूमि में ट्रंप के ये बयान भारतीय-अमेरिकी समुदाय को — जो अमेरिका में सबसे शिक्षित और उच्च आय वर्ग में आता है — सीधे प्रभावित करते हैं। भारतीय-अमेरिकी अमेरिकी हाई-टेक उद्योग की रीढ़ माने जाते हैं और इस समुदाय पर लक्षित नस्लभेदी बयान द्विपक्षीय संबंधों में कड़वाहट बढ़ा सकते हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत सरकार राजनयिक स्तर पर इस मामले को कैसे आगे बढ़ाती है और क्या अमेरिकी प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक स्पष्टीकरण आता है।