क्या चुनाव आयोग की निष्पक्षता जरूरी है? राहुल गांधी के आरोपों में क्या दम है?

सारांश
Key Takeaways
- चुनाव आयोग की निष्पक्षता महत्वपूर्ण है।
- राहुल गांधी के आरोपों का समर्थन किया गया है।
- डीएमके लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही है।
- भाजपा की नीतियों से जनता त्रस्त है।
- केंद्र सरकार को जनहित के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
चेन्नई, २५ अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। डीएमके के प्रमुख नेता और प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों का समर्थन करते हुए कहा कि हर मतदाता सूची में कुछ न कुछ त्रुटियां अवश्य पाई जाती हैं।
टीकेएस एलंगोवन ने आगे कहा कि राहुल गांधी के आरोप बिल्कुल सही हैं क्योंकि हर मतदाता सूची में कुछ न कुछ गलती पाई गई है। राहुल गांधी ने सबूतों के आधार पर कई बातें उजागर की हैं और उन्हीं के आधार पर आरोप लगाए हैं। लेकिन चुनाव आयोग इन सवालों का जवाब देने में भाजपा के पीछे छिप रहा है।
उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक स्थिति है।
एलंगोवन ने भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर के उस बयान पर भी निशाना साधा, जिसमें उन्होंने कहा था कि 'भगवान हनुमान अंतरिक्ष में जाने वाले पहले व्यक्ति थे।'
डीएमके के टीकेएस एलंगोवन ने इसे भाजपा की रणनीति का हिस्सा बताते हुए कहा, "भाजपा वैज्ञानिक विकास को धार्मिक कहानियों के माध्यम से जोड़कर लोगों को भ्रामक जानकारी दे रही है। यह उनकी पुरानी रणनीति है, जिससे वे जनता का ध्यान असली मुद्दों से हटाना चाहते हैं। इस तरह के बयान गैर-जिम्मेदाराना और वैज्ञानिक सोच के खिलाफ हैं। भाजपा की नीतियों से लोग त्रस्त हैं।"
संविधान संशोधन विधेयक पर उन्होंने कहा, "भाजपा कभी भी लोकतंत्र का सम्मान नहीं करती। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का दुरुपयोग इसका स्पष्ट उदाहरण है। सुप्रीम कोर्ट ने भी ईडी की शक्ति के दुरुपयोग की आलोचना की है।"
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ईडी को 'वॉशिंग मशीन' की तरह इस्तेमाल करती है, जो उनके साथ जुड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई को रोक देती है। यह लोकतंत्र के लिए सबसे खतरनाक बात है। भाजपा अपने भ्रष्ट मंत्रियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करती, जबकि विपक्षी दलों के नेताओं, खासकर मुख्यमंत्रियों को निशाना बनाया जाता है। डीएमके इस तरह के कदमों का विरोध करेगी और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
एलंगोवन ने संविधान संशोधन विधेयक को जनविरोधी और गैरकानूनी करार देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य विपक्ष को कमजोर करना है। इस तरह के कदम लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करते हैं और जनता आने वाले चुनावों में इसका जवाब देगी। इन सबके अलावा, केंद्र सरकार को जनहित से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए। जनता भाजपा की नीतियों से त्रस्त है और आने वाले समय में इसका जवाब देगी।